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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान महाकाल भैरव (उज्जैन / काशी) • 9 श्लोक

महाकाल भैरव अष्टकम

काल के भी काल भगवान महाकाल भैरव का यह अष्टक अकाल मृत्यु, शनि-राहु-केतु के क्रूर ग्रह दोष, तंत्र बाधा और शत्रु भय को तत्काल भस्म करता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य / भैरव तन्त्र
स्रोत / ग्रन्थ रुद्रयामल तन्त्र / भैरव स्तोत्र
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त कालाष्टमी, शनिवार, मंगलवार, मासिक शिवरात्रि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
यं यं स्पृशति हस्तेन तं तं पालयते विभुः । महाकालभैरवं वन्दे भैरवं भयनाशनम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके हाथ का स्पर्श होते ही समस्त जीव अभय और सुरक्षित हो जाते हैं, उन समस्त प्रकार के भयों का नाश करने वाले सर्वव्यापी भगवान महाकाल भैरव को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Whoever is touched by His gracious hand is shielded and preserved; I bow to Lord Mahakala Bhairava, the dispeller of all fear.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
त्रिशूलडमरूधरं श्यामाङ्गं रक्तलोचनम् । दिगम्बरं महाभीमं महाकालं नमाम्यहम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथों में त्रिशूल और डमरू धारण करने वाले, श्याम वर्ण के अंगों वाले, लाल नेत्रों वाले, दिगम्बर और महापराक्रमी स्वरूप वाले भगवान महाकाल भैरव को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Holding the trident and damaru drum, with dark lustrous limbs, blazing red eyes, sky-clad, immensely formidable, I bow to Lord Mahakala.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
कालदण्डधरं देवं यमदर्पप्रणाशनम् । काशीक्षेत्रस्य पातारं महाकालं नमाम्यहम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथ में कालदण्ड धारण करने वाले, यमराज के अहंकार को नष्ट करने वाले और पावन काशी क्षेत्र की रक्षा करने वाले भगवान महाकाल भैरव को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Bearing the cosmic staff of Time (Kaladanda), crusher of Yamaraja's arrogance, protector of the sacred realm of Kashi, I bow to Mahakala.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
भूतवेतालसंसेव्यं सर्पभूषणभूषितम् । श्मशानवासिनं घोरं महाकालं नमाम्यहम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: भूत, प्रेत और वेतालों द्वारा जिनकी सेवा की जाती है, जो सर्पों के आभूषणों से सुशोभित हैं तथा श्मशान में निवास करने वाले घोर रूपधारी महाकाल भैरव को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Attended by spirits and vetalas, adorned with serpent ornaments, dwelling in the sacred cremation ground of dissolution, I bow to Mahakala.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
ग्रहपीडाहरं देवं शत्रुसंहारकारकम् । भक्ताभयप्रदातारं महाकालं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: शनि, राहु आदि समस्त क्रूर ग्रहों की पीड़ा को हरने वाले, दुष्ट शत्रुओं का संहार करने वाले और शरणागत भक्तों को अभयदान देने वाले भगवान महाकाल भैरव को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Dispeller of planetary afflictions of Saturn and Rahu, destroyer of evil adversaries, bestower of fearlessness upon devotees, I bow to Mahakala.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
मृत्युञ्जयं महारुद्रं कालभैरवमीश्वरम् । सर्वपापप्रशमनं महाकालं नमाम्यहम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: मृत्यु को जीतने वाले मृत्युंजय, महारुद्र, कालभैरव, सर्वेश्वर और समस्त पापों का शमन करने वाले भगवान महाकाल भैरव को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Conqueror of death (Mrityunjaya), supreme Rudra, Kalabhairava, Lord of all, pacifier of all sins, I bow to Mahakala.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
बटुकभैरवरूपेण बाललीलाप्रदर्शकम् । भैरवेश्वरमीशानं महाकालं नमाम्यहम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: भक्तों के कल्याण के लिए बटुक भैरव का बाल रूप धारण कर दिव्य लीलाएं प्रदर्शित करने वाले और समस्त भैरवों के अधिपति ईशान महाकाल को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Manifesting as youthful Batuka Bhairava displaying divine playful sports for devotees' welfare, supreme Lord of Bhairavas, I bow to Mahakala.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
उग्ररूपधरं शान्तं भक्तसंरक्षणे रतम् । ॐकारनादसंयुक्तं महाकालं नमाम्यहम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: दुष्टों के लिए उग्र रूप धारण करने वाले किन्तु भक्तों के लिए परम शांत, भक्तों की रक्षा में सदा तत्पर और ॐकार के दिव्य नाद से युक्त महाकाल भैरव को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Formidable to evil yet profoundly serene to devotees, ever vigilant in guarding the faithful, united with the cosmic Omkara resonance, I bow to Mahakala.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
महाकालभैरवाष्टकं यः पठेत् प्रयतः शुचिः । न तस्य कालभयमस्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पवित्र होकर श्रद्धापूर्वक इस महाकाल भैरव अष्टकम का पाठ करता है, उसे कभी काल अथवा अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता और वह सर्वत्र अजेय विजय प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever recites this Mahakala Bhairava Ashtakam with purity and devotion fears death no more, securing triumphant victory in all endeavors.
✨ समाप्ति
।। इति श्री महाकाल भैरव अष्टकम सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 शनिवार या मंगलवार की रात्रि में दक्षिण दिशा की ओर मुख कर बैठें।
  • 2 भगवान महाकाल भैरव के समक्ष सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं।
  • 3 कालभय और शत्रु शांति की प्रार्थना करते हुए इस अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ अकाल मृत्यु, भीषण दुर्घटना और असाध्य यमयातना का भय सदा के लिए समाप्त होता है।
  • ✔ शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव तत्काल शांत होते हैं।
  • ✔ शत्रुओं की बुरी नजर, अभिचार तंत्र और नजर दोष से अजेय सुरक्षा मिलती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: कालाष्टमी, शनिवार, मंगलवार, मासिक शिवरात्रि