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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती वाराही देवी (सप्तमातृका) • 9 श्लोक

वाराही निग्रह अष्टकम्

मां ललिता त्रिपुरसुन्दरी की प्रधान सेनापति (दण्डनाथा) वाराही देवी का यह अष्टक घोर शत्रुओं के स्तम्भन, षड्यंत्र नाश और अजेय सुरक्षा के लिए प्रसिद्ध है।

रचयिता वाराही तन्त्र / शाक्त परम्परा
स्रोत / ग्रन्थ वाराही तन्त्र / मार्तण्ड भैरव तन्त्र
छन्द अनुष्टुप छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त शुक्रवार, पंचमी, अष्टमी, शनिवार (रात्रि काल)
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
ऐं ग्लौं ऐं नमः श्रीवाराह्यै महिषासनसंस्थितायै । दंष्ट्राकरालवदनायै शत्रुसंहारकारिण्यै ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: 'ऐं ग्लौं ऐं' बीज मन्त्र स्वरूपा, महिष (भैंसे) के आसन पर विराजमान, तीक्ष्ण दाढ़ों वाले वराह मुख से सुशोभित और समस्त शत्रुओं का संहार करने वाली भगवती वाराही को मेरा नमस्कार है।
English Translation: Bearing the sacred root syllables 'Aim Glaum Aim', seated upon a buffalo, with sharp tusks upon Her divine boar face, destroyer of evil adversaries, salutations to Varahi.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
चक्रं शङ्खं गदां मुसलं दधानायै महाबलायै । यमदण्डधरायै च दुष्टनिग्रहकारिण्यै ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा, मूसल और हल धारण करने वाली, महाबलशालिनी, यमराज के समान दण्ड देने वाली और दुष्टों का निग्रह (दमन) करने वाली देवी को प्रणाम है।
English Translation: Wielding the discus, conch, mace, and pestle in Her powerful hands, holding the staff of justice like Yama, subduing the wicked, salutations to Goddess Varahi.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
कृष्णवर्णां महाकायामुग्ररूपां भयानकम् । वाराहीमभयं देहि शत्रुसैन्यविदारिणीम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्याम वर्ण वाली, विशाल दिव्य शरीर वाली, दुष्टों के लिए उग्र और भयानक रूप धारण करने वाली तथा शत्रु सेना को विदीर्ण करने वाली हे मां वाराही! मुझे अभय प्रदान कीजिए।
English Translation: Dark in complexion, of colossal form, terribly fierce to evil, shattering the ranks of hostile forces, O Mother Varahi, grant me fearlessness.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
उच्चाटय विदारय मथ मथ शत्रून् विनाशय । मम विघ्नान् संहर देवि वाराही देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: हे देवि! मेरे विरोधियों की कुबुद्धि को उच्चाटित कीजिए, मेरे शत्रुओं का मथन और संहार कीजिए और मेरे समस्त विघ्नों का नाश कीजिए। हे वाराही देवी! आपको बार-बार नमन है।
English Translation: Confound and scatter the ill-will of adversaries, crush hostile designs, and annihilate my obstacles, O Mother Varahi, salutations unto You.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
हलमुसलहस्तायै वराहमुखशोभिन्यै । पातालवासिनां हन्त्र्यै वाराह्यै च नमो नमः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: हाथों में हल और मूसल धारण करने वाली, सुंदर वराह मुख से सुशोभित और पातालवासी दुष्ट दानवों का संहार करने वाली भगवती वाराही को मेरा नमस्कार है।
English Translation: Holding plow and pestle in Her hands, radiant with the divine boar countenance, slayer of subterranean demonic forces, salutations again and again to Varahi.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
त्रैलोक्यव्यापिन्यै नित्यं भक्तानुग्रहकारिण्यै । सर्वशत्रुविनाशाय पाहि मां वराहानने ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: तीनों लोकों में नित्य व्याप्त रहने वाली, अपने भक्तों पर सदा अनुग्रह की वर्षा करने वाली हे वराहानने! समस्त शत्रुओं से मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: Pervading the three realms eternally, showering blessings upon devotees, O Boar-faced Mother, protect me through the destruction of all adversaries.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
डाकिनीभूतवेतालपिशाचान् भक्षय द्रुतम् । रक्ष रक्ष महादेवि वाराह्यै च नमो नमः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: डाकिनी, शाकिनी, भूत, प्रेत, वेताल और पिशाचों का शीघ्र भक्षण करने वाली हे महादेवि वाराही! मेरी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए, आपको नमन है।
English Translation: Swiftly consuming dark spirits, ghouls, and negative entities, protect me, protect me, O Great Goddess Varahi, salutations unto You.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
सर्वकार्येषु सिद्धिं देहि विजयं देहि नित्यशः । शत्रूणां स्तम्भनं कुरु वाराह्यै च नमो नमः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: मेरे समस्त कार्यों में सिद्धि प्रदान कीजिए, मुझे सदा विजय दीजिए और मेरे शत्रुओं के कुप्रयासों का स्तम्भन कीजिए। हे वाराही माता! आपको बार-बार प्रणाम है।
English Translation: Grant success in all my undertakings, bestow perpetual victory, and paralyze the malice of foes, O Mother Varahi, salutations unto You.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
वाराहीनिग्रहाष्टकं यः पठेत् प्रयतः शुचिः । न तस्य शत्रुबाधा स्याद् विजयं प्राप्नुयाद् भुवि ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य पवित्र होकर संयमित चित्त से इस वाराही निग्रहाष्टकम का पाठ करता है, उसे संसार में कभी कोई शत्रु हानि नहीं पहुँचा सकता और वह सर्वत्र अजेय विजय प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever recites this Varahi Nigrahashtakam with disciplined purity is never harmed by hostile adversaries and accomplishes triumphant victory in this world.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीवाराहीतन्त्रोक्तं श्री वाराही निग्रह अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 रात्रि काल में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके लाल या काले आसन पर बैठें।
  • 2 मां वाराही के चित्र या यंत्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
  • 3 शत्रु शमन और आत्मरक्षा का संकल्प लेकर इस अष्टक का ३ या ११ बार पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ शत्रुओं की कुदृष्टि, गुप्त षड्यंत्र, ईर्ष्या और मुकदमों में उनका स्तम्भन होता है।
  • ✔ भूमि विवाद, संपत्ति पर जबरन कब्जे और आर्थिक शोषण से अचूक रक्षा होती है।
  • ✔ साधक को निर्भयता, आत्मबल और हर चुनौती में पूर्ण विजय प्राप्त होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: शुक्रवार, पंचमी, अष्टमी, शनिवार (रात्रि काल)