Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 श्री हनुमान जी • 9 श्लोक

संकट मोचन हनुमानाष्टक

गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अष्टक जीवन के असाध्य संकटों, रोगों और बाधाओं को हरने वाला जन-जन का सर्वाधिक प्रिय और सिद्ध हनुमत् स्तोत्र है ("को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो")।

रचयिता गोस्वामी तुलसीदास
स्रोत / ग्रन्थ हनुमान भक्ति साहित्य
छन्द मत्तगयन्द सवैया छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुं लोक भयो अँधियारो । ताहि सो त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो ॥ देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: बाल्यावस्था में आपने खेल-खेल में सूर्यदेव को निगल लिया था, जिससे तीनों लोकों में अंधकार छा गया। संसार भयभीत हो उठा और कोई इस संकट को टाल न सका। तब देवताओं की प्रार्थना पर आपने सूर्य को मुक्त कर सबका संकट दूर किया। हे कपिराज! संसार में ऐसा कौन है जो संकटमोचन के रूप में आपकी महिमा नहीं जानता!
English Translation: In childhood, You leaped and swallowed the Sun, plunging all three worlds into pitch darkness. None could avert this cosmic crisis until the Devas prayed and You released Surya, dispelling their distress. Who in the world does not know that Your sacred name is Sankat Mochan (Reliever of Distresses)!
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो । चौंकि महामुनि साप दियो तब चहिये कौन बिचार बिचारो ॥ कै द्विज रूप लिवाय मिले तिन सो हे भली बिधि काज संवारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: बाली के भय से सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर रहते थे और प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण को आते देखकर भयभीत हो गए। तब आपने ब्राह्मण का रूप धरकर श्रीराम से भेंट की और सुग्रीव की उनसे मित्रता कराकर उनके समस्त संकटों का निवारण किया। हे कपि! आपका संकटमोचन नाम सर्वविदित है।
English Translation: When Sugriva lived in terror of Vali upon Mount Rishyamukha, terrified seeing Rama approach, You assumed the guise of a Brahmin to meet the Lord, forged their alliance, and saved Sugriva. Who in the world does not know Your name Sankat Mochan!
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
अंगद हे गयौ लंक सिवाय पठावन सीता की खोज पुकारो । कपि बैन कहै सब सोच करै सुनि बीर गए मति मोचन धारो ॥ नाघि महाउदधी लै सिया सुधि फेरि लंक जराइ संहारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: सीताजी की खोज में जब अंगद आदि वानर समुद्र तट पर निराश होकर बैठ गए, तब आपने विशाल समुद्र को लांघकर माता जानकी की सुधि ली और राक्षसों का संहार करते हुए लंका को भस्म कर दिया। हे कपि! ऐसा कौन है जो आपको संकटमोचन न जानता हो!
English Translation: When Angada and the monkey hosts were despondent by the seashore, You leaped across the ocean, found Mother Sita, torched Lanka, and vanquished demons. Who in the world does not know Your name Sankat Mochan!
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग की फाँस सबै सिर डारो । श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो अति कष्ट निवारो ॥ आनि खगेस तबै हनुमान जु बन्धन काटि सबैल उबारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जब मेघनाद ने युद्ध में नागपाश डालकर श्रीराम और लक्ष्मण सहित पूरी सेना को बांध दिया और घोर संकट आ पड़ा, तब आपने गरुड़ जी को लाकर नागपाश के बंधनों को कटवाया और सबका उद्धार किया। हे कपि! आपका संकटमोचन नाम कौन नहीं जानता!
English Translation: When the serpent noose bound Lord Rama, Lakshmana, and the whole army in battle, You summoned Garuda the king of birds to sever the serpent coils and liberate them. Who in the world does not know Your name Sankat Mochan!
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
बान लग्यो उर लछिमन के तब प्रान तजे सुत रावन मारो । लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोण मँगाइ निवारो ॥ आनि सजीवन हाथ दई तब लछिमन जी उठि काज संवारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जब मेघनाद की शक्ति के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो गए, तब आप लंका से सुषेण वैद्य को उनके घर सहित ले आए और फिर द्रोणागिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की। हे कपि! आपका संकटमोचन नाम सर्वविदित है।
