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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती हिंगुलाज माता (ब्रह्मरन्ध्र पीठ) • 9 श्लोक

हिंगुलाज अष्टकम्

माता सती के ब्रह्मरन्ध्र (सिर) गिरने से प्रादुर्भूत ५१ शक्तिपीठों में प्रथम हिंगुलाज भवानी का यह अष्टक भय, कुल-दोष और असाध्य संकटों का नाश करता है।

रचयिता शाक्त परम्परा / तन्त्र महोदधि
स्रोत / ग्रन्थ तन्त्र चूड़ामणि (५१ शक्तिपीठ)
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त मंगलवार, शुक्रवार, नवरात्रि, अष्टमी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
हिंगुलाजे महामाये ब्रह्मरन्ध्रनिवासिनी । सतीदेहसमुद्भूते हिंगुलाजायै नमो नमः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे हिंगुलाज माता! हे महामाया! माता सती के ब्रह्मरन्ध्र (मस्तक) के गिरने से प्रकट होने वाली परम शक्तिपीठ स्वरूपा देवी! आपको मेरा बारम्बार नमस्कार है।
English Translation: O Mother Hingulaj! O Mahamaya! Manifest where Mother Sati's sacred Brahmarandhra fell, supreme Shakti Peetha, salutations again and again unto You.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
मरुभूमिकृतावासे ज्वालामुखिसमन्विते । दारिद्र्यदुःखशमनी पाहि मां हिंगुलाजिके ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: दुर्गम मरुभूमि में निवास करने वाली, दिव्य ज्वाला के रूप में प्रज्वलित, दरिद्रता और दुःखों का शमन करने वाली हे माता हिंगुलाज! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: Dwelling amidst rugged desert sanctuaries, blazing as a divine living flame, dispeller of poverty and sorrow, protect me, Mother Hingulaj.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
सिन्दूरारुणगात्रायै रक्तपुष्पप्रियाय च । भैरवेण युतायै च हिंगुलाजायै नमो नमः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: सिन्दूर के समान लाल अंगकांति वाली, लाल पुष्पों से प्रसन्न होने वाली और भगवान भीमलोचन भैरव के साथ विराजमान हिंगुलाज माता को मेरा प्रणाम है।
English Translation: Body resplendent like red vermilion, pleased by crimson flowers, united with Bhimalochana Bhairava, salutations to Mother Hingulaj.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
सर्वशत्रुविनाशाय सर्वोपद्रवशान्तये । ब्रह्मतेजोमयीं देवीं वन्दे हिंगुलाजेश्वरीम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त शत्रुओं के विनाश के लिए और सभी प्रकार के उपद्रवों की शांति के लिए, ब्रह्मतेज से परिपूर्ण भगवती हिंगुलाजेश्वरी की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: For the eradication of all hostile forces and the pacification of all afflictions, I revere Goddess Hingulajeshwari, blazing with divine Brahmanic light.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
भक्तकल्याणदात्री च सर्वसिद्धिप्रदायिनी । हिंगुलाजे सुरवन्द्ये नमोऽस्तु वरदायिके ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: भक्तों का नित्य कल्याण करने वाली, समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाली, देवताओं द्वारा पूजित और वरदान देने वाली हे हिंगुलाज देवी! आपको प्रणाम है।
English Translation: Bestower of auspicious welfare upon devotees, granter of all spiritual accomplishments, adored by celestials, boon-giver, salutations to Hingulaj.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
त्रिशूलडमरूधरे पाशाङ्कुशधरां शुभाम् । महादुर्गास्वरूपां तां हिंगुलाजं भजाम्यहम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथों में त्रिशूल, डमरू, पाश और अंकुश धारण करने वाली, कल्याणमयी और साक्षात् महादुर्गा स्वरूपा भगवती हिंगुलाज माता का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: Wielding the trident, damaru drum, noose, and elephant goad, auspicious embodiment of Maha Durga, I adore Mother Hingulaj.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
दूरदेशस्थितानां च स्मरणात्कुरुषे शुभम् । हिंगुलाजे जगद्धात्री पाहि मां शरणागतम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: दूर देश में स्थित रहने पर भी केवल स्मरण करने मात्र से जो अपने भक्तों का कल्याण कर देती हैं, उन संपूर्ण जगत की धात्री हिंगुलाज माता! मुझ शरणागत की रक्षा कीजिए।
English Translation: Bestowing auspicious grace upon devotees living far away through mere remembrance, sustainer of the world, Mother Hingulaj, protect this surrendered soul.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
जन्ममृत्युभयघ्न्यै च मोक्षसाम्राज्यदायिनी । हिंगुलाजमहादेव्यै नित्यमेव नमो नमः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जन्म और मृत्यु के भय को मिटाने वाली तथा मोक्ष का साम्राज्य देने वाली भगवती हिंगुलाज महादेवी को मेरा नित्य बारम्बार नमस्कार है।
English Translation: Dispeller of dread of birth and death, granter of the empire of supreme liberation, salutations perpetually unto the Great Goddess Hingulaj.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
हिंगुलाजाष्टकं पुण्यं यः पठेद्भक्तिसंयुतः । न तस्य जायते दुःखं सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण भक्ति और निष्ठा से इस पावन हिंगुलाज अष्टकम का पाठ करता है, उसे जीवन में कभी कोई दुःख नहीं सताता और वह सर्वत्र विजयी होता है।
English Translation: Whoever recites this holy Hingulaj Ashtakam with sincere devotion is freed from sorrow and achieves victorious triumph in all spheres of life.
✨ समाप्ति
।। इति श्री हिंगुलाज अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः या सायं काल लाल वस्त्र पहनकर पूर्वाभिमुख बैठें।
  • 2 माता हिंगुलाज के समक्ष सिन्दूर, कपूर और लाल पुष्प अर्पित करें।
  • 3 घी या चमेली के तेल का दीपक जलाकर 'हिंगुलाजायै नमो नमः' भाव से पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ दुर्गा स्वरूपा हिंगुलाज माता की कृपा से जन्म-जन्मान्तरों के कुलदोष और संकट मिटते हैं।
  • ✔ अज्ञात भय, भूत-प्रेत बाधा और शत्रुओं के कुचक्रों से रक्षा होती है।
  • ✔ साधक को बल, आरोग्य, संतान रक्षा और जीवन में हर संकट से विजय प्राप्त होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: मंगलवार, शुक्रवार, नवरात्रि, अष्टमी