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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान कार्तिकेय (स्कन्द / मुरुगन) • 9 श्लोक

कार्तिकेय अष्टकम

देवसेनापति भगवान कार्तिकेय का यह अष्टक मंगल ग्रह के क्रूर दोषों, शत्रु बाधा, भय और प्रतियोगिता में सफलता दिलाने वाला दिव्य स्तोत्र है।

रचयिता महर्षि अगस्त्य / स्कन्द पुराण
स्रोत / ग्रन्थ स्कन्द पुराण (कौमारिका खण्ड)
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त मंगलवार, षष्ठी तिथि (स्कन्द षष्ठी), कृत्तिका नक्षत्र
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
हे स्वामिनाथ करुणाकर दीनबन्धो श्रीपार्वतीतनय शङ्करसूनु रूप । षण्मुख तारकान्तक देवरक्ष पालय मां करुणया शरणागतोऽस्मि ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे स्वामिनाथ! हे करुणा के सागर! हे दीनों के बंधु! हे माता पार्वती और भगवान शंकर के नंदन! हे षडानन (छह मुख वाले)! हे तारकासुर का वध करने वाले और देवताओं के रक्षक! मुझ शरणागत की अपनी करुणा से रक्षा कीजिए।
English Translation: O supreme Master, compassionate friend of the humble, son of Parvati and Lord Shiva! Six-faced conqueror of demon Taraka, guardian of gods, protect me with Your mercy, for I have surrendered unto You.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
मयूरवाहनाय सुरारिसंहारकाय शक्तिधराय मणिकुण्डलमण्डिताय । कार्तिकेयाय कलिताखिललोकभर्त्रे नमो नमो गुह परात्परशम्भुपुत्र ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: मयूर (मोर) की सवारी करने वाले, असुरों का संहार करने वाले, हाथ में दिव्य 'शक्ति' अस्त्र धारण करने वाले, मणियों के कुण्डलों से सुशोभित और संपूर्ण लोकों का भरण-पोषण करने वाले हे कार्तिकेय गुह! हे शंभुपुत्र! आपको बारम्बार नमन है।
English Translation: Riding the celestial peacock, destroyer of demonic foes, wielder of the divine Spear (Shakti), adorned with gemmed earrings, sustainer of worlds, salutations to You, O Guha, son of Shiva.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
शूरपद्मासुरप्राणविनाशदक्ष मत्तासुराधिपमहामदनाशनाय । तेजस्विने भुवनपालनतत्पराय कार्तिकेयाय सततं प्रणमाम्यहं त्वाम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: शूरपद्म आदि दुष्ट असुरों के प्राण हरने में समर्थ, अहंकारी असुर राजाओं के घमंड को चूर करने वाले, परम तेजस्वी और समस्त भुवनों के पालन में तत्पर हे कार्तिकेय! मैं आपको निरंतर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Adept at extinguishing the life of demon Surapadma, crusher of pride of arrogant titans, supremely luminous, dedicated to universal protection, O Kartikeya, I perpetually bow to You.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
गङ्गासुताय शिखिवाहनसुप्रभाय स्वामिन् शरवणभवाय महोज्ज्वलाय । षट्कोणयन्त्रनिलयाय महाप्रभाय देहि प्रभो मम मनोरथसिद्धिमाशु ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: गंगा के पावन पुत्र, मयूर वाहन से सुशोभित, शरवण (सरकंडों के वन) में प्राकट्य लेने वाले, परम उज्ज्वल, षट्कोण यंत्र में निवास करने वाले और महाप्रतापी हे स्वामी! मेरे समस्त मनोरथों को शीघ्र सिद्ध कीजिए।
English Translation: O Son of Ganga, dazzling upon Your peacock mount, born in the sacred Saravana reeds, resplendent, residing within the mystical six-pointed hexagram yantra, grant fulfillment to my cherished wishes swiftly.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
देवेन्द्रवन्द्यपदपद्मयुगाय तुभ्यं वल्लीपते प्रणतिभाविभवान्तकाय । तारेशकान्तवदनाय सुरारिहन्त्रे नमो नमो द्विरदवक्त्रसहोदराय ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: देवराज इन्द्र द्वारा वंदित चरणकमलों वाले, माता वल्ली के स्वामी, शरणागतों के जन्म-मरण के भय को मिटाने वाले, चन्द्रमा के समान सुंदर मुख वाले, असुरों के संहारक और गजानन गणेश के प्रिय भ्राता! आपको बारम्बार नमस्कार है।
