Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 काशी मणिकर्णिका तीर्थ (महाश्मशान / तारक ब्रह्म) • 9 श्लोक

मणिकर्णिका अष्टकम्

काशी के परम मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका की स्तुति, जिसका पाठ मृत्यु भय को मिटाकर साक्षात् तारक मन्त्र और शिव-सायुज्य मुक्ति का फल देता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ काशी खण्ड (स्कन्द पुराण) / स्तोत्र रत्नावली
छन्द शार्दूलविक्रीडित छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त सोमवार, मणिकर्णिका स्नान पर्व, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
त्वत्तीरे मणिकर्णिके हरिरभूद्विश्वम्भरस्तत्क्षणं भक्त्या त्वां समुपस्पृशन्मुनिगणैर्गीतोऽवधूतैः सह । काशीक्षेत्रविभूषणे सुरनदीगङ्गातटे संस्थिते मातर्मोक्षविधायिनी भवति यस्त्वत्तीरमाश्रीयते ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे मणिकर्णिके! आपके पावन तट पर भगवान श्रीहरि विश्वंभर मुनियों और अवधूतों के साथ भक्तिपूर्वक आपका स्पर्श कर आनंदित हुए। काशी क्षेत्र की आभूषण और गंगा तट पर विराजमान हे माता! जो आपके तट का आश्रय लेता है, उसे सहज ही मोक्ष प्राप्त होता है।
English Translation: O Manikarnika! On Your banks Lord Hari Viswambhara along with realized ascetics delighted in touching Your waters. Jewel of Kashi on Ganga's edge, whoever takes refuge in You attains liberation.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
तापैर्मुच्यति संसृतिभ्रममयीं काशीं समेत्य ध्रुवं स्नात्वा ते मणिकर्णिके विमलतोयापूतमज्जो नरः । मुक्तात्मा भवति क्षणादपि शिवः कर्णे ददात्यक्षरं तारं ब्रह्म सनातनं पदमहो मातस्तवैवाश्रयात् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: संसार के तापों से मुक्त होने के लिए काशी में आकर जो मनुष्य आपके निर्मल जल में डुबकी लगाता है, वह तत्काल मुक्त आत्मा हो जाता है। भगवान शिव स्वयं उसके कान में सनातन तारक ब्रह्म मन्त्र प्रदान कर उसे परम पद देते हैं।
English Translation: A person arriving in Kashi and bathing in Your pure waters is instantly emancipated. Lord Shiva personally whispers the eternal Taraka Mantra into their ears, elevating them to the supreme abode.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
विष्णोश्चक्रकृतं ससारपदवीमुद्धर्तुकामं सरस्तत्पूरे मणिकर्णिके तव जले यो मज्जतीह स्वयम् । स्वर्गे वा न स वाञ्छति क्षितितले राज्यं पदं वा हरेः साक्षाच्छम्भुरसौ भवेत्करुणया मातस्तवैवाद्भुतात् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र द्वारा खोदे गए और आपके जल से भरे कुंड में जो मनुष्य स्वयं स्नान करता है, वह स्वर्ग या पृथ्वी के राज्य की कामना भी नहीं करता; वह आपकी कृपा से साक्षात् शिव-स्वरूप हो जाता है।
English Translation: Whoever immerses in the sacred pool carved by Vishnu's Chakra and filled with Your water seeks neither heaven nor earthly kingdom; by Your compassion, they become identical with Lord Shiva.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
ये केचित्पतितार्तदीनमनुजास्त्वामाश्रिताः सर्वदा तेषां नैव यमस्य भीतिरुदगात्प्राप्नोति मोक्षं पराम् । गङ्गाचन्द्रकलाधरोऽपि गिरिशस्त्वत्तीरसंरक्षणे सन्नद्धः सततं विभाति जगतां मातस्तव प्रेमतः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जो भी पतित, दुःखी और दीन मनुष्य आपकी शरण लेते हैं, उन्हें यमराज का कोई भय नहीं रहता और वे परम मोक्ष पाते हैं। गंगा और चन्द्रकला को धारण करने वाले भगवान शंकर भी आपके प्रेम के कारण आपके तट की रक्षा में नित्य तत्पर रहते हैं।
English Translation: Whatever fallen or afflicted persons take refuge in You fear Yamaraja no more, gaining supreme salvation. Even Lord Shiva, adorned with Ganga and the crescent moon, lovingly protects Your banks.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
मुक्तिद्वारमपारसंसृतितरौ तीक्ष्णं कुठारं शुभं त्वत्तीरं मणिकर्णिके भुवि परं कैवल्यसिद्धिप्रदम् । देवानां वचनीयमर्त्यवपुषां प्राणावसाने क्षणात्तारं शङ्कर एव दीक्षयति ते तीर्थस्य माहात्म्यतः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: संसार रूपी वृक्ष को काटने वाली तीक्ष्ण कुल्हाड़ी और मोक्ष का द्वार आपका यह पावन तट मणिकर्णिका है। प्राण छूटने के समय भगवान शंकर स्वयं आकर जीव को तारक मन्त्र की दीक्षा देते हैं—यह आपके तीर्थ का साक्षात् माहात्म्य है।
English Translation: Your sacred shore is the sharp axe that fells the tree of worldly entanglement and the open doorway to liberation. At death, Lord Shiva Himself initiates the soul with the Taraka Mantra through Your glory.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
यत्राग्निर्दहते कलेवरमलं भस्मप्रदानं क्षणात् मुक्तात्मा प्रविशत्यखण्डपरमानन्दे परब्रह्मणि । तन्मातर्मणिकर्णिके तव तटे यो विश्रमेन्मानवः सोऽपि स्यादमरप्रियो विजयते मोक्षस्य सौधेऽक्षये ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जहाँ चिता की अग्नि शरीर के समस्त विकारों को जलाकर क्षण भर में भस्म कर देती है और मुक्तात्मा अखंड परमानंद परब्रह्म में प्रविष्ट हो जाती है; हे माता मणिकर्णिके! आपके तट पर विश्राम करने वाला मनुष्य देवताओं का प्रिय होकर अक्षय मोक्ष-प्रासाद में प्रतिष्ठित होता है।
English Translation: Where the funeral fire instantly consumes bodily impurities and the liberated soul merges into unbroken supreme bliss; whoever rests upon Your banks becomes beloved of the immortals in liberation.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
आचम्य त्वदमन्दतोयममृतप्रख्यं विशुद्धप्रदं यो ध्यायन्मणिकर्णिकां शिवमपि प्राप्नोति तन्मय्यताम् । पापौघैः शतकोटिजन्मजनितैर्मुक्तो भवेत्तत्क्षणात् मातस्त्वां भजतां न चेह सुलभं किं नाम लोकेष्वपि ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: आपके अमृत तुल्य पवित्र जल का आचमन कर जो मणिकर्णिका और भगवान शिव का ध्यान करता है, वह शिवमय हो जाता है। करोड़ों जन्मों के पापों से वह तत्क्षण मुक्त हो जाता है। हे माता! आपकी आराधना करने वालों के लिए इस लोक में क्या दुर्लभ है?
English Translation: Sipping Your nectarine water and meditating on Manikarnika and Shiva, one becomes unified with Shiva, cleansed of sins from billions of past births. What is unattainable to those who revere You?
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
पापिष्ठोऽपि यदा प्रयाति शरणं तीर्थं तवेदं शुभं मत्वा तन्मणिकर्णिकां जननि रे तूर्णमघौघं दहेत् । काशीनाथसमन्विते सुरधुनीतीर्थावतंसे परे मातस्ते पदयोः प्रणामममलं कुर्मो वयं नित्यशः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: घोर पापी मनुष्य भी जब आपके इस पावन तीर्थ की शरण में आता है, तो उसके समस्त पाप क्षणभर में भस्म हो जाते हैं। काशीनाथ विश्वेश्वर से समन्वित, गंगातीर्थों के मुकुट-मणि हे माता मणिकर्णिका! आपके युगल चरणों में हम नित्य निर्मल प्रणाम करते हैं।
English Translation: Even the gravest sinner who seeks refuge in Your sacred shrine has their sins instantly incinerated. Joined with Lord Vishwanatha, crest-jewel of Ganga's holy tirthas, Mother Manikarnika, we bow to Your feet.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
मणिकर्णिकाष्टकं पुण्यं यः पठेच्छ्रद्धया युतः । मुच्यते सर्वपापेभ्यो मोक्षमाप्नोति चान्ततः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति से इस पावन मणिकर्णिका अष्टकम का पाठ करता है, वह समस्त पापों और भवों के बंधनों से मुक्त होकर अंत में भगवान विश्वनाथ के परम मोक्ष पद को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever devoutly recites this holy Manikarnika Ashtakam is released from all sins and worldly fetters, ultimately securing supreme liberation at the feet of Lord Vishwanatha.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्री मणिकर्णिका अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नानादि कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
  • 2 भगवान विश्वनाथ और गंगा-मणिकर्णिका का ध्यान करते हुए शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • 3 गंगाजल अथवा शुद्ध जल हाथ में लेकर मणिकर्णिका अष्टकम का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ मृत्यु, यमयातना और अकाल मृत्यु के समस्त भय समूल नष्ट हो जाते हैं।
  • ✔ कोटि-कोटि जन्मों के संचित पापों का क्षय होकर अंतःकरण में वैराग्य और ज्ञान का उदय होता है।
  • ✔ काशी-वास और मणिकर्णिका में स्नान करने का आध्यात्मिक पुण्य घर बैठे प्राप्त होता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: सोमवार, मणिकर्णिका स्नान पर्व, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि