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BHAKTI KI SHAKTI
📜 श्री राधा कुण्ड (गोवर्धन व्रजधाम) • 9 श्लोक

श्री राधा कुण्ड अष्टकम्

गोवर्धन की तलहटी में स्थित समस्त ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ तीर्थ श्री राधाकुण्ड का यह अष्टक साधक को युगल सरकार की पराभक्ति प्रदान करता है।

रचयिता श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी
स्रोत / ग्रन्थ स्तवावली (श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी कृत)
छन्द मालिनी छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त राधाकुण्ड स्नान (अहोई अष्टमी), कार्तिक मास, पूर्णिमा
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
वृषभानुसुतापादपङ्कजप्रेमसङ्कुला । यत्कूले कुरुते लीलां राधाकुण्डं नमाम्यहम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: वृषभानुनन्दिनी श्रीराधा के चरण-कमलों के अगाध प्रेम से जो परिपूर्ण है, और जिसके पावन तट पर श्रीकृष्ण अपनी नित्य रासलीलाएं करते हैं, उस श्री राधाकुण्ड को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Overflowing with transcendent love for the lotus feet of Vrishabhanu's daughter Sri Radha, on whose banks Sri Krishna performs eternal pastimes, I bow to Sri Radha Kunda.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
अरिष्टासुरसंहारपश्चात्कृष्णेन निर्मितम् । तीर्थानां मुकुटप्रख्यं राधाकुण्डं नमाम्यहम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: अरिष्टासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गौ-हत्या के दोष निवारण की लीला करते हुए समस्त तीर्थों को जहाँ आवाह्न किया, उस तीर्थों के मुकुट-मणि राधाकुण्ड को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Fashioned by Sri Krishna after subduing demon Aristasura, where all sacred rivers were summoned, the crest jewel of all holy waters, I bow to Radha Kunda.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
यत्र रासप्रमोदेन विहरतः प्रियोत्तमौ । निकुञ्जराजितं रम्यं राधाकुण्डं नमाम्यहम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जहाँ प्रेम के अगाध आनंद में श्रीराधा और श्रीकृष्ण युगल रूप से नित्य विलास करते हैं, जो सुंदर दिव्य निकुंजों से सुशोभित है, उस परम रमणीय राधाकुण्ड को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Where the Divine Couple sporting in ecstatic joy performs intimate pastimes, adorned with celestial bowers, exquisitely lovely, I bow to Sri Radha Kunda.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
कनककान्तिसङ्काशैः कमलैः सुरभीकृतम् । हंससारसकूजद्भिः शोभितं पावनं सरः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: स्वर्ण के समान कांति वाले सुगंधित कमलों से जो महकता रहता है, तथा जहाँ हंस और सारस पक्षी मधुर कलरव करते हैं, उस परम पावन सरोवर राधाकुण्ड को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Perfumed with golden-hued blooming lotuses, resonating with the sweet chirping of swans and cranes, sacred holy lake, I bow to Radha Kunda.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
यदम्बुलेशसंस्पर्शात् प्रेमभक्तिः प्रजायते । राधिकायाः परा तृप्तिः क्रियते यत्र नित्यशः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जिसके एक जल-बिंदु के स्पर्श मात्र से ही मनुष्य के हृदय में भगवान के प्रति प्रेमाभक्ति जागृत हो जाती है और जहाँ श्रीराधा रानी को नित्य परम तृप्ति मिलती है, उस कुंड को नमन है।
English Translation: By touching even a drop of whose sacred water ecstatic devotional love blossoms in the soul, where Sri Radha experiences supreme fulfillment, I bow to Her Kund.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
गोवर्धनतटप्रान्ते स्थितं परमपावनम् । वैष्णवानां परं धाम राधाकुण्डं नमाम्यहम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: गिरिराज गोवर्धन की पवित्र तलहटी में स्थित, परम पावन और समस्त वैष्णवों के परम विश्राम धाम श्री राधाकुण्ड को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Situated at the foot of sacred Mount Govardhana, supremely pure, the ultimate sanctuary of all Vaishnava seekers, I bow to Sri Radha Kunda.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
कृष्णस्यात्यन्तदयितं राधिकायाः प्रियातिगम् । कोटितीर्थफलप्रदं वन्दे श्रीराधाकुण्डकम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जो भगवान श्रीकृष्ण का अत्यंत प्रिय है, जो श्रीराधा रानी के प्राणों से भी बढ़कर प्रिय है और जो करोड़ों तीर्थों का फल प्रदान करने वाला है, उस श्रीराधाकुण्ड की मैं वंदना करता हूँ।
English Translation: Exceedingly dear to Sri Krishna, beloved beyond life to Sri Radha, conferring the spiritual merit of billions of pilgrimages, I revere Sri Radha Kunda.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
यस्मिन् स्नात्वा जनः साक्षात् प्रेमभक्तिं परां लभेत् । तन्मे मनोऽभिलाषं च पूरयत्वतिनिर्मलम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जिसमें श्रद्धा से स्नान करने पर मनुष्य साक्षात् परा प्रेमाभक्ति प्राप्त करता है, वह श्रीराधाकुण्ड मेरे मन की निर्मल भगवद्-प्राप्ति की अभिलाषा को पूर्ण करे।
English Translation: Bathing in which a devotee directly attains supreme love for Godhead, may that sacred Radha Kunda fulfill my purest spiritual aspirations.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
राधाकुण्डाष्टकं पुण्यं यः पठेच्छ्रद्धया नरः । श्रीराधामाधवयोः प्रेमा तस्य चित्ते प्रजायते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से इस पावन राधाकुण्डाष्टकम का पाठ करता है, उसके चित्त में श्रीराधा और माधव के प्रति विशुद्ध अनन्य प्रेम का प्राकट्य होता है।
English Translation: Whoever devoutly recites this holy Radha Kunda Ashtakam witnesses the blossoming of unalloyed, ecstatic love for Sri Radha-Madhava in their heart.
✨ समाप्ति
।। इति श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी विरचितं श्री राधा कुण्ड अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 कार्तिक मास अथवा अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि में राधाकुण्ड का ध्यान करें।
  • 2 घी का दीपक जलाएं और मानसिक रूप से राधाकुण्ड के पावन जल में डुबकी लगाएं।
  • 3 प्रेमपूर्वक 'राधाकुण्डं नमाम्यहम्' भाव से इस अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ निःसंतान दंपतियों को अहोई अष्टमी पर राधाकुण्ड स्नान व पाठ से संतान सुख प्राप्त होता है।
  • ✔ करोड़ों तीर्थों में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह राधाकुण्ड के स्मरण मात्र से मिलता है।
  • ✔ श्रीराधा-कृष्ण के युगल चरणों में विशुद्ध प्रेमाभक्ति और गोलोक धाम की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: राधाकुण्ड स्नान (अहोई अष्टमी), कार्तिक मास, पूर्णिमा