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BHAKTI KI SHAKTI
📜 मां नर्मदा (रेवा / मेकलसुता) • 9 श्लोक

नर्मदा अष्टकम्

दर्शन मात्र से पापनाशिनी मां नर्मदा का यह अष्टक समस्त पापों, कालदोषों और आधि-व्याधियों का निवारण कर शिवलोक की प्राप्ति कराता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ स्तोत्र रत्नावली (आदिशंकराचार्य कृत)
छन्द स्रग्धरा / तोटक छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त नर्मदा जयंती (माघ शुक्ल सप्तमी), सोमवार, पूर्णिमा, अमावस्या
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
सबिन्दुसिन्धुसुस्खलत्तरङ्गभङ्गरञ्जितं द्विषत्सु पापजातजातकारिवारिसंयुतम् । कृतान्तदूतकालभूतभीतिहारिवर्मदे त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनकी उछलती हुई चंचल तरंगों से जल-कण बिखरकर सुशोभित होते हैं, जो समस्त पापों के समूह को धो डालने वाले पावन जल से युक्त हैं तथा यमदूतों, काल और भय से रक्षा करने वाली दिव्य कवच-स्वरूपा हैं, हे देवि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Adorned with dancing frothy waves showering droplets, bearing sacred waters that wash away all sins, providing divine armor against Yamadutas, mortality, and fear, O Mother Narmada, I bow to Your lotus feet.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
त्वदम्बुलम्पसद्यतो भवाम्बुजन्मधारिणं कुतूहलाद्विमुक्तसर्वसंसृतीहचारिणम् । जगत्समग्रतारिणीं दयार्द्रदृष्टिपाततः त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: आपके जल का स्पर्श होते ही भवसागर में भटका हुआ प्राणी समस्त सांसारिक बंधनों और चिंताओं से मुक्त होकर स्वच्छंद हो जाता है। केवल अपनी दयामयी दृष्टि से संपूर्ण जगत को तारने वाली हे देवि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को नमन करता हूँ।
English Translation: The moment one touches Your water, one is freed from the mundane cycle of births and desires. Rescuing the entire universe with a merciful glance, O Goddess Narmada, I worship Your lotus feet.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
महागभीरनीरपूरपूतभूतले सदा तरङ्गभङ्गचञ्चलप्रवाहवीचिशोभिते । सुरासुरेन्द्रमस्तकोत्तमाङ्गवन्द्यमण्डले त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: अपने अत्यंत गहरे और विपुल जल-प्रवाह से पृथ्वी को निरंतर पवित्र करने वाली, चंचल तरंगों की शोभा से युक्त तथा जिनके पावन तट पर देवता और असुर दोनों अपने मस्तक झुकाते हैं, हे देवि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों की वंदना करता हूँ।
English Translation: Sanctifying the earth with deep, abundant currents, adorned with playful rippling waves, whose sacred realm is revered by gods and demons with bowed heads, I bow to Your lotus feet, O Narmada.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
यदम्बुलेशमात्रमप्यहो प्रपुण्यपूरकं ददाति मुक्तिमादरात्समस्तपातकच्छिदम् । सुरैरपि प्रशस्यमानपुण्यतोयधारिणी त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: अहो! जिनकी एक जल-बूंद भी परम पुण्य का संचार कर समस्त पापों को काटती है और सहज ही मोक्ष प्रदान करती है, देवताओं द्वारा भी जिनकी पावन जल-धारा की स्तुति की जाती है, हे देवि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Even a single drop of Your water generates abundant spiritual merit, eradicating all sins and conferring liberation. Bearing waters extolled by celestials, O Narmada, I revere Your lotus feet.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
महामुनीन्द्रनारदादिहर्षदानतत्परे त्रिलोकपापहारिणी सुपुण्यवारिसङ्कुले । विरिञ्चिविष्णुशङ्करादिपादपद्मसेविते त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: नारद आदि महान मुनीश्वरों को आनंद प्रदान करने में तत्पर, तीनों लोकों के पापों को हरने वाली, अमृत तुल्य पवित्र जल से भरी तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेश के चरणों द्वारा सेविता हे देवि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को नमन करता हूँ।
English Translation: Delighting great sages like Narada, washing away sins of the three realms, endowed with ambrosial streams, served by Brahma, Vishnu, and Shiva, O Goddess Narmada, I bow to Your lotus feet.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
अनाथदीनमानवानामाश्रयाय कल्पिते भवार्णवप्रतारिणी सुतीर्थजालमण्डिते । अमन्दसम्पदामलप्रदायिनी सुरेश्वरि त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: अनाथ और दीन मनुष्यों के परम आश्रय रूप, भवसागर से पार उतारने वाली, अनेक पावन तीर्थों के समूह से मंडित तथा निष्पाप संपत्ति और ऐश्वर्य देने वाली हे सुरेश्वरि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Refuge of the destitute, ferry across the ocean of worldly existence, embellished with sacred pilgrim shrines, bestower of unblemished prosperity, O Goddess Narmada, I adore Your lotus feet.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
समस्ततीर्थसङ्गमप्रशस्ततीर्थमूर्तिके महासुखप्रदायिनी त्रितापहर्षहारिणी । वियद्विशालफेनमालचारुरूपधारिणी त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त तीर्थों के समागम से युक्त प्रशस्त तीर्थ स्वरूपा, महान सुख देने वाली, दैहिक, दैविक और भौतिक त्रितापों को हरने वाली तथा आकाश में फेन-मालाओं जैसा सुंदर रूप धारण करने वाली हे देवि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को नमन करता हूँ।
English Translation: Embodiment of all holy confluences, bestower of supreme bliss, dispeller of threefold worldly miseries, bearing a beautiful garland of white foam, I bow to Your lotus feet, O Narmada.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
ददासि सर्वसम्पदं विमुक्तिदासि नित्यदा नरापवर्गसाधने कृतप्रयत्नसाधके । तवानुकम्पया जनः प्रयाति शङ्करास्पदं त्वदीयपादपङ्कजं नमामि देवि नर्मदे ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: आप नित्य समस्त संपदाएं और मुक्ति प्रदान करती हैं। जो साधक मोक्ष का प्रयास करता है, वह आपकी अनुकम्पा से सहज ही भगवान शिव के परम धाम को प्राप्त कर लेता है। हे देवि नर्मदे! मैं आपके चरण-कमलों को सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: You grant all wealth and eternal liberation. Through Your grace, spiritual seekers effortlessly attain the supreme abode of Lord Shiva. O Mother Narmada, I bow at Your sacred lotus feet.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
इदं तु नर्म्राष्टकं पठेत्तु यः समाहितः प्रमुच्यते स पातकाद्भवेन्नरो हरिप्रियः । न तस्य दुर्लभा गतिर्भवार्णवे कदाचन प्रयाति शङ्करं पुरं शिवेन चाभिनन्द्यते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर इस नर्मदाष्टकम का पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर भगवान श्रीहरि का प्रिय बन जाता है। उसे संसार-सागर में कोई भी गति दुर्लभ नहीं रहती, वह शिवलोक को प्राप्त होता है और भगवान शिव स्वयं उसका अभिनन्दन करते हैं।
English Translation: Whoever recites this Narmadashtakam with serene focus is liberated from sins, becoming dear to Lord Hari. Crossing this mortal sea effortlessly, they enter Shiva's realm, personally welcomed by the Lord.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्री नर्मदा अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
  • 2 मां नर्मदा के पावन जल अथवा चित्र के समक्ष घी का दीपक और धूप जलाएं।
  • 3 हाथ जोड़कर 'त्वदीय पादपंकजं नमामि देवि नर्मदे' भाव से अष्टक का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ शास्त्रों के अनुसार नर्मदा जी के केवल दर्शन व स्मरण से ही करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • ✔ साधक को पितृदोष, सर्पदोष और ग्रह-बाधाओं से स्थायी मुक्ति मिलती है।
  • ✔ जीवन के अंत में भगवान शिव के सायुज्य पद और अक्षय शांति की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: नर्मदा जयंती (माघ शुक्ल सप्तमी), सोमवार, पूर्णिमा, अमावस्या