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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान श्री परशुराम (विष्णु के छठे अवतार) • 9 श्लोक

श्री परशुराम अष्टकम

अधर्म और अन्याय का दमन करने वाले चिरंजीवी भगवान परशुराम का यह अष्टक साधक को अदम्य साहस, शौर्य, बल, दीर्घायु और ब्रह्मतेज प्रदान करता है।

रचयिता महर्षि व्यास / ब्रह्माण्ड पुराण
स्रोत / ग्रन्थ ब्रह्माण्ड पुराण (परशुराम चरित्र)
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त अक्षय तृतीया (परशुराम जयंती), मंगलवार, शुक्ल तृतीया
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
भृगुवंशसमुद्भूतं जमदग्निसुतं प्रभुम् । रेणुकागर्भसंभूतं परशुरामं नमाम्यहम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: भृगुवंश के कुलदीपक, महर्षि जमदग्नि के तेजस्वी पुत्र और माता रेणुका के गर्भ से अवतरित भगवान श्री परशुराम को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Born in the exalted lineage of Sage Bhrigu, radiant son of Maharishi Jamadagni and Mother Renuka, I bow to Lord Parashurama.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
कार्त्तवीर्यार्जुनहरं क्षत्रियान्तकरं विभुम् । एकविंशतिवारं च जितभूमिं नमाम्यहम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: सहस्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन का संहार करने वाले, अन्यायी और आततायी राजाओं का अंत करने वाले और इक्कीस बार पृथ्वी को जीतकर अधर्ममुक्त करने वाले सर्वसमर्थ प्रभु को नमन है।
English Translation: Slayer of thousand-armed Kartavirya Arjuna, vanquisher of tyrannical despots, who conquered the earth twenty-one times to eradicate unrighteousness, I bow to Him.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
परशुहस्तमत्युग्रं तेजसा प्रज्वलद्वपुम् । शान्तं च मुनिवेषस्थं परशुरामं नमाम्यहम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथ में तीक्ष्ण परशु (फरसा) धारण करने वाले, जिनका शरीर प्रचंड ब्रह्मतेज से प्रज्वलित है, तथापि जो मुनिवेष में परम शांत और समाधिस्थ हैं, उन भगवान परशुराम को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Holding the sharp battle-axe, His divine form blazing with spiritual fire, yet profoundly serene in an ascetic sage's attire, I salute Parashurama.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
कश्यपाय महीं दत्वा महेन्द्राद्रिसमाश्रितम् । तपोधनं महात्मानं परशुरामं नमाम्यहम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: सम्पूर्ण विजित पृथ्वी महर्षि कश्यप को दान में देकर महेन्द्र पर्वत पर तपस्या करने वाले परम त्यागी, तपोधन महात्मा भगवान परशुराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Donating the entire conquered earth to Sage Kashyapa and taking up penance on Mount Mahendra, the supreme ascetic sage Parashurama, I bow to You.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
भीष्मद्रोणगुरूं श्रेष्ठं धनुर्वेदप्रवर्तकम् । सर्वशास्त्रप्रवीणेशं परशुरामं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: गंगापुत्र भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथियों के परम गुरु, धनुर्वेद के आदि प्रवर्तक और समस्त शास्त्रों में निष्णात भगवान परशुराम को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Foremost preceptor of Bhishma, Drona, and Karna, propagator of the martial Dhanurveda, master of all sacred sciences, I bow to Lord Parashurama.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
आजानुबाहुं रक्ताक्षं जटाजूटविराजितम् । ब्रह्मतेजोमयं देवं परशुरामं नमाम्यहम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: घुटनों तक लंबी भुजाओं वाले, क्रोध में लाल कमल के समान नेत्रों वाले, मस्तक पर जटाजूट धारण करने वाले और ब्रह्मतेज से युक्त भगवान परशुराम को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Long-armed reaching to the knees, red-eyed like blazing lotuses, adorned with ascetic matted locks, luminous with Brahmanic power, I revere Parashurama.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
मातृभक्तिपरायणाय पितृवाक्यप्रतिपालकम् । चिरञ्जीविनमीशानं परशुरामं नमाम्यहम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: मातृभक्ति में अग्रणी, पिता की आज्ञा का सर्वस्व देकर पालन करने वाले और कल्पान्त तक जीवित रहने वाले चिरंजीवी भगवान परशुराम को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Supremely devoted to His mother, unhesitatingly executing His father's word, immortal Chiranjivi enduring till the end of time, I bow to Lord Parashurama.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
कलौ कल्किगुरुं देवं धर्मसंस्थापनोद्यतम् । शरणागतवत्सलं परशुरामं नमाम्यहम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: कलियुग के अंत में भगवान कल्कि के गुरु बनने वाले, धर्म की रक्षा में सदा तत्पर और शरणागतों पर वात्सल्य बरसाने वाले भगवान परशुराम को मैं बारम्बार प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Destined to be the preceptor of Lord Kalki in Kali Yuga, dedicated to defending cosmic Dharma, loving to the surrendered, I bow to Parashurama.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
परशुरामाष्टकं पुण्यं यः पठेच्छ्रद्धया नरः । शौर्यं वीर्यं जयं प्राप्य चिरं जीवति मानवः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से इस पावन परशुरामाष्टकम का पाठ करता है, वह जीवन में अदम्य शौर्य, बल, पराक्रम और विजय प्राप्त कर दीर्घायु का उपभोग करता है।
English Translation: Whoever recites this sacred Parashurama Ashtakam with devotion attains indomitable martial courage, physical vigor, victory, and enjoys a long, fulfilling life.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीब्रह्माण्डपुराणोक्तं श्री परशुराम अष्टकम सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः स्नान कर लाल या श्वेत वस्त्र धारण करें और पूर्वाभिमुख बैठें।
  • 2 भगवान परशुराम के चित्र के समक्ष चन्दन, अक्षत और घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • 3 शौर्य और आत्मबल की वृद्धि की प्रार्थना करते हुए इस अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ व्यक्ति में अन्याय से लड़ने का अद्भुत साहस, पराक्रम और निर्भयता जागृत होती है।
  • ✔ शारीरिक दुर्बलता, रक्त विकार और मंगल ग्रह के क्रूर दोष समाप्त होते हैं।
  • ✔ चिरंजीवी परशुराम के आशीर्वाद से दीर्घायु, निरोगी काया और यश की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: अक्षय तृतीया (परशुराम जयंती), मंगलवार, शुक्ल तृतीया