Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती तुलसी महारानी (वृन्दा देवी) • 9 श्लोक

श्री तुलसी अष्टकम

तुलसी नामाष्टक का नित्य पाठ अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्यफल देता है और घर में सुख-समृद्धि, रोगमुक्ति तथा श्रीहरि की नित्य कृपा बनाए रखता है।

रचयिता महर्षि वेदव्यास / पद्म पुराण
स्रोत / ग्रन्थ पद्म पुराण (उत्तराखण्ड)
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त प्रतिदिन प्रातः, कार्तिक मास, एकादशी, तुलसी विवाह
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
वृन्दां वृन्दावनीं विश्वपावनीं विश्वपूजिताम् । पुष्पसारां नन्दिनीं च तुलसीं कृष्णजीवनीम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: वृन्दा, वृन्दावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी—तुलसी महारानी के ये आठ पावन नाम हैं।
English Translation: Vrinda, Vrindavani, Vishvapavani, Vishvapujita, Pushpasara, Nandini, Tulsi, and Krishnajivani—these are the eight sacred names of Goddess Tulsi.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
एतन्नामाष्टकं चैव स्तोत्रं नामार्थसंयुतम् । यः पठेत्तां च संपूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: तुलसी माता का विधिवत पूजन करके जो मनुष्य इस नामाष्टक स्तोत्र का अर्थ सहित पाठ करता है, वह अश्वमेध यज्ञ का पुण्य फल प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever worships Mother Tulsi and recites these eight names along with their meanings attains the spiritual merit of performing an Ashvamedha sacrifice.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
वृन्दा नाम्ना विख्याता सा वृन्दावनसमाश्रिता । सदा नारायणप्रिया विष्णुलक्ष्मीस्वरूपिणी ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जो 'वृन्दा' नाम से प्रसिद्ध हैं और वृन्दावन की अधिष्ठात्री हैं, जो सदा भगवान नारायण की परम प्रिया हैं और साक्षात् लक्ष्मी स्वरूपा हैं, उन तुलसी जी को नमन है।
English Translation: Renowned by the name Vrinda, guardian of Vrindavan, eternally beloved to Narayana, embodiment of Mahalakshmi, salutations to Her.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
विश्वपावनि संज्ञेयं सर्वपापविनाशिनी । यस्या दर्शनेन स्पृष्ट्या नरा मुक्ता भवन्ति हि ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनका नाम 'विश्वपावनी' है, जो समस्त पापों का विनाश करने वाली हैं और जिनके केवल दर्शन व स्पर्श मात्र से ही मनुष्य पापमुक्त हो जाते हैं, उन तुलसी माता को प्रणाम है।
English Translation: Named Vishvapavani because She purifies the cosmos and destroys all sins; mortals are freed from transgressions by merely beholding or touching Her.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
विश्वपूजिता विदिता देवासुरमहर्षिभिः । यस्याः प्रसादात्सकला मनोरथाः समृध्यन्ति ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जो देवताओं, असुरों और महर्षियों द्वारा 'विश्वपूजिता' के रूप में विख्यात हैं और जिनकी कृपा-प्रसाद से मनुष्यों के समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं, उन तुलसी जी को नमन है।
English Translation: Known as Vishvapujita because She is worshipped across realms by gods, demons, and sages; by Her grace all righteous desires flourish and succeed.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
पुष्पसारा परा धन्या सुरपुष्पसमन्विता । विष्णोर्मस्तके न्यस्ता सा मुक्तिफलप्रदायिनी ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जो समस्त पुष्पों का सारभूत होने से 'पुष्पसारा' कहलाती हैं, जो भगवान विष्णु के मस्तक पर सुशोभित होकर साधक को मोक्ष फल प्रदान करती हैं, उन तुलसी जी को प्रणाम है।
English Translation: Named Pushpasara as the supreme essence of all flowers; resting upon Lord Vishnu's crown, She bestows the highest fruit of liberation.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
नन्दिनी नाम विख्याता सर्वानन्दविधायिनी । यद्गृहे संस्थिता नित्यं तद्गृहं तीर्थमुच्यते ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जो सबको आनंद देने के कारण 'नन्दिनी' कहलाती हैं और जिनके पौधे का वास जिस घर में नित्य होता है, वह घर साक्षात् तीर्थ बन जाता है, उन तुलसी माता को नमन है।
English Translation: Called Nandini because She generates spiritual joy for all; the home where She resides eternally is transformed into a sacred pilgrimage tirtha.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
कृष्णजीवनी रूपा सा कृष्णप्राणाधिका शुभा । तुलसीं सततं वन्दे सर्वकल्मषहारिणीम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जो भगवान श्रीकृष्ण के प्राणों से भी अधिक प्रिय होने के कारण 'कृष्णजीवनी' कहलाती हैं, उन समस्त पापों और कष्टों का हरण करने वाली तुलसी माता की मैं नित्य वंदना करता हूँ।
English Translation: Known as Krishnajivani because She is dearer to Krishna than His very life; I continually bow to Mother Tulsi, the dispeller of all impurities and sorrows.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
तुलसी नामाष्टकं पुण्यं यः पठेद्भक्तिसंयुतः । स भुक्त्वा विपुलान् भोगानन्ते विष्णुपदं व्रजेत् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस पावन तुलसी नामाष्टकम का पाठ करता है, वह इस लोक में विपुल सुख-भोग और सौभाग्य प्राप्त कर अंत समय में भगवान श्रीहरि के परम पद को प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever devoutly recites this sacred Tulsi Namashtakam enjoys immense auspiciousness and happiness in this life, ultimately entering the supreme abode of Lord Vishnu.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीपद्मपुराणोक्तं श्री तुलसी अष्टकम सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नान कर तुलसी जी के पौधे में शुद्ध जल अर्पित करें।
  • 2 दीपक प्रज्वलित कर चन्दन, रोली और अक्षत से तुलसी माता का पूजन करें।
  • 3 तुलसी जी की परिक्रमा करते हुए इस नामाष्टक का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ पद्म पुराण के अनुसार इसका पाठ करने से अश्वमेध यज्ञ का महान फल प्राप्त होता है।
  • ✔ घर से वास्तु दोष, बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा और गंभीर रोगों का समूल नाश होता है।
  • ✔ भगवान शालिग्राम और माता लक्ष्मी की अखंड कृपा से अन्न-धन का भंडार भरा रहता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: प्रतिदिन प्रातः, कार्तिक मास, एकादशी, तुलसी विवाह