English Translation: When Lakshmana was struck unconscious by Meghanada's spear, You brought the physician Sushena along with his dwelling, and then flew to fetch the Sanjeevani herb from Mount Drona, restoring Lakshmana to life. Who does not know Your name Sankat Mochan!
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
रावन जुद्ध मचान कियो दल साजि सबै रघुवीर संहारो । किंकिर जो तिनके दल में हनि कोटि कपीस सबै बल टारो ॥ लै दससीस के भ्रातहिं राज दियो रघुनाथ सुजस बिस्तारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: रावण की विशाल सेना और राक्षसों का संहार करने में आपने अद्वितीय पराक्रम दिखाया और रावण के भाई विभीषण को लंका का राज्य दिलाकर प्रभु श्रीराम के यश का विस्तार किया। हे कपि! आपका संकटमोचन नाम कौन नहीं जानता!
English Translation: You displayed matchless heroism crushing Ravana's formidable armies, and helped crown Vibhishana as King of Lanka, spreading Rama's fame. Who does not know Your name Sankat Mochan!
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
अहिरावन जुद्ध मचान कियो अहिरावन लै रघुवीर पछारो । पाताल सिधाइ के देबिहिं पूजि सबै दल संहारि उबारो ॥ ताहि हते दल साजि सबै प्रभु बन्धन मुक्त कियो हितकारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जब पाताल का राजा अहिरावण छल से श्रीराम और लक्ष्मण को हर ले गया, तब आप पाताल लोक पहुंचे, अहिरावण का संहार किया और प्रभु को बंधनों से मुक्त कर सुरक्षित वापस लाए। हे संकटमोचन! आपकी महिमा कौन नहीं जानता!
English Translation: When Ahiravana abducted Rama and Lakshmana to the netherworld, You descended to Patala, slew the demon, and rescued the divine brothers from sacrifice. Who does not know Your name Sankat Mochan!
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
काज कियो बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो । कौनु सो संकट मोर गरीब को जो तुमसों नहिं जात है टारो ॥ बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होइ हमारो । को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: हे महावीर! जब आपने देवताओं के इतने बड़े-बड़े असाध्य कार्य सिद्ध कर दिए, तो मुझ गरीब का ऐसा कौन सा संकट है जिसे आप नहीं टाल सकते? हे हनुमान जी! मेरे समस्त संकटों का शीघ्र हरण कीजिए। हे कपि! आपका संकटमोचन नाम सर्वविदित है।
English Translation: O mighty hero! You resolved monumental crises for the gods; what petty trouble of this poor servant is there that You cannot dispel? Swiftly eradicate whatever distresses beset me, O Lord Hanuman! For who does not know Your name is Sankat Mochan!
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर । बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनका लाल शरीर सिन्दूर की लाली से सुशोभित है, जिनकी लाल पूंछ है, जिनका वज्र के समान कठोर शरीर दैत्यों का दलन करने वाला है, उन शूरवीर कपिराज हनुमान की जय हो, जय हो, जय हो!
English Translation: Whose body gleams rosy-red with vermilion, bearing a red tail, with a thunderbolt frame that shatters demonic forces—victory, victory, victory unto the valiant hero Hanuman!
✨ समाप्ति
।। इति संकटमोचन हनुमानाष्टक समाप्त ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें।
  • 2 हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल या घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं।
  • 3 सिन्दूर, लाल पुष्प, गुड़-चना या बूंदी का प्रसाद अर्पित करें।
  • 4 करबद्ध होकर लयबद्ध स्वर में संकट मोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ घोर संकट, कर्ज, भय, भूत-प्रेत बाधा और अकाल भय से पूर्ण मुक्ति।
  • ✔ शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों का शमन।
  • ✔ बल, बुद्धि, विद्या और आत्मविश्वास में अपार वृद्धि।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती