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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान पशुपतिनाथ (महादेव) • 9 श्लोक

पशुपति अष्टकम्

जीवों के पाश (अविद्या, राग-द्वेष और अज्ञान) को काटकर मोक्ष प्रदान करने वाले पशुपतिनाथ का यह अष्टक भयमुक्ति और शिव-सान्निध्य देता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य / शिव पुराण
स्रोत / ग्रन्थ शिव पुराण (वायवीय संहिता)
छन्द तोटक छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
पशुपतिमिन्दुधरं धरणीधरं भुजङ्गभूषणभूषितविग्रहम् । प्रमथनाथमपारगुणाकरं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त जीवों के स्वामी पशुपति, मस्तक पर चन्द्रमा धारण करने वाले, पृथ्वी को धारण करने वाले, सर्पों के आभूषणों से अलंकृत दिव्य शरीर वाले, प्रमथगणों के नाथ और अपरिमित गुणों की खान अविनाशी भगवान शंकर को सब प्रणाम करो।
English Translation: Lord of all beings (Pashupati), bearing the crescent moon, sustainer of Earth, adorned with serpent ornaments, master of Pramathas, mine of infinite virtues, bow down to imperishable Lord Shankara.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
गिरिसुताकमनीयमुखाम्बुजं मदननाशनदीप्तविलोचनम् । त्रिपुरदाहकरं त्रिगुणात्मकं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: माता पार्वती के सुंदर मुखकमल को निहारने वाले, कामदेव को भस्म करने वाले तीसरे प्रदीप्त नेत्र वाले, त्रिपुरासुर के तीन नगरों को दग्ध करने वाले और त्रिगुणात्मक परमेश्वर अविनाशी शंकर को प्रणाम करो।
English Translation: Admiring the lovely lotus face of Parvati, third eye blazing to consume Cupid, burner of the three demon citadels (Tripura), beyond the gunas, bow to imperishable Shankara.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
वृषभवाहनमुग्रमघच्छिदं शशिशिखामणिमद्भुतवैभवम् । कनककुण्डलमण्डितकन्धरं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: वृषभ (नन्दी) पर सवार, दुष्टों के लिए उग्र, पापों का नाश करने वाले, चन्द्रमा रूपी शिरोमणि वाले, अद्भुत ऐश्वर्य से संपन्न और स्वर्ण के कुण्डलों से सुशोभित अविनाशी भगवान शंकर को प्रणाम करो।
English Translation: Mounted upon Nandi the bull, fierce to evil, destroyer of sins, wearing the moon as a crest jewel, possessing wondrous splendour, adorned with golden earrings, bow to imperishable Shankara.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
कपर्द्दिनं करुणावरुणालयं भसितलेपनपावनविग्रहम् । भवभयापहमुत्तमदायकं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जटाजूट धारण करने वाले, करुणा के अगाध महासागर, भस्म के विलेपन से परम पवित्र शरीर वाले, संसार के भय को दूर करने वाले और सर्वोत्तम कल्याण देने वाले अविनाशी भगवान शंकर को नमन करो।
English Translation: Bearing dense matted locks, vast ocean of tender mercy, body purified with holy ashes, dispeller of worldly fear, bestower of supreme grace, bow to imperishable Shankara.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
भुजङ्गहारवृतं विषपायिनं हरमपारदयारससागरम् । मुनिगणैरभिवन्दितपादुकं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: सर्पों की माला पहने हुए, जगत की रक्षा के लिए हलाहल विष पीने वाले, समस्त पापों को हरने वाले, अपार दया के सागर और मुनियों द्वारा वंदित चरणपादुका वाले अविनाशी शंकर को प्रणाम करो।
English Translation: Garlanded with serpents, drinker of cosmic poison to protect creation, ocean of infinite compassion, whose holy sandals are worshipped by sages, bow to imperishable Shankara.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
कैलासवासिनमीशमनामयं सुरवरैरभिपूजितमद्भुतम् । परशुशूलधनुर्वरधारिणं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: कैलास पर्वत पर निवास करने वाले, समस्त विकारों से रहित, श्रेष्ठ देवताओं द्वारा पूजित, अद्भुत स्वरूप वाले, हाथ में परशु, त्रिशूल और पिनाक धनुष धारण करने वाले अविनाशी भगवान शंकर को नमन करो।
English Translation: Dwelling on Mount Kailasa, free from all afflictions, revered by foremost gods, wielding the axe, trident, and bow, wondrous in glory, bow to imperishable Shankara.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
यमविमर्दनदक्षमपारगं प्रणतभक्तजनार्तिविनाशनम् । सकललोकहितप्रदमीश्वरं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: यमराज का मानमर्दन करने में समर्थ, संसार से पार उतारने वाले, शरणागत भक्तों की समस्त पीड़ा का नाश करने वाले और सभी लोकों का कल्याण करने वाले अविनाशी परमेश्वर शंकर को प्रणाम करो।
English Translation: Able to subdue Yamaraja, ferryman across existence, dispeller of devotees' suffering, bestower of universal welfare, bow down unto imperishable Lord Shankara.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
मृत्युञ्जयं शशिशेखरमव्ययं प्रणवनादमयं परमं पदम् । उमासमेतमुदारगुणाकरं नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: मृत्यु को जीतने वाले मृत्युंजय, चन्द्रशेखर, अविनाशी, ॐकार प्रणव नाद स्वरूप, परम पद रूप, माता उमा सहित विराजमान और उदार गुणों के सागर भगवान शंकर को नमन करो।
English Translation: Conqueror of death (Mrityunjaya), wearing the moon upon His crown, embodiment of the cosmic Omkara, supreme state, seated with Uma, ocean of generous virtues, bow to Shankara.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
पशुपत्यष्टकमेतदनुत्तमं यः पठेच्छिवसन्निधौ । सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोके महीयते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य भगवान शिव के सानिध्य में इस सर्वोत्तम पशुपति अष्टकम का पाठ करता है, वह संसार के समस्त पापों और बंधनों से मुक्त होकर अंत में शिवलोक में पूजित होता है।
English Translation: Whoever recites this peerless Pashupati Ashtakam in the divine presence of Lord Shiva is liberated from all sins and bondages, attaining honor in Shiva's eternal realm.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्री पशुपति अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 सोमवार को प्रातः स्नान कर शिवलिंग का पंचामृत व गंगाजल से अभिषेक करें।
  • 2 चन्दन, अक्षत, धतूरा और बिल्वपत्र अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक जलाकर 'नमत शङ्करमीश्वरमव्ययम्' का ध्यान करते हुए पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ संसार के जन्म-मरण और अविद्या के समस्त पाश (बंधन) कट जाते हैं।
  • ✔ अकाल मृत्यु, ग्रह दोष और असाध्य रोगों से सुरक्षा का अभय कवच मिलता है।
  • ✔ भगवान पशुपतिनाथ की कृपा से परिवार में दीर्घायु, स्वास्थ्य और शांति की वृद्धि होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: सोमवार, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत