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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्रीहरि विष्णु (शरणागतवत्सल) • 9 श्लोक

हरि शरण अष्टकम्

संसार के जन्म-मरण के भय, पापों और दीनता से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीहरि के चरणों में पूर्ण शरणागति का यह पावन स्तोत्र अत्यंत प्रभावशाली है।

रचयिता महर्षि व्यास / भागवत परम्परा
स्रोत / ग्रन्थ श्रीमद्भागवत महापुराण / स्तोत्र महोदधि
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, वैकुण्ठ चतुर्दशी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
ध्यायन्ति ये हरिं नित्यं सर्वदुःखविनाशनम् । न तेषां विद्यते क्वापि भवभीतिः कदाचन ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य समस्त दुःखों का नाश करने वाले भगवान श्रीहरि का नित्य ध्यान करते हैं, उन्हें इस संसार में कभी किसी भी प्रकार का भव-भय (मृत्यु और संताप का डर) नहीं सताता।
English Translation: Those who meditate daily upon Lord Hari, the destroyer of all sorrows, never experience fear of worldly suffering or mortality anywhere.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
शङ्खचक्रगदाहस्तं पीताम्बरधरं विभुम् । शरणं त्वां प्रपन्नोऽस्मि हरे संसारतारक ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथों में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले, पीताम्बर ओढ़े हुए और सर्वव्यापी भगवान श्रीहरि! हे संसार-सागर से तारने वाले! मैं आपकी शरण में आया हूँ।
English Translation: Holding the conch, discus, and mace, draped in yellow silks, all-pervading Lord Hari! Deliverer across the cosmic sea, I have taken refuge in You.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
अनाथस्य शरण्यस्त्वं दीनानां बन्धुरुच्यते । दयानिधे महाविष्णो पाहि मां शरणागतम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: आप अनाथों के एकमात्र आश्रय हैं और दीन-दुखियों के सच्चे बंधु कहलाते हैं। हे दया के सागर महाविष्णु! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: You are the refuge of the orphan and the true kin of the humble. O treasure of compassion, Mahavishnu, protect me who have surrendered unto You.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
न मेऽस्ति गतिरन्या वै त्वमेव शरणं मम । कृपां कुरु जगन्नाथ सर्वदोषक्षयं कुरु ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: इस संसार में आपके अतिरिक्त मेरी कोई अन्य गति (सहारा) नहीं है, आप ही मेरे एकमात्र शरण हैं। हे जगन्नाथ! मुझ पर कृपा कीजिए और मेरे समस्त दोषों का नाश कीजिए।
English Translation: I have no other destiny or sanctuary in this world; You alone are my refuge. Show mercy, O Lord of the universe, and dissolve all my faults.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
अजामिलोऽपि मुक्तात्मा यन्नामस्मरणेन वै । तमहं शरणं यामि नारायणमनामयम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके पावन नाम के स्मरण मात्र से पापी अजामिल भी मुक्त हो गया, उन निर्विकार, निष्पाप भगवान नारायण की मैं शरण में जाता हूँ।
English Translation: By the mere utterance of whose holy name even Ajamila attained liberation, I surrender unto that flawless Lord Narayana.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
गजेन्द्रत्राणकर्तारं प्रह्लादाभीष्टदायकम् । द्रौपदीमानरक्षकं त्वां वन्दे हरिमीश्वरम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: ग्राह के मुख से गजेन्द्र को बचाने वाले, भक्त प्रह्लाद के मनोरथ पूर्ण करने वाले और सभा में द्रौपदी की लाज की रक्षा करने वाले भगवान श्रीहरि की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: Rescuer of Gajendra from the crocodile, granter of Prahlada's prayers, guardian of Draupadi's honor, I bow unto You, Lord Hari.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
कायेन मनसा वाचा यत्कृतं दुष्कृतं मया । तत्सर्वं क्षम्यतां देव हरे गोविन्द केशव ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: शरीर से, मन से अथवा वाणी से मुझसे जो भी पाप या भूल हुई हो, हे देव! हे हरे! हे गोविन्द! हे केशव! उन सबको क्षमा कर दीजिए।
English Translation: Whatever misdeeds I have committed through body, mind, or speech, forgive all of them, O Lord Hari, Govinda, Keshava!
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
विष्णो त्वदीयचरणे मतिर्मे स्यात् सदा स्थिरा । अन्ते नारायणं स्मृत्वा गच्छेयं परमां गतिम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: हे विष्णो! मेरी बुद्धि सदा आपके पावन चरणों में स्थिर रहे, और जीवन के अंतिम क्षण में आपका पावन नाम स्मरण करते हुए मैं आपकी परम गति को प्राप्त करूँ।
English Translation: O Vishnu, may my intellect remain anchored perpetually at Your lotus feet, and remembering Narayana at life's departure, may I attain supreme liberation.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
हरिशरणाष्टकं पुण्यं यः पठेद्भक्तितत्परः । सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णोः सायुज्यमाप्नुयात् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण भक्ति से इस पावन हरिशरणाष्टकम का पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर भगवान श्रीहरि के परम सायुज्य मोक्ष को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever recites this sacred Hari Sharana Ashtakam with sincere devotion is liberated from all sins, attaining eternal oneness with Lord Vishnu.
✨ समाप्ति
।। इति श्री हरिशरणाष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।
  • 2 भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाएं और तुलसीदल अर्पित करें।
  • 3 हाथ जोड़कर दीन भाव से 'शरणं त्वां प्रपन्नोऽस्मि हरे संसारतारक' का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ अजामिल और गजेन्द्र के समान भगवान श्रीहरि की अहैतुकी कृपा से पापों से मुक्ति मिलती है।
  • ✔ मन का समस्त अहंकार, भय और चिंताएं शांत होकर असीम शांति का अनुभव होता है।
  • ✔ जीवन के अंत में यमराज के दूतों का भय नहीं रहता और सीधे वैकुण्ठ धाम मिलता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, वैकुण्ठ चतुर्दशी