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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान शनि देव • 9 श्लोक

शनि अष्टकम् (दशरथ कृत)

अयोध्या नरेश महाराज दशरथ द्वारा रचित यह अष्टक शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा और मारक दृष्टि के निवारण का अचूक और शास्त्रीय स्तोत्र है।

रचयिता महाराज दशरथ (पद्म पुराण)
स्रोत / ग्रन्थ पद्म पुराण / ब्रह्माण्ड पुराण
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त शनिवार, शनि जयंती, अमावस्या
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च । नमः कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नमः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: कृष्ण वर्ण, नील वर्ण और भगवान शिव के समान नीलकण्ठ वाले शनि देव को नमस्कार है। प्रलयकाल की अग्नि के समान और यमराज के स्वरूप शनि देव को बारंबार प्रणाम है।
English Translation: Salutations to You who are dark, deep blue, resembling the blue-throated Shiva! Salutations to You who embody the cosmic dissolution fire, and are the arbiter of time (Yama).
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
नमो निर्मांसदेहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च । नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: मांस रहित (तपस्वी) शरीर वाले, लंबी दाढ़ी और जटाओं वाले, विशाल नेत्रों वाले, सूखे उदर और भय उत्पन्न करने वाले स्वरूप वाले शनि देव को नमस्कार है।
English Translation: Salutations to You of lean ascetic frame, bearing long beard and matted hair, of wide penetrating eyes, sunken waist, and awe-inspiring appearance.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णे च वै नमः । नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: स्थूल अंगों वाले, मोटे रोमों वाले, लंबे और सूखे शरीर वाले तथा काल के समान दाढ़ों वाले हे शनि देव! आपको मेरा नमस्कार है।
English Translation: Salutations to You of rugged build, coarse hair, tall and weathered stature, wielder of the fangs of Time, salutations unto You.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नमः । नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: कोटर (गहरे) नेत्रों वाले, जिनकी ओर सीधा देखना कठिन है, घोर, रौद्र, भयानक और नरमुण्ड धारण करने वाले हे शनि देव! आपको नमस्कार है।
English Translation: Salutations to You with deep-set hollow eyes, whose fierce gaze is unbearable to behold, terrifying, fierce, awe-inspiring, bearer of the skull.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते । सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदप्रद ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: सबका भक्षण करने वाले, झुर्रियों वाले मुख वाले, सूर्यपुत्र और भक्तों को अभयदान देने वाले हे शनि देव! आपको नमस्कार है।
English Translation: Salutations to You who consume all, wrinkled-faced, son of the Sun God Surya, bestower of fearlessness upon the humble, salutations unto You.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
अधोदृष्टे नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते । नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: नीची दृष्टि रखने वाले, प्रलयकारी संवर्तक, धीमी गति से चलने वाले (शनैश्चर) और क्रूर दृष्टि वाले हे शनि देव! आपको बारंबार नमन है।
English Translation: Salutations to You of downward glance, cosmic dissolver, slow-moving traveler across the zodiac (Manda), unyielding dispenser of karma, salutations to You.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च । नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: तपस्या से तपे हुए शरीर वाले, नित्य योग साधना में लीन रहने वाले, भूख से पीड़ित रहने वाले और अतृप्त स्वरूप वाले शनि देव को नमस्कार है।
English Translation: Whose form is dried by intense ascetic penance, eternally immersed in yogic absorption, hungry for justice and unappeased by falsehood, to You I bow.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मजसूनवे । तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: ज्ञानरूपी दिव्य नेत्रों वाले, कश्यप के पौत्र शनि देव! जब आप प्रसन्न होते हैं तो रंक को भी राजा बना देते हैं और रुष्ट होने पर राजा का राज्य भी तत्क्षण छीन लेते हैं।
English Translation: Endowed with the eye of wisdom, grandson of sage Kashyapa! When pleased You bestow kingdoms upon the poor, and when angered You strip sovereigns of their realm in an instant.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
दशरथकृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः । न तस्य जायते पीडा शनिदोषसमुद्भवा ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पवित्र और संयमित होकर महाराज दशरथ द्वारा रचित इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे शनि दोष से उत्पन्न किसी भी प्रकार की पीड़ा नहीं होती।
English Translation: Whoever with pure heart and devotion recites this hymn composed by King Dasharatha never suffers any affliction born of Saturn’s planetary wrath.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीदशरथकृतं शनैश्चराष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 शनिवार की शाम को स्नान कर काले या गहरे नीले वस्त्र पहनें।
  • 2 पीपल के वृक्ष के नीचे या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • 3 काले तिल, उड़द और नीले पुष्प अर्पित करें।
  • 4 पश्चिम दिशा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक शनि अष्टकम् का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष से उत्पन्न कष्टों से तत्काल राहत।
  • ✔ अचानक आने वाले संकट, कानूनी विवाद, कर्ज और व्यापारिक घाटे का निवारण।
  • ✔ दीर्घायु, न्याय, स्थिरता और कर्म में सफलता की प्राप्ति।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: शनिवार, शनि जयंती, अमावस्या