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BHAKTI KI SHAKTI
📜 मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम • 9 श्लोक

श्री रामचन्द्राष्टकम्

भगवान श्रीराम के पावन गुणों, शील और ऐश्वर्य का गान करने वाला यह अष्टक विपत्तियों का नाश कर परम शांति, धर्म और रामकृपा प्रदान करता है।

रचयिता महर्षि व्यास / तुलसी परम्परा
स्रोत / ग्रन्थ आनन्द रामायण / स्तोत्र रत्नावली
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त मंगलवार, रविवार, रामनवमी, विवाह पंचमी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
सुग्रीवमित्रं परमं पवित्रं सीताकलत्रं नवहेमगात्रम् । कारुण्यपात्रं शतपत्रनेत्रं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जो सुग्रीव के सच्चे सखा हैं, परम पवित्र स्वरूप वाले हैं, माता सीता जिनके अर्धांग में शोभित हैं, नवीन सुवर्ण के समान जिनकी अंगकांति है, जो करुणा के सागर और कमल के समान नयनों वाले हैं, उन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्र को मैं निरंतर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: True ally of Sugriva, supremely pure, having Sita as His consort, with golden-hued radiant limbs, vessel of compassion, with eyes blooming like lotuses, I constantly bow to Lord Ramachandra.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
संसारसारं निगमप्रचारं धर्मावतारं हृतभूमिभारम् । सद्भक्तहारं सुरलोकसारं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जो इस संसार के सारभूत हैं, वेदों की मर्यादा का प्रचार करने वाले हैं, साक्षात् धर्म के अवतार हैं, जिन्होंने पृथ्वी का भार हरण किया, जो सच्चे भक्तों के गले के हार के समान प्रिय और सुरलोक के प्राण हैं, उन भगवान श्रीरामचन्द्र को मैं निरंतर नमन करता हूँ।
English Translation: The essence of worldly existence, upholder of Vedic truth, incarnation of Dharma, reliever of Earth's burden, jewel of true devotees, life-essence of celestial realms, I bow to Lord Ramachandra.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
लङ्केशकालं विपिनप्रयाणं रक्षःकुलघ्नं विमलाभिधानम् । विद्यानिधानं परमाभिरामं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जो लंकापति रावण के लिए काल स्वरूप बने, जिन्होंने पिता की आज्ञा से वन में गमन किया, जो राक्षस कुल का संहार करने वाले हैं, जिनका नाम परम पावन और निर्मल है, जो विद्याओं के निधान और परम मनोहर हैं, उन भगवान श्रीरामचन्द्र को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: The doom of Ravana, wanderer in Dandaka forest by filial duty, destroyer of demonic clans, bearing an immaculate name, treasure of wisdom, exquisitely charming, I constantly bow to Sri Ramachandra.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
कौसल्यानन्दं सुरवृन्दवन्द्यं खरदूषणघ्नं विमलास्यचन्द्रम् । आनन्दकन्दं मुनिभक्तसान्द्रं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जो माता कौशल्या के आनंद के हेतु हैं, देवसमूह द्वारा वंदित हैं, खर-दूषण का वध करने वाले हैं, जिनका मुख चन्द्रमा के समान पावन और कांतिमान है, जो आनंद के मूल कंद और मुनियों तथा भक्तों के रक्षक हैं, उन श्रीरामचन्द्र को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Joy of Mother Kausalya, revered by celestial hosts, slayer of Khara and Dushana, whose face glows like the spotless moon, root of joy, sanctuary of sages, I bow to Lord Ramachandra.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
विश्वामित्रप्रियमध्वरेष्वमन्दारचापप्रथितप्रतापम् । ताटकान्तकरं मुनिमान्यमूर्तिं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जो महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करने वाले उनके परम प्रिय शिष्य हैं, जिन्होंने अपने धनुष के प्रचंड प्रताप से ताड़का और सुबाहु का अंत किया, और जो समस्त मुनियों द्वारा सम्मानित हैं, उन भगवान श्रीरामचन्द्र को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Dear to Sage Vishvamitra, protector of sacred yajnas, famed for heroic bowmanship, vanquisher of Tataka, honored by seers, I continually bow to Lord Ramachandra.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
सीतापते रावणदर्पहन्तारं सुमित्रासुतवन्द्यपादम् । विभीषणत्राणपरं कृपालुं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: माता जानकी के स्वामी, रावण के अहंकार को चूर्ण करने वाले, जिनके चरणों की वंदना लक्ष्मण जी नित्य करते हैं, शरणागत विभीषण को अभयदान देकर लंका का राज्य देने वाले परम कृपालु भगवान श्रीरामचन्द्र को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Lord of Sita, crusher of Ravana's arrogance, whose feet are venerated by Lakshmana, benevolent protector who granted asylum and sovereignty to Vibhishana, I salute Sri Ramachandra.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
अयोध्याधिनाथं रघुवंशकेतुं भ्रातृप्रियाय जनकात्मजायै । सिंहासने संस्थमुदारतेजं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: अयोध्या के महाराजाधिराज, रघुकुल के ध्वज-स्वरूप, भाइयों के प्रिय, माता जानकी सहित रत्नजड़ित दिव्य सिंहासन पर विराजमान और उदार तेज से दीप्तिमान भगवान श्रीरामचन्द्र को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Sovereign of Ayodhya, flag of Raghu's dynasty, beloved brother, enthroned upon the celestial throne alongside Janaka's daughter Sita, radiating majesty, I bow to Sri Ramachandra.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
भक्तानुरागं भवभीतिहारं शान्तं शरण्यं वरदं सुरेशम् । राजीवनेत्रं रघुकुलप्रदीपं श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: भक्तों से अगाध प्रेम करने वाले, संसार के समस्त भयों को हरने वाले, परम शांत, शरण में आए जीवों की रक्षा करने वाले, वरदान प्रदाता, देवों के ईश, कमलनयन और रघुकुल के दीपक श्रीरामचन्द्र को मैं निरंतर प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Loving toward devotees, dispeller of earthly terrors, serene, supreme refuge, boon-bestower, Lord of celestials, lotus-eyed, light of the Raghu lineage, I bow to Lord Ramachandra.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
इदं रामचन्द्राष्टकं यः पठेद्वा शृणोतीह भक्त्या नरो नित्यमेव । स भुक्त्वा सुखान्यायुषोऽन्ते विमुक्तिं प्रयातीह विष्णोः पदं पावनं तत् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य प्रतिदिन भक्तिपूर्वक इस श्रीरामचन्द्राष्टकम का पाठ करता है अथवा श्रवण करता है, वह इस संसार में दीर्घायु और सुख-समृद्धि का उपभोग कर जीवन के अंत में भगवान विष्णु के पावन साकेत धाम को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever regularly chants or listens to this Ramachandrashtakam with sincere devotion enjoys prosperity in this world and enters Lord Vishnu's sacred realm upon life's completion.
✨ समाप्ति
।। इति श्री रामचन्द्राष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातः स्नान कर पीले या श्वेत वस्त्र धारण करें और पूर्व दिशा की ओर मुख करें।
  • 2 श्रीराम दरबार के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और तुलसीदल, पीले पुष्प अर्पित करें।
  • 3 हाथ जोड़कर 'श्रीरामचन्द्रं सततं नमामि' की धुन के साथ अष्टक का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ जीवन में आने वाले समस्त संकटों, पारिवारिक क्लेशों और बाधाओं का निवारण होता है।
  • ✔ मन में मर्यादा, धैर्य, सत्य और धर्मपरायणता की वृद्धि होती है।
  • ✔ श्रीराम की कृपा से घर में राम-राज्य जैसी सुख-शांति और समृद्धि की स्थापना होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: मंगलवार, रविवार, रामनवमी, विवाह पंचमी