English Translation: Whose lotus feet are worshipped by Indra, beloved consort of Valli, dispeller of worldly rebirths for the surrendered, moon-faced vanquisher of foes, brother of elephant-faced Ganesha, salutations to You.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
क्रौञ्चाद्रिभेदपटवे सुरसैन्यपाय स्कन्दाय पावनयशोधनकीर्तिताय । ज्ञानप्रदाय मुनिपुङ्गवपूजिताय पालय मां भवभयाद्भयनाशन त्वम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: क्रौंच पर्वत को अपने बाण से विदीर्ण करने वाले, देवसेना के सेनापति, परम पवित्र यश से विभूषित, भक्तों को तत्वज्ञान देने वाले और श्रेष्ठ मुनियों द्वारा पूजित हे स्कन्द! हे भय का नाश करने वाले! मुझे संसार के भय से बचाइए।
English Translation: Cleaving the Krauncha mountain with Your arrow, commander of the celestial hosts, famed for unblemished glory, bestower of wisdom, adored by holy sages, O dispeller of fear, protect me from earthly dread.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
सेनापते शिवसुताखिलसौख्यदात्रे भक्तानुकम्पिनि दयाजलधे महेशात् । भक्ताभयप्रदमहेन्द्रमहेन्द्रपूज्य श्रीस्वामिनाथ सततं शरणीभव त्वम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: हे देवसेनापति! हे शिवनंदन! समस्त सुखों के दाता, भक्तों पर अनुकम्पा करने वाले, महेश्वर के अंश और दया के अगाध सागर, इन्द्रादि द्वारा वंदित हे स्वामिनाथ! आप सदा मेरी शरण बनिए।
English Translation: O celestial Commander, son of Shiva, giver of all joy, compassionate to seekers, ocean of grace, worshipped by Indra, O Lord Swaminatha, remain my perpetual sanctuary.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
दिव्यायुधाय शरजन्मसुखप्रदाय वल्लीसरोजमुखचुम्बितलोचनाय । षण्मातृकास्तन्यपाय महाबलाय कार्तिकेयाय सततं प्रणतोऽस्मि नित्यम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: दिव्य आयुध धारण करने वाले, शरवण में जन्म लेकर जगत को सुख देने वाले, छहों कृतिकाओं का स्तनपान करने वाले और असीम बलशाली हे भगवान कार्तिकेय! मैं नित्य आपके चरणों में नत-मस्तक हूँ।
English Translation: Bearing celestial weapons, delighting creation through Your auspicious advent, nurtured by the six Krittika mothers, endowed with colossal strength, O Kartikeya, I bow to You constantly.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
सुब्रह्मण्याष्टकं पुण्यं यः पठेच्छ्रद्धया नरः । विजयं लभते नित्यं शत्रुबाधा विमुच्यते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति से इस पावन सुब्रह्मण्य (कार्तिकेय) अष्टकम का पाठ करता है, वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है और समस्त शत्रु बाधाओं व ग्रह दोषों से सदा के लिए मुक्त हो जाता है।
English Translation: Whoever recites this sacred Subrahmanya (Kartikeya) Ashtakam with devotion secures perpetual victory and is forever freed from adversaries, fear, and planetary afflictions.
✨ समाप्ति
।। इति स्कन्दपुराणोक्तं श्री कार्तिकेय अष्टकम सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 मंगलवार या षष्ठी के दिन लाल वस्त्र धारण कर पूर्वाभिमुख बैठें।
  • 2 भगवान कार्तिकेय के चित्र या विग्रह के समक्ष सिन्दूर, लाल पुष्प और घी का दीपक अर्पित करें।
  • 3 शत्रु विजय और मंगल शांति का संकल्प लेकर इस अष्टक का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ जन्मकुंडली में मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव, मांगलिक दोष और रक्त विकार दूर होते हैं।
  • ✔ शत्रुओं द्वारा उत्पन्न बाधाओं पर पूर्ण विजय और मुकदमों में सफलता प्राप्त होती है।
  • ✔ विद्यार्थियों में तीक्ष्ण बुद्धि, एकाग्रता, साहस और परीक्षा-प्रतियोगिता में विजय मिलती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: मंगलवार, षष्ठी तिथि (स्कन्द षष्ठी), कृत्तिका नक्षत्र