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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती ललिता महात्रिपुरसुन्दरी (षोडशी) • 9 श्लोक

षोडशी त्रिपुरा सुन्दरी अष्टकम

श्रीचक्र की अधिष्ठात्री त्रिपुरसुन्दरी का यह अष्टक साधक को समस्त सौंदर्य, आकर्षण, राजयोग, वाक्सिद्धि और मोक्ष साम्राज्य प्रदान करता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ श्रीविद्या तन्त्र / स्तोत्र रत्नावली
छन्द स्रग्धरा छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त शुक्रवार, पूर्णिमा, ललिता पंचमी, नवरात्रि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
कदम्बवनचारिणीं मुनिकदम्बकादम्बिनीं नितम्बकलहंसिनीं सुरनितम्बिनीसेविताम् । नवोन्मिषितयौवनां मदनपूरितानन्ददां भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: कदम्ब के दिव्य वनों में विचरण करने वाली, मुनिजनों के समूह पर मेघमाला के समान अमृत बरसाने वाली, राजहंसी के समान मनोहर चाल वाली, देव-अप्सराओं द्वारा सेविता, नित्य नूतन यौवन से दीप्तिमान और संपूर्ण विश्व का साम्राज्य देने वाली भगवती त्रिपुरसुन्दरी का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: Wandering in fragrant Kadamba groves, showering grace like rain clouds upon sages, walking gracefully like a royal swan, served by celestial nymphs, ever youthful, granting sovereignty over all realms, I adore Tripura Sundari.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
कुरुन्दमणिमण्डितां कुसुमचापबाणान्वितां सुवर्णकमले स्थितां कमलवासिनीं वैष्णवीम् । प्रफुल्लमुखपङ्कजां शशिकलाधरां सुप्रभां भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: पद्मराग मणियों से अलंकृत, पुष्पों का धनुष और बाण (इक्षुचाप और पुष्पबाण) धारण करने वाली, सुवर्ण कमल पर विराजमान, खिले हुए कमल जैसे मुख वाली, मस्तक पर चन्द्रकला धारण करने वाली और विश्व का साम्राज्य देने वाली त्रिपुरसुन्दरी को मैं भजता हूँ।
English Translation: Adorned with ruby gems, bearing the sugarcane bow and flower arrows, seated upon a golden lotus, bearing a blooming lotus face, crowned with the crescent moon, granting universal empire, I worship Her.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
त्रिकोणनिलयां परां विमलकुङ्कुमालेपनां मरालगमनाकुलां रुचिरनूपुरैर्नादिताम् । त्रिशूलवरधारिणीं त्रिभुवनेश्वरीं मङ्गलां भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्रीचक्र के मध्य त्रिकोण में निवास करने वाली, पराशक्ति, निर्मल कुंकुम से चर्चित, मधुर नूपुरों की झंकार करने वाली, तीनों लोकों की स्वामिनी और कल्याणदायिनी भगवती त्रिपुरसुन्दरी का मैं भजन करता हूँ।
English Translation: Residing within the central triangle of Sri Chakra, the transcendental power anointed with pure saffron, accompanied by jingling anklets, ruler of the three realms, I adore Tripura Sundari.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
स्मितोल्लसितगण्डिकां गलविलम्बमुक्तावलीं विलोलतरतारकां भुवनमोहिनीं मोहिनीम् । विचित्रवरकुण्डलां मकुटरत्नदीपान्वितां भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: मंद मुस्कान से प्रकाशित कपोलों वाली, गले में मोतियों की सुंदर माला पहनने वाली, चंचल सुंदर नेत्रों वाली, संपूर्ण त्रिभुवन को मोहित करने वाली, रत्नों के कुण्डलों और मुकुट से दीप्तिमान भगवती त्रिपुरसुन्दरी को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Cheeks radiant with sweet smiles, neck adorned with pearl necklaces, captivating eyes enchanting the universe, embellished with jeweled crown and earrings, I revere Mother Tripura Sundari.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
दयारसतरङ्गिणीं दुरितदारिद्र्यनाशनीं सुमेरुशिखरस्थितां सुरवधूसुवन्द्याङ्घ्रिकाम् । परं महसि संस्थितां परशिवप्रियाङ्कारिणीं भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: करुणा की तरंगों से युक्त, समस्त पापों और दरिद्रता का नाश करने वाली, सुमेरु पर्वत के शिखर पर स्थित, देव-सुन्दरियों द्वारा वंदित चरणकमलों वाली और भगवान सदाशिव के अंक में शोभित त्रिपुरसुन्दरी को मैं भजता हूँ।
English Translation: An ocean flowing with waves of mercy, destroyer of sins and poverty, seated on Mount Sumeru, lotus feet worshipped by celestial damsels, seated upon Lord Shiva's lap, I adore Her.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
जगज्जननतत्परां निखिलसृष्टिसंरक्षणीं समस्तजनपालनीं कलिमलौघविध्वंसिनीम् । अमेयवरदायिनीं प्रणतभक्तचिन्तामणिं भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जगत की उत्पत्ति करने वाली, संपूर्ण सृष्टि की रक्षा करने वाली, समस्त प्रजा का पालन करने वाली, कलियुग के पापों का विध्वंस करने वाली और शरणागत भक्तों के लिए चिंतामणि रत्न के समान मनोकामना पूरी करने वाली त्रिपुरसुन्दरी को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Creatress and protector of all cosmos, preserver of all beings, vanquisher of Kali-yuga impurities, a wish-fulfilling Chintamani jewel for surrendered devotees, I bow to Tripura Sundari.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
सुवर्णमणिदीपिकां चरणपद्मनूपुरवतीं अनङ्गवरदायिनीं अमृतवर्षिणीं शाङ्करीम् । महात्रिपुरसुन्दरीं प्रणवनादगूढस्थितां भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: सुवर्ण और मणियों के समान जगमगाने वाली, नूपुरों से शोभित चरणकमलों वाली, अमृत की वर्षा करने वाली, भगवान शंकर की आल्हादिनी शक्ति, और प्रणव (ॐ) के गूढ़ नाद में प्रतिष्ठित महात्रिपुरसुन्दरी को मैं भजता हूँ।
English Translation: Illuminating like gold and radiant jewels, feet adorned with sweet-sounding anklets, showering ambrosial nectar, divine consort of Shankara, dwelling in the secret Omkara resonance, I revere Her.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
प्रसीद मम मन्दिरे कुरु कृपाकटाक्षं सदा महेश्वरि दयानिधे कुरु मनोरथं मे शुभम् । नमामि वरदायिनीं ललितरूपकाञ्चीश्वरीं भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: हे दया की सागर महेश्वरि! मेरे गृह-मन्दिर में पधारकर मुझ पर सदा अपनी कृपामयी दृष्टि रखिए और मेरे समस्त शुभ मनोरथों को पूर्ण कीजिए। कांचीपुरम की स्वामिनी, ललिता स्वरूपा और विश्व-साम्राज्यदायिनी माता त्रिपुरसुन्दरी को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Be pleased to grace my dwelling, O treasure-house of mercy! Bestow Your compassionate glance and fulfill my noble aspirations. Sovereign of Kanchi, graceful Lalita, I surrender unto You.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
त्रिपुरसुन्दर्यष्टकं यः पठेच्छ्रद्धया नरः । सौभाग्यं विजयं राज्यं स लभेन्नात्र संशयः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से इस त्रिपुरसुन्दरी अष्टकम का पाठ करता है, वह जीवन में अखंड सौभाग्य, सर्वत्र विजय, उच्च ऐश्वर्य-साम्राज्य और अंत में मोक्ष प्राप्त करता है, इसमें कोई संशय नहीं है।
English Translation: Whoever devoutly recites this Tripura Sundari Ashtakam earns perpetual good fortune, supreme victory, royal abundance, and liberation without a doubt.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्री षोडशी त्रिपुरसुन्दरी अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 शुक्रवार या पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान कर लाल अथवा गुलाबी वस्त्र धारण करें।
  • 2 श्री चक्र (श्री यंत्र) अथवा माता के चित्र पर लाल कुंकुम, अक्षत और लाल कमल या गुलाब के पुष्प अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक जलाकर 'भजे त्रिपुरसुन्दरीं निखिलविश्वसाम्राज्यदाम्' भाव से अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ श्रीविद्या की कृपा से जीवन में अखंड लक्ष्मी, धन, ऐश्वर्य और राजसी सुख की प्राप्ति होती है।
  • ✔ व्यक्तित्व में अलौकिक आकर्षण, वाणी में ओज और वाक्सिद्धि की शक्ति जागृत होती है।
  • ✔ समस्त प्रकार के गृहक्लेश और रोग मिटकर मन परमानंद और शांत आनंद में लीन रहता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: शुक्रवार, पूर्णिमा, ललिता पंचमी, नवरात्रि