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BHAKTI KI SHAKTI
📜 माता गौरी के स्वामी भगवान शिव (गौरीश) • 9 श्लोक

गौरीश अष्टकम्

माता गौरी के प्रिय पति भगवान गौरीश की यह स्तुति साधक के समस्त पापों और दारिद्र्य का नाश कर अखण्ड सौभाग्य, दाम्पत्य प्रेम और शिवलोक देती है।

रचयिता महर्षि व्यास / शिव पुराण
स्रोत / ग्रन्थ शिव पुराण / स्तोत्र रत्नावली
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
गौरीश शङ्कर विभो करुणावरुणालय । चन्द्रचूड त्रिनेत्रेश पाहि मां शरणागतम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे माता गौरी के स्वामी! हे शङ्कर! हे सर्वव्यापी विभो! हे करुणा के अगाध समुद्र! मस्तक पर चन्द्रमा धारण करने वाले और तीन नेत्रों के स्वामी! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: O Lord of Gauri, auspicious Shankara, all-pervading Master, ocean of mercy, adorned with the crescent moon, three-eyed Lord, protect me who have sought shelter in You.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
कैलासवासिन् देवेश पार्वतीश मनोहरा । भस्मलेपधरायेह पाहि मां शरणागतम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: कैलास पर्वत पर निवास करने वाले, देवों के देव, माता पार्वती के मन को मोहने वाले और अंगों पर पवित्र भस्म धारण करने वाले हे महादेव! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: Dweller on Mount Kailasa, God of gods, enchanting consort of Parvati, adorned with holy ash, protect me who have taken refuge in You.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
गङ्गाधर महाकाल नीलग्रीव पिनाकधृक् । यमदर्पहरायेह पाहि मां शरणागतम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: मस्तक पर गंगा को धारण करने वाले, महाकाल, नीले कंठ वाले, हाथ में पिनाक धनुष रखने वाले और यमराज के घमंड को चूर करने वाले हे शम्भो! मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: Bearer of holy Ganga, Mahakala, blue-throated, wielder of the Pinaka bow, crusher of Yamaraja's arrogance, protect me, O Lord.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
वृषभारूढ भूतेश प्रमथेश कृपानिधे । दारिद्र्यदहनोदार पाहि मां शरणागतम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: नन्दी वृषभ पर सवार, भूतनाथ, प्रमथगणों के स्वामी, दया के खजाने और दरिद्रता को भस्म करने में अत्यंत उदार हे भगवान शिव! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: Mounted on the sacred bull, master of spirits and Pramathas, ocean of grace, generous incinerator of poverty, protect me who have surrendered unto You.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
सच्चिदानन्दरूपाय विश्वनाथ महेश्वरा । अन्धकासुरसंहार पाहि मां शरणागतम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: सत्य, चित्त और आनंद स्वरूप, विश्वनाथ, महेश्वर और अंधकासुर का संहार करने वाले हे देवाधिदेव! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: Embodiment of truth-consciousness-bliss, Vishwanatha, supreme Maheswara, destroyer of demon Andhaka, protect me who seek refuge in You.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
मुक्तिप्रद दयासिन्धो सर्वलोकेश वन्दिता । मृत्युञ्जय महाभाग पाहि मां शरणागतम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: मोक्ष प्रदान करने वाले, दया के सागर, समस्त लोकों के स्वामियों द्वारा वंदित और मृत्यु को जीतने वाले मृत्युंजय भगवान शंकर! मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: Bestower of liberation, ocean of mercy, adored by lords of all worlds, conqueror of death (Mrityunjaya), protect me, O Lord.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
उमाकान्त महेशान सर्वसम्पत्प्रदायका । कलिमलौघविनाशाय पाहि मां शरणागतम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: माता उमा के कांत (पति), महेश्वर, समस्त संपत्तियां देने वाले और कलियुग के पाप-समूहों का नाश करने वाले हे शिव! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: Beloved of Uma, supreme Ruler, giver of all wealth, vanquisher of Kali-yuga impurities, protect me who have taken shelter in You.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
शान्तिप्रद सुराध्यक्ष सर्वपापविनाशन । गौरीश शङ्कर विभो पाहि मां शरणागतम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: परम शांति देने वाले, देवताओं के अध्यक्ष, समस्त पापों का विनाश करने वाले हे गौरीश! हे शङ्कर! हे विभो! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: Bestower of peace, leader of celestials, destroyer of all sins, O Gaurisha, Shankara, all-pervading Lord, protect me who am surrendered unto You.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
गौरीशाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेद्भक्तितत्परः । सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोके महीयते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस पावन गौरीश अष्टकम का पाठ करता है, वह संसार के समस्त पापों और भवों से मुक्त होकर अंत में शिवलोक में पूजित होता है।
English Translation: Whoever recites this sacred Gaurisha Ashtakam with focused devotion is released from all sins, enjoying eternal glory in Lord Shiva's divine realm.
✨ समाप्ति
।। इति श्री गौरीश अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 सोमवार को स्नान कर श्वेत वस्त्र पहनें और शिवलिंग पर जल व बेलपत्र अर्पित करें।
  • 2 माता गौरी और भगवान शिव के संयुक्त रूप का ध्यान करें।
  • 3 घी का दीपक जलाकर 'गौरीश शङ्कर विभो पाहि मां शरणागतम्' भाव से पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ दाम्पत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और पति-पत्नी के मध्य आपसी सामंजस्य बढ़ता है।
  • ✔ मनोवांछित योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और विवाह बाधाएं शांत होती हैं।
  • ✔ भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त कृपा से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि