Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान सूर्य देव • 9 श्लोक

सूर्याष्टकम्

प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की स्तुति का यह अष्टक आरोग्य, तेज, आत्मबल, नेत्र ज्योति और कुंडली में सूर्य दोष व पितृ दोष की शांति हेतु सिद्ध है।

रचयिता संब पुराण / शिव प्रोक्त
स्रोत / ग्रन्थ संब पुराण
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त रविवार, मकर संक्रांति, छठ पर्व
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर । दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: हे आदिदेव! आपको नमस्कार है; हे भास्कर! मुझ पर प्रसन्न होइए। हे दिन को उत्पन्न करने वाले दिवाकर! आपको प्रणाम; हे प्रकाश फैलाने वाले प्रभाकर! आपको नमन है।
English Translation: Salutations to You, O Primordial Lord! Be graciously pleased with me, O Bhaskara! Salutations to You, O creator of the day (Divakara); salutations to You, maker of radiant light (Prabhakara).
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
सप्ताश्वरथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् । श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: सात घोड़ों वाले रथ पर आरूढ़, प्रचंड तेजस्वी, महर्षि कश्यप के पुत्र और हाथ में श्वेत कमल धारण करने वाले भगवान सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Mounted upon a chariot drawn by seven steeds, intensely effulgent, son of sage Kashyapa, bearing a pure white lotus in His hand, I bow to that Sun God.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् । महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: रक्त वर्ण के रथ पर सवार, संपूर्ण लोकों के पितामह (परम रक्षक) और महान पापों का नाश करने वाले भगवान सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Riding a brilliant red chariot, grandfather and sustainer of all worlds, dispeller of grave sins, to that Sun God I offer my prostrations.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् । महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों के स्वामी, महाशूरवीर, ब्रह्मा, विष्णु और शिव के संयुक्त स्वरूप तथा महापाप को हरने वाले भगवान सूर्य को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Master of the three Gunas, valiant warrior, embodying the trinity of Brahma, Vishnu, and Shiva, destroyer of immense sins, to that Sun God I bow.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
बृंहितं तेजसां पुञ्जं वायुमाकाशमेव च । प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: तेज के महान पुंज, वायु और आकाश को अपनी किरणों से परिपूर्ण करने वाले और समस्त लोकों के स्वामी भगवान सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Immense mass of brilliant energy, filling the air and space with life, sovereign master of all creation, to that Sun God I offer my salutations.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् । एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: दुपहरिया (बंधूक) के लाल फूल के समान कान्तिमान, हार और कुंडलों से सुसज्जित तथा काल-चक्र के एकमात्र स्वामी भगवान सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Splendid as the crimson Bandhuka flower, adorned with pearl necklaces and earrings, wielder of the single cosmic wheel of Time, to that Sun God I bow.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
तं सूर्यं जगतां कर्तारं महातेजःप्रदीपनम् । महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जगत की रचना और रक्षा करने वाले, महातेज से संपूर्ण ब्रह्माण्ड को प्रकाशित करने वाले और घोर पापों को हरने वाले भगवान सूर्य को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Creator of the worlds, illuminating the cosmos with supreme radiance, dispeller of all iniquities, to that Sun God I bow.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
तं सूर्यं जगतां दीप्तं सर्वसम्पत्करं परम् । महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त लोकों को प्रकाशित करने वाले, सभी प्रकार की संपदा और आरोग्य देने वाले तथा पापों का संहार करने वाले भगवान सूर्य को मैं बारंबार नमन करता हूँ।
English Translation: Illuminating all worlds, bestower of all prosperity, health, and supreme blessings, destroyer of great sins, to that Sun God I bow.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं गृहपीडाप्रणाशनम् । अपुत्रो लभते पुत्रं दरिद्रो धनवान् भवेत् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य इस सूर्याष्टक का नित्य पाठ करता है, उसकी समस्त ग्रह-पीड़ाएं नष्ट हो जाती हैं; निसंतान को सुयोग्य संतान और निर्धन को धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
English Translation: Whoever recites this Surya Ashtakam daily is liberated from planetary distress; the childless obtain noble progeny and the poor attain abundant wealth.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीसाम्बपुराणे श्रीसूर्याष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि करें।
  • 2 तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • 3 पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े होकर या बैठकर दोनों हाथ जोड़कर सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ नेत्र रोग, चर्म रोग और असाध्य शारीरिक व्याधियों का शमन।
  • ✔ कुंडली में सूर्य ग्रह की नीचता, ग्रहण दोष व पितृ दोष की शांति।
  • ✔ समाज व कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता की प्राप्ति।
  • ✔ तेज, ओज, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में निरंतर वृद्धि।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: रविवार, मकर संक्रांति, छठ पर्व