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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता) • 9 श्लोक

श्री गणेश मङ्गल अष्टकम्

सर्वप्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान गणेश का यह अष्टक हर नए कार्य, व्यापार, गृहप्रवेश और यात्रा में निर्विघ्न सिद्धि और मंगलकारी सफलता देता है।

रचयिता गणेश पुराण / महर्षि व्यास
स्रोत / ग्रन्थ गणेश पुराण (उपासना खण्ड)
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
गजाननाय महते लम्बकण्ठाय मङ्गले । विघ्नहर्त्रे सुराध्यक्ष मङ्गलात्मने मङ्गलम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथी के मुख वाले गजानन, महान तेजस्वी, सुंदर कंठ वाले, समस्त विघ्नों को हरने वाले, देवताओं के स्वामी और साक्षात् मंगल स्वरूप भगवान गणेश का सदा मंगल हो।
English Translation: To elephant-faced Gajanana, magnificent and sublime, dispeller of obstacles, Lord of celestials, personification of auspiciousness, may there be eternal auspiciousness.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
एकदन्ताय शुण्डाय शूर्पकर्णाय धीमते । मोदकप्रियदेवाय गणनायकाय मङ्गलम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: एकदन्त, सुंदर सूंड वाले, सूप के समान विशाल कानों वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, मोदक (लड्डू) के प्रिय और प्रमथगणों के नायक भगवान गणेश का मंगल हो।
English Translation: Single-tusked, bearing the curved trunk, with winnowing-basket ears, embodiment of wisdom, lover of modakas, leader of Pramathas, may auspiciousness attend Him.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
पार्वतीहर्षजनकाय शम्भुपुत्राय पावने । कार्तिकेयसहोत्थाय वरदाय च मङ्गलम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: माता पार्वती को परमानंद देने वाले, भगवान शिव के पावन पुत्र, सेनापति कार्तिकेय के प्रिय सहोदर (भाई) और भक्तों को वरदान देने वाले गणेश का मंगल हो।
English Translation: Delight of Mother Parvati, pure son of Shiva, beloved brother of Kartikeya, bestower of divine boons, may auspiciousness attend Ganesha.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
रक्तपुष्पप्रियायेह सिन्दूरारुणगात्रक । मूषकवाहनायेह सर्वसिद्ध्यै च मङ्गलम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: लाल पुष्पों (गुड़हल) के प्रिय, सिन्दूर से लाल कांतिमान शरीर वाले, मूषक (चूहे) की सवारी करने वाले और समस्त सिद्धियों के दाता भगवान गणेश का मंगल हो।
English Translation: Fond of red flowers, body glowing crimson with holy sindoor, mounted upon the mouse, bestower of all perfections, may auspiciousness be unto Him.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
अग्रपूज्याय लोकेषु विघ्नेशाय महौजसे । ब्रह्मादिदेववन्द्याय सर्वसम्पदे मङ्गलम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: तीनों लोकों में सर्वप्रथम पूजे जाने वाले, विघ्नों के स्वामी विघ्नेश, महातेजस्वी, ब्रह्मादि देवताओं द्वारा वंदित और समस्त संपदाओं के मूल भगवान गणेश का मंगल हो।
English Translation: Worshipped first in all worlds, sovereign master of obstacles, supremely glorious, revered by Brahma and celestials, root of all prosperity, may auspiciousness be unto Him.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
बुद्धिप्रदाय शान्ताय विद्याबुद्धिस्वरूपिणे । भक्ताभयप्रदात्रे च हेरम्बाय च मङ्गलम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: सद्बुद्धि देने वाले, परम शांत, साक्षात् विद्या और विवेक स्वरूप, भक्तों को अभयदान देने वाले हेरम्ब भगवान गणेश का सदा मंगल हो।
English Translation: Bestower of pure intellect, serene, embodiment of wisdom and knowledge, granter of fearlessness to devotees, Heramba Ganesha, may there be auspiciousness.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
चतुर्भुजधरायेह पाशाङ्कुशयुताय च । वरदाभयहस्ताय गणाधीशाय मङ्गलम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: चार भुजाओं को धारण करने वाले, हाथों में पाश और अंकुश लिए हुए, तथा वरद व अभय मुद्रा प्रदान करने वाले गणाधीश गणेश का नित्य मंगल हो।
English Translation: Endowed with four arms, holding the noose and elephant goad, displaying gestures of boons and fearlessness, Lord of celestial hosts, may auspiciousness attend Him.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
सर्वकल्याणमूर्तये सर्वारिष्टनिवारिणे । वक्रतुण्डाय देवाय नित्यमेवास्तु मङ्गलम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त कल्याणों की साक्षात् मूर्ति, समस्त अरिष्टों, अमंगलों और संकटों का निवारण करने वाले भगवान वक्रतुण्ड का सदा सर्वदा मंगल हो।
English Translation: Personification of all auspicious fortunes, dispeller of all adversities and planetary evils, Lord Vakratunda, may there be everlasting auspiciousness.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
गणेशमङ्गलाष्टकं यः पठेच्छ्रद्धया नरः । सर्वविघ्नैर्विमुक्तः सन् सर्वकार्येषु सिद्ध्यति ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से इस पावन गणेश मङ्गलाष्टकम का पाठ करता है, वह समस्त विघ्न-बाधाओं से मुक्त होकर अपने प्रत्येक कार्य में पूर्ण सफलता और सिद्धि प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever recites this sacred Ganesha Mangalashtakam with devotion is freed from all obstacles, accomplishing complete success and perfection in all endeavors.
✨ समाप्ति
।। इति श्री गणेश मङ्गल अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 बुधवार को प्रातः स्नान कर लाल या पीले वस्त्र पहनें।
  • 2 भगवान गणेश के समक्ष घी का दीपक जलाएं, सिन्दूर, दूर्वा (दूब घास) और मोदक या लड्डू अर्पित करें।
  • 3 हाथ जोड़कर 'विघ्नहर्त्रे सुराध्यक्ष मङ्गलात्मने मङ्गलम्' भाव से पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ नया व्यापार, नौकरी, गृह-प्रवेश या विवाह आदि सभी कार्यों में आने वाले विघ्न समाप्त होते हैं।
  • ✔ बुद्धि, एकाग्रता, ज्ञान और निर्णय क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
  • ✔ बुध ग्रह के दोष शांत होकर घर में रिद्धि-सिद्धि और धन-धान्य का वास होता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी