Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती यमुना जी (कालिन्दी) • 9 श्लोक

यमुना अष्टकम्

पुष्टिमार्ग का सर्वप्रमुख स्तोत्र, जिसका पाठ भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, व्रज-रस, मानसिक निर्मलता और यमराज के भय से मुक्ति प्रदान करता है।

रचयिता श्रीमद्वल्लभाचार्य जी महाप्रभु
स्रोत / ग्रन्थ पुष्टिमार्ग षोडशग्रन्थ / श्री यमुनाष्टकम्
छन्द पृथ्वी छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त रविवार, यम द्वितीया (भाई दूज), एकादशी, पूर्णिमा
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
नमामि यमुनामहं सकलसिद्धिहेतुं मुदा मुरारिपदपङ्कजस्फुरदमन्दरेणुत्कटाम् । तटस्थनवकाननप्रकटमोदपुष्पाम्बुना सुरासुरसुपूजितप्रभवशक्त्यलम्भोज्वलाम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: समस्त अलौकिक सिद्धियों की हेतु, भगवान श्रीकृष्ण के चरण-कमलों की पराग से उज्ज्वल, तटवर्ती नूतन उपवनों के सुगंधित पुष्पों से सुवासित जल वाली तथा देवता व असुरों द्वारा पूजित दिव्य सामर्थ्य से संपन्न भगवती यमुना को मैं आनंदपूर्वक प्रणाम करता हूँ।
English Translation: I joyfully bow to Yamuna Devi, the cause of all spiritual achievements, radiant with the sacred pollen of Sri Krishna's lotus feet, fragranced by newly blossomed riverbank groves, worshipped by gods and titans alike.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
कलिन्दगिरिमस्तके पतदमन्दपूरोज्ज्वला विलासगमनालसप्रकटगण्डशैलस्तनी । सघोषगतिदन्तिनी कनकपादपीठस्थिता सुरेन्द्रसुरकामिनीकृतसमस्तपूजापदा ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जो कालिन्द पर्वत के मस्तक से वेगवती धारा के रूप में उतरती हैं, मन्द-मन्द विलासयुक्त गति से बहती हैं, जिनका जल चट्टानों से टकराकर सुंदर शब्द करता है, जो सुवर्ण पादपीठ पर स्थित हैं और इन्द्रादि देवताओं की अप्सराओं द्वारा पूजित हैं, उन यमुना जी को नमन है।
English Translation: Descending majestically from Mount Kalinda with swift currents, meandering gracefully past colossal boulders, echoing like gentle celestial elephants, worshipped on a golden pedestal, salutations to Her.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
भुवं भुवनपावनीमनुपमप्रभावागुणां स्वनिर्मलपयोभिरप्यमलतारकासङ्कलाम् । दधानमनुकम्पया भुवि कलङ्कमग्नां जनान् पुनाति परमामृतप्रतिमवारिभिश्चिन्तये ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जो संपूर्ण जगत को पवित्र करने वाली हैं, अनुपम प्रभाव और गुणों वाली हैं, जिनके निर्मल जल में आकाश के तारे प्रतिबिंबित होकर मोतियों जैसे लगते हैं, जो पृथ्वी पर पाप-युक्त मनुष्यों को अपने अमृत तुल्य जल से पावन कर देती हैं, उन यमुना जी का मैं ध्यान करता हूँ।
English Translation: Sanctifier of the entire cosmos, endowed with matchless virtues, whose crystalline waters mirror pristine constellations like pearls, redeeming sin-afflicted mortals with nectarine streams, I meditate upon Yamuna.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
स्तुता सुरगणैः सदा सुचरितैश्च सिद्धैर्नुता जनार्दनहृदिस्थिता सुविशदा महापापहा । यदीयसलिलप्लवे भवति मुक्तिदानं नृणां नमामि कलुषच्छिदां परमवैष्णवीमादरात् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: देवताओं और सिद्ध पुरुषों द्वारा निरंतर वंदित, भगवान श्रीकृष्ण के हृदय में वास करने वाली, महापापों का समूल नाश करने वाली, जिनके पावन जल में मात्र स्नान से मुक्ति का द्वार खुल जाता है, उन परम वैष्णवी यमुना महारानी को मैं आदरपूर्वक प्रणाम करता हूँ।
English Translation: Eternally eulogized by celestial hosts and realized sages, dwelling within Lord Krishna's heart, eradicator of monumental sins, whose touch confers divine liberation, I bow with deep reverence to this supreme Vaishnavi.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
तरङ्गितलसज्जला विविधहंससारसैः युता मकरकच्छपप्रवरमीनखेलाकुला । मुकुन्दवनविभ्रमैः प्रमुदिता सदा राजते नमामि यमुने मुदा कलितसङ्गमां वैष्णवीम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनकी लहरों से युक्त जल में हंस, सारस किलोल करते हैं, मत्स्य और कछुए क्रीड़ा करते हैं, तथा जो भगवान श्रीकृष्ण की निकुंज लीलाओं से नित्य प्रफुल्लित रहती हैं, उन श्री कृष्ण की प्रेयसी यमुना जी को मैं आनंदपूर्वक नमन करता हूँ।
English Translation: Whose swirling waves teem with swans, cranes, and sportive aquatic life, ever delighted by Mukunda's transcendental forest pastimes, joyfully do I bow unto Yamuna Devi.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
कलिन्दतनये सदा भवति यत्कृपातो नृणाम् अनन्यपरमेश्वरे प्रणतिरुत्तमा जायते । समस्तव्रजवासिनां विमलबोधदात्री परा नमामि यमुनां परां हरिमनोहरां वैष्णवीम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: हे सूर्यपुत्री! जिनकी कृपा से मनुष्य के हृदय में परमेश्वर श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण भाव जागृत होता है, जो समस्त ब्रजवासियों को विशुद्ध भगवद्-ज्ञान प्रदान करती हैं, उन भगवान हरि का मन मोहने वाली यमुना जