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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान काशी विश्वनाथ (महादेव) • 9 श्लोक

विश्वनाथ अष्टकम्

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी के अधिपति भगवान विश्वनाथ का यह अष्टक जीवन से समस्त दारिद्र्य, रोग और संतापों का नाश कर परम पद देता है।

रचयिता महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ स्कन्द पुराण (काशी खण्ड)
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
गङ्गाधरं शशिकिरीटममुं त्रिनेत्रं कण्ठे लसद्विषमपारगुणं महेशम् । कैलासशैलनिलयं वृषभध्वजं तं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मस्तक पर गंगा को धारण करते हैं, चन्द्रमा जिनका मुकुट है, जिनके तीन नेत्र हैं, जिनके नीले कंठ में हलाहल विष सुशोभित है, जो अनन्त गुणों के स्वामी, कैलास पर्वत पर निवास करने वाले और वृषभ (नंदी) की ध्वजा वाले हैं, उन काशीपुरी के अधिपति भगवान विश्वनाथ की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Bearing Ganga on His crown, adorned with the crescent moon, three-eyed, sporting blue poison at His throat, of boundless virtues, dwelling on Kailasa, with Nandi on His flag, I take refuge in the Lord of Varanasi.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
भस्माङ्गरागकलितं फणिहारदीप्तं चर्माम्बरं प्रमथनाथमपारपारम् । भूतेशमन्तकहरं जगदेकबन्धुं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके संपूर्ण अंगों पर दिव्य भस्म का अंगराग लगा है, जो सर्पों की माला से दीप्तिमान हैं, जो व्याघ्रचर्म धारण किए हुए हैं, प्रमथगणों के स्वामी हैं, भूतनाथ, यमराज के भी संहारक और संपूर्ण जगत के एकमात्र सच्चे बंधु हैं, उन काशी के अधिपति विश्वनाथ की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Besmeared with sacred ash, illuminated by serpent garlands, clad in tiger skin, Lord of Pramathas, master of beings, vanquisher of death, sole kin of the universe, I take refuge in Varanasi's sovereign Lord.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
चन्द्रावतंसविलसज्जटजूटभारं गौरीमुखाम्बुजमधुव्रतमप्रमेयम् । कर्पूरगौरवपुषं कमलाक्षपूज्यं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनकी विशाल जटाओं में बालचंद्रमा सुशोभित है, जो माता गौरी के मुखकमल के भौंरे के समान हैं, जो अप्रमेय (तर्क से परे), कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले और कमलनयन भगवान विष्णु द्वारा पूजित हैं, उन काशीपति भगवान विश्वनाथ की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Whose matted locks bear the crescent crown, who hovers like a bee at Gauri's lotus countenance, immeasurable, radiant white like camphor, adored by lotus-eyed Vishnu, I surrender to the Lord of Kashi.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
काञ्चीकलापविलसत्कटितट्यमानं मातङ्गजर्मपरिधाय लसत्प्रकाशम् । कामाङ्गदाहकुशलं कमनीयनेत्रं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनकी कमर में सुंदर करधनी शोभित है, जो गजचर्म धारण किए हुए दिव्य तेज से प्रकाशित हैं, जिन्होंने कामदेव के शरीर को भस्म कर दिया और जिनके सुंदर तीन नेत्र हैं, उन वाराणसी के अधिपति भगवान विश्वनाथ का मैं आश्रय लेता हूँ।
English Translation: Adorned with a graceful waistband, draped in elephant hide, blazing with splendour, who consumed Cupid with His third eye, possessed of charming eyes, I seek shelter in the Lord of Varanasi.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
संसृतिदावदहनं दुरितापहर्तारं विश्वम्भरं प्रणतभक्तजनार्तिहारम् । काशीश्वरं सकललोकशरण्यमूर्तिं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जो संसार रूपी दावानल को बुझाने वाले, समस्त पापों को हरने वाले, संपूर्ण विश्व का भरण-पोषण करने वाले, शरणागत भक्तों की पीड़ा को मिटाने वाले और सभी लोकों के एकमात्र शरण्य काशीश्वर हैं, उन काशीपति विश्वनाथ की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Extinguisher of worldly wildfire, dispeller of sins, sustainer of creation, redeemer of devotees' agony, supreme sanctuary of all worlds, I take refuge in the Lord of Varanasi.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
तारादिमन्त्रसुविभावितपादपद्मं वेदान्तवेद्यममलं मुनिमुख्यगेयम् । सर्वज्ञमीशमखिलप्रभवव्ययं तं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके चरण कमलों का तारक ॐकार मन्त्र से ध्यान किया जाता है, जो वेदान्त द्वारा जानने योग्य, परम शुद्ध, श्रेष्ठ मुनियों द्वारा स्तुति किए जाने वाले, सर्वज्ञ, अविनाशी और संपूर्ण जगत की उत्पत्ति व प्रलय के कारण हैं, उन काशीपति की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Whose lotus feet are contemplated with the Taraka Omkara, realized through Vedanta, pure, praised by foremost sages, omniscient, imperishable origin of the cosmos, I surrender to Varanasi's ruler.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
व्यालाजिनाम्बरधरं मणिकुण्डलाढ्यं मृत्युञ्जयं मदननाशकरं पिनाकम् । कैवल्यदाननिपुणं त्रिगुणाभिरूपं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जो सर्प और मृगचर्म धारण किए हैं, मणियों के कुण्डलों से युक्त हैं, मृत्यु को जीतने वाले मृत्युंजय हैं, कामदेव का नाश करने वाले, हाथ में पिनाक धनुष रखने वाले, कैवल्य मोक्ष देने में निपुण और त्रिगुणातीत हैं, उन काशीपति की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Clad in serpents and antelope hide, adorned with gemmed earrings, conqueror of death, wielder of the Pinaka bow, adept at granting absolute liberation, beyond the three gunas, I seek refuge in Kashi's Lord.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
दारिद्र्यदुःखदलनं सुखदं जनानां मुक्तिप्रदं निगमसारविशुद्धतत्त्वम् । उमापतिं प्रणमतोऽखिलसिद्धिहेतुं वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जो दरिद्रता और दुःख का दलन करने वाले, मनुष्यों को परमानंद देने वाले, मोक्ष प्रदाता, वेदों के सारभूत विशुद्ध तत्त्व, माता उमा के पति और समस्त सिद्धियों के मूल कारण हैं, उन काशीपति भगवान विश्वनाथ की मैं शरण लेता हूँ।
English Translation: Crusher of poverty and sorrow, giver of supreme joy, bestower of liberation, essence of Vedic wisdom, Lord of Uma, source of all accomplishments, I bow to the Lord of Varanasi.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
विश्वनाथाष्टकं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ । सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोके महीयते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य भगवान शिव के सानिध्य में अथवा शिवलिंग के समक्ष इस पवित्र विश्वनाथाष्टकम का पाठ करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर अंत में शिवलोक में पूजित होता है।
English Translation: Whoever recites this holy Vishwanatha Ashtakam in the presence of Lord Shiva becomes purified of all sins, ultimately attaining honor in Shiva's eternal realm.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमहर्षिव्यासप्रणीतं श्री विश्वनाथ अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण करें और पूर्वाभिमुख बैठें।
  • 2 शिवलिंग पर गंगाजल, श्वेत चन्दन, भस्म, अक्षत और बिल्वपत्र अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक जलाकर 'वाराणसीपुरमधीश्वरमाश्रयामि' भाव से अष्टक का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के साक्षात् दर्शन और अभिषेक का आध्यात्मिक पुण्य मिलता है।
  • ✔ दारिद्र्य, कर्ज, व्यापारिक मंदी और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
  • ✔ मन में शिव-भक्ति, आत्म-ज्ञान और मोक्ष की प्रबल शक्ति जागृत होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष