Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्री नन्दनन्दन (बालकृष्ण) • 9 श्लोक

नन्दकुमार अष्टकम्

नन्दनन्दन श्यामसुन्दर के नखशिख रूप-सौंदर्य और बाल-लीलाओं की यह स्तुति साधक के चित्त को परम माधुर्य और वात्सल्य रस से सराबोर कर देती है।

रचयिता श्रीमद्वल्लभाचार्य जी महाप्रभु
स्रोत / ग्रन्थ पुष्टिमार्ग भक्ति साहित्य
छन्द तोटक छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त बुधवार, अष्टमी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
सुचारुवक्त्रमण्डलं सुकर्णहेमकुण्डलं सुचित्तरत्नकङ्कणं नमामि नन्दनन्दनम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: अत्यंत मनोहर मुखमण्डल वाले, सुंदर कानों में स्वर्ण के कुण्डल धारण करने वाले और कलाइयों में सुंदर रत्नों के कंगन पहनने वाले भगवान नन्दनन्दन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Possessing an exquisitely charming lotus face, wearing golden earrings upon beautiful ears, adorned with jeweled bracelets, I bow to Nanda's son Krishna.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
सुनासिकाग्रमौक्तिकं सुकाञ्चनाङ्गदायुतं सुकण्ठरत्नभूषितं नमामि नन्दनन्दनम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: सुंदर नासिका के अग्रभाग पर मुक्ताफल (मोती) धारण करने वाले, सुवर्ण के भुजबंदों से शोभित और सुंदर कंठ में कौस्तुभ आदि मणियों की माला पहनने वाले नन्दनन्दन को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Sporting a pearl drop upon the tip of His shapely nose, graced by golden armlets, His throat adorned with radiant gems, I bow to Nanda's son.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
कलिन्दजाकटाहगं सुफुल्लपद्ममालिनं नवीनमेघश्यामलं नमामि नन्दनन्दनम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: यमुना जी के पावन जल में जलक्रीड़ा करने वाले, खिले हुए कमलों की माला धारण करने वाले और नवीन सजल मेघ के समान श्यामवर्ण नन्दनन्दन को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Sporting in the waters of Yamuna, garlanded with fresh blooming lotuses, dark and lustrous like a fresh monsoon cloud, I bow to Nanda's darling son.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
मुरारिरूपशोभनं विचित्रवेषवेणुगं विलोलनेत्रपङ्कजं नमामि नन्दनन्दनम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: असुर मुर के संहारक, अत्यंत मनोहर रूप वाले, विचित्र नटवर वेष धारण कर मुरली बजाने वाले और चंचल कमल नयनों वाले नन्दनन्दन श्रीकृष्ण को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Slayer of demon Mura of dazzling beauty, attired in marvelous pastoral garb playing the flute, bearing playful lotus eyes, I bow to Nanda's son.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
व्रजाङ्गनामनोहरं मयूरपिच्छमूर्धजं सुपीतवाससा युतं नमामि नन्दनन्दनम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त ब्रज की गोपियों का मन मोहने वाले, मस्तक पर मोरपंख का मुकुट धारण करने वाले और सुंदर पीताम्बर ओढ़े हुए नन्दनन्दन को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Enchanter of the damsels of Vraja, crown adorned with a radiant peacock feather, draped in shining golden silks, I bow to Nanda's son.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
अशेषगोपरञ्जनं सुरारिगर्वभञ्जनं समस्तदुःखनाशनं नमामि नन्दनन्दनम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त ग्वाल-बालों और गोपों को आनंद देने वाले, असुरों के घमण्ड को चूर करने वाले और शरणागतों के समस्त दुःखों का नाश करने वाले नन्दनन्दन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Delighting all the cowherds of Gokula, shattering the haughtiness of demonic adversaries, dispeller of all suffering, I bow to Nanda's son.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
कदम्बवृक्षमूलगं त्रिभङ्गिचारुविग्रहं विमोहिताखिलाङ्गनां नमामि नन्दनन्दनम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: यमुना तट पर कदम्ब के वृक्ष के नीचे खड़े होकर त्रिभंगी (तीन जगह से झुकी मनोहर) मुद्रा धारण करने वाले और संपूर्ण जगत की स्त्रियों को विमोहित करने वाले नन्दनन्दन को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Standing at the base of the sacred Kadamba tree in enchanting Tribhanga posture, captivating all beings with transcendental charm, I bow to Nanda's son.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
कृपाकटाक्षवीक्षणं पराभयप्रदायकं परं विमुक्तिसाधनं नमामि नन्दनन्दनम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: अपनी करुणामयी दृष्टि से निहारने वाले, परम अभय प्रदान करने वाले और संसार से मोक्ष देने वाले साक्षात् साधन रूप नन्दनन्दन श्रीकृष्ण को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Bestowing glances drenched in grace, granting supreme fearlessness, the direct path to ultimate liberation, I revere Nanda's beloved son.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
इदं च नन्दसूनुनो गुणाष्टकं पठेत्तु यः । स सर्वपापनिर्मुक्तो व्रजेश्वरं प्रपद्यते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य नन्दनन्दन श्रीकृष्ण के इस पावन गुणाष्टकम का नित्य पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर साक्षात् ब्रजराज भगवान श्रीकृष्ण की नित्य सेवा प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever regularly recites this octet of virtues of Nanda's divine son is released from all sins and enters the eternal loving service of the Lord of Vraja.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमद्वल्लभाचार्यविरचितं श्री नन्दकुमार अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें और लड्डू गोपाल जी का ध्यान करें।
  • 2 माखन-मिश्री, तुलसीदल और पीले पुष्प अर्पित करें।
  • 3 प्रेमपूर्वक 'नमामि नन्दनन्दनम्' की धुन में इस अष्टक का सस्वर गान करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ संतान सुख, संतान की सुरक्षा और परिवार में प्रेम-वात्सल्य की वृद्धि होती है।
  • ✔ मानसिक चंचलता और तनाव समाप्त होकर मन में असीम शांति और आनंद भर जाता है।
  • ✔ भगवान श्रीकृष्ण की मधुर कृपा से घर में अन्न-धन और मंगलमय वातावरण बना रहता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: बुधवार, अष्टमी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा