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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान आदि वराह (भू-वराह रूप) • 9 श्लोक

श्री वराह अनुग्रह अष्टकम्

रसातल से पृथ्वी का उद्धार करने वाले भगवान वराह का यह अष्टक भूमि दोष, वास्तु दोष, कर्ज, मुकदमेबाजी और संपत्ति विवादों को समूल मिटाता है।

रचयिता महर्षि शौनक / वराह पुराण
स्रोत / ग्रन्थ वराह पुराण (अनुग्रह स्तोत्र)
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त मंगलवार, वराह द्वादशी, एकादशी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
अङ्गारकमहीपाल मङ्गलाय वरप्रद । भूकम्पचोरशत्रूणां भयविद्रावण प्रभो ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: मंगल ग्रह और संपूर्ण पृथ्वी के रक्षक, परम मंगल और वरदान देने वाले, तथा भूकंप, चोर और शत्रुओं के भय को भगाने वाले हे सर्वसमर्थ वराह देव! मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: Protector of the planet Mars and Earth, bestower of auspicious boons, dispeller of earthquakes, theft, and enemy terrors, O Lord Varaha, protect me.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
दंष्ट्राग्रेण समुद्धृत्य रसातलगतां महीम् । ररक्ष जगतां त्राता वराहरूपधृक् हरिः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जिन्होंने अपनी दिव्य दाढ़ों के अग्रभाग से रसातल में डूबी हुई पृथ्वी को बाहर निकाला और संपूर्ण जगत की रक्षा की, उन वराह रूप धारी भगवान श्रीहरि को मैं नमन करता हूँ।
English Translation: Who hoisted the sunken earth from the cosmic abyss upon the tip of His tusks, saving creation, salutations to Lord Hari incarnate as Varaha.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
हिरण्याक्षं महादैत्यं निहत्य भुवि रक्षकः । धर्मसंस्थापनपरो वराहः पातु मां सदा ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: महादैत्य हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी की रक्षा करने वाले तथा धर्म की पुनः स्थापना करने वाले भगवान वराह सदा मेरी रक्षा करें।
English Translation: Slaying the colossal demon Hiranyaksha to deliver Earth, dedicated to establishing Dharma, may Lord Varaha protect me always.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
महाकायो महावीर्यः प्रलयोदधिमर्दनः । पृथिव्याः पतिरीशानः सर्वसिद्धिप्रदायकः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: विशाल दिव्य शरीर वाले, महापराक्रमी, प्रलयकालीन समुद्र को मथने वाले, पृथ्वी के स्वामी, सर्वेश्वर और समस्त सिद्धियों के प्रदाता भगवान वराह को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Of cosmic form, tremendous valor, churning the waters of dissolution, Lord and consort of Earth, granter of all perfections, I bow to Varaha.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
भूमिदोषविनाशाय वास्तुदोषहराय च । यस्य स्मरणमात्रेण भूमिर्भवति मङ्गला ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: भूमि दोषों का नाश करने वाले और वास्तु दोषों को हरने वाले, जिनके केवल स्मरण मात्र से ही भूमि पवित्र और कल्याणकारी हो जाती है, उन वराह देव को नमन है।
English Translation: Destroyer of negative land energies and Vastu afflictions, through whose mere remembrance the soil becomes sanctified and auspicious, I salute Him.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
ऋणापमृत्युदोषघ्नः शत्रुसैन्यविदारकः । रक्ष रक्ष महाभाग वराहमूर्ते कृपानिधे ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण (कर्ज), अकाल मृत्यु और दोषों का नाश करने वाले तथा शत्रुओं की सेना को विदीर्ण करने वाले हे कृपा के सागर महाभाग वराह देव! मेरी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए।
English Translation: Eradicator of debt, untimely demise, and blemishes, scatterer of hostile armies, protect me, O glorious embodiment of Varaha, ocean of grace!
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
यज्ञरूपधरो देवः सर्ववेदमयो विभुः । यज्ञाङ्गविग्रहः श्रीमान् वराहः पालयत्वसौ ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: साक्षात् यज्ञ रूप धारण करने वाले, समस्त वेदों के अधिष्ठाता, सर्वव्यापी तथा जिनका संपूर्ण शरीर यज्ञ के अंगों से निर्मित है, वे शोभायमान भगवान वराह मेरा पालन करें।
English Translation: The very personification of sacred Yajna, repository of all Vedas, all-pervading whose limbs are the sacrificial altars, may radiant Varaha nourish me.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
लक्ष्मीसमन्वितः श्रीमान् भूमिसंरक्षणोद्यतः । सर्वानुकम्पया पूर्णो वराहः प्रीयतां मम ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: माता लक्ष्मी सहित विराजमान, पृथ्वी की रक्षा में सदा तत्पर तथा संपूर्ण करुणा से परिपूर्ण भगवान वराह मुझ पर सदा प्रसन्न रहें।
English Translation: United with Mahalakshmi, ever zealous in safeguarding Earth, filled with universal compassion, may Lord Varaha be ever pleased with me.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
वराहाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेच्छ्रद्धया नरः । भूमिधान्यसमृद्धिं च दीर्घमायुश्च विन्दति ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक इस पावन वराहाष्टकम का पाठ करता है, वह भूमि, भवन, अन्न-धन की समृद्धि प्राप्त करता है तथा इस लोक में दीर्घायु होकर सुखी रहता है।
English Translation: Whoever devoutly recites this holy Varaha Ashtakam attains abundant real-estate prosperity, food grains, wealth, and enjoys a long, healthy life.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीवराहपुराणोक्तं श्री वराह अनुग्रह अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 मंगलवार के दिन प्रातः स्नान कर पीले या लाल वस्त्र पहनें।
  • 2 भगवान वराह के समक्ष चन्दन, अक्षत और घी का दीपक प्रज्वलित करें।
  • 3 भूमि, मकान अथवा संपत्ति के विवाद की शांति का संकल्प लेकर इस अष्टक का पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ मकान, प्लॉट, जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद, कोर्ट केस और रजिस्ट्री की बाधाएं दूर होती हैं।
  • ✔ घर का भयंकर वास्तु दोष और भूमि-दोष नष्ट होकर परिवार में बरकत आती है।
  • ✔ कर्ज और वित्तीय दिवालियापन से रक्षा होकर जीवन में स्थिरता और विजय प्राप्त होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: मंगलवार, वराह द्वादशी, एकादशी