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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्रीकृष्ण (गोविन्द) • 9 श्लोक

श्री गोविन्दाष्टकम्

आदि शंकराचार्य विरचित यह अष्टक भगवान श्रीकृष्ण के परब्रह्म और लीला स्वरूप का गान करता है, जो समस्त पापों का हरण कर परमानन्द और मुक्ति देता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ स्तोत्र रत्नावली (आदिशंकराचार्य कृत)
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त बुधवार, एकादशी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
सत्यं ज्ञानमनन्तं नित्यमनाकाशं परमाकाशं गोष्ठप्राङ्गणरिङ्खणलोलमनायासं परमायासम् । मायाकल्पितनानाकारमनाकारं भुवनाकारं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जो सत्य स्वरूप, ज्ञान स्वरूप, अनन्त, नित्य, भौतिक आकाश से परे परम व्योम हैं, जो ब्रज के गोकुल आँगन में घुटनों के बल रेंगने में मग्न रहते हैं, जो अनायास ही संसार की सृष्टि करने वाले हैं, जो माया से अनेक रूप धारण करते हुए भी निराकार हैं, उन पृथ्वी के रक्षक, परमानन्द स्वरूप और शरणागतों के लिए सुलभ गोविन्द को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Embodiment of truth, boundless consciousness, beyond physical space, sporting on knees in Vraja's courtyards, effortlessly manifesting worlds, formless yet bearing cosmic forms, I bow to Govinda, supreme bliss easily attained by the surrendered.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
मृत्स्नामत्सीहेति यशोदाताडनशैशवसंभ्रान्तं विस्फारितवदनालोकितलोकालोकचतुर्दशभुवनम् । सूर्यचन्द्रशिखिशक्रविधिमहेन्द्रजलाधिपयमसवनं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: 'तूने मिट्टी खाई है' कहकर माता यशोदा द्वारा डांटे जाने पर जो बालसुलभ भय का अभिनय करते हैं और जब मुख खोलते हैं तो यशोदा जी को चौदह भुवन, सूर्य, चन्द्र, अग्नि, इन्द्र, ब्रह्मा और यमराज के लोक दिख जाते हैं, उन परमानन्द स्वरूप भगवान गोविन्द को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Pretending childish bewilderment when Mother Yashoda scolds Him for eating clay, revealing within His opened mouth the fourteen cosmic realms, sun, moon, and gods, I bow to Supreme Govinda.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
विष्णो विष्णो प्रह्लादकृते विहितनृहरिरूपं नरवरवीरं भक्तानुग्रहतत्परमीशं दुर्जनदलनाधीरम् । नित्यं शुद्धमचिन्त्यमभेद्यं ज्ञानमयं वरदानरतं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए जिन्होंने नृसिंह रूप धारण किया, जो श्रेष्ठ वीरों के वीर हैं, भक्तों पर अनुग्रह करने में सदा तत्पर, दुष्टों का दलन करने वाले, नित्य, शुद्ध, अचिन्त्य, अभेद्य, ज्ञानमय और वरदान देने वाले हैं, उन परमानन्द स्वरूप गोविन्द को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Who assumed the Narasimha incarnation for devotee Prahlada, hero of heroes, ever eager to bless the faithful, subduing the wicked, eternal, incomprehensible, and pure wisdom, I bow to Govinda.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
कंसध्वंसनदक्षमपारं नन्दनन्दनसुन्दररूपं पूतनास्तन्यहृतप्राणं कालियदमनमपारम् । गोपीवस्त्रापहरणप्रमोदितं यमलार्जुनभञ्जनकारं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जो कंस का संहार करने में समर्थ, नन्दबाबा के नन्दन, अति सुंदर रूप वाले, पूतना का स्तनपान करते हुए उसके प्राण हरने वाले, कालिय नाग का दमन करने वाले, गोपियों के वस्त्र हरण की लीला करने वाले और यमलार्जुन वृक्षों का उद्धार करने वाले हैं, उन परमानन्द गोविन्द को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Destroyer of tyrant Kamsa, enchanting son of Nanda, who sucked away Putana's life with her milk, subdued the serpent Kaliya, and liberated Yamalarjuna trees, I bow to blissful Govinda.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
गोवर्धनगिरिधरणमुदारं सुरपतिमदमथनैकरतं वेणुनादकलगीतविमोहकमखिलचराचरनाथम् । राधाकान्तमनन्तमनादिं गोकुलरक्षणतत्परमीशं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका पर धारण कर देवराज इन्द्र के अभिमान को चूर किया, जिनकी मधुर वेणु की तान से संपूर्ण चराचर मुग्ध हो जाता है, जो श्रीराधा के प्राणवल्लभ, अनन्त, अनादि और गोकुल की रक्षा में तत्पर हैं, उन परमानन्द गोविन्द को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Who lifted Mount Govardhana shattering Indra's vanity, captivating creation with melodious flute notes, beloved of Radha, without beginning or end, protector of Gokula, I revere Govinda.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
पार्थरथे कृतसारथिलीलं कौरवसैन्यविनाशकरं गीतामृतवरदानसुदक्षं भक्तजनावनिहृष्टम् । विश्वरूपप्रकटितवैभवमखिलजगन्मयमुत्तमरूपं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जिन्होंने अर्जुन के रथ का सारथी बनकर महाभारत में कौरव सेना का विनाश कराया, जिन्होंने विश्व को गीता का दिव्य अमृत प्रदान किया, और जिन्होंने अपना विराट विश्वरूप प्रकट कर संपूर्ण जगत् को अपने भीतर दिखाया, उन परमानन्द गोविन्द को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Charioteer of Arjuna on the battlefield, orchestrator of righteousness, imparting the nectar of the Bhagavad Gita, unveiling His cosmic Vishvarupa, I worship supreme Govinda.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
क्षीराम्भोधिकृतशयनमनन्तं शेषफणामणिरञ्जितपादं लक्ष्मीवक्षसि विश्रमलीलं गरुडध्वजमुपवीतम् । पद्मनाभमरविन्दसुनेत्रं भक्तहृदिस्थितपरमप्रकाशं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जो क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर शयन करते हैं, जिनके चरण शेषनाग की मणियों से सुशोभित हैं, जो गरुड़ध्वज, पद्मनाभ, कमल के समान नयनों वाले और भक्तों के हृदय में परम प्रकाश रूप से विराजमान हैं, उन परमानन्द गोविन्द को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Reclining on the cosmic serpent Shesha upon the ocean of milk, bearing lotus eyes, dwelling within the hearts of devotees as radiant illumination, I bow to Supreme Govinda.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
सच्चिदानन्दघनं परिपूर्णं सर्ववेदान्तसुवेद्यविशुद्धं मुक्तिदमेकमपारमपारं भक्तसुहृत्सुखहेतुम् । प्रणतजनार्तिविनाशनदक्षं श्रीपतिमच्युतमादिममूर्तीं क्ष्मामाथं प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जो घनीभूत सच्चिदानन्द, परिपूर्ण, समस्त वेदान्त द्वारा जानने योग्य, परम विशुद्ध, एकमात्र मुक्ति प्रदाता, भक्तों के सच्चे सखा, शरणागतों के समस्त दुःखों का नाश करने वाले, श्रीपति अच्युत और आदि पुरुष हैं, उन परमानन्द गोविन्द को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Concentrated existence-consciousness-bliss, realized via Vedanta, supreme emancipator, eternal companion of the faithful, dispeller of agony, Lord of Sri, I bow to blissful Govinda.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
गोविन्दाष्टकमेतदधीते यः पठेच्छ्रद्धया युतः । स मुच्यते महापापैः प्राप्नोति विष्णोः परं पदम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति से युक्त होकर इस गोविन्दाष्टकम का अध्ययन व पाठ करता है, वह समस्त घोर पापों से मुक्त होकर भगवान श्रीहरि विष्णु के परम वैकुण्ठ पद को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever studies and recites this Govindashtakam with serene devotion is freed from immense sins and attains the eternal supreme realm of Lord Vishnu.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्री गोविन्दाष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
  • 2 भगवान गोविन्द के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं और तुलसीदल व माखन-मिश्री अर्पित करें।
  • 3 शांत भाव से 'प्रणमामि परं परमानन्दं सुलभं गोविन्दम्' पद का ध्यान करते हुए पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ जन्म-जन्मान्तरों के संचित पापों का क्षय होकर अंतःकरण में आध्यात्मिक शांति मिलती है।
  • ✔ गोविन्द की कृपा से पारिवारिक क्लेश दूर होते हैं और बुद्धि में निर्मलता आती है।
  • ✔ जीवन के अंत में भगवान के परम वैकुण्ठ धाम की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: बुधवार, एकादशी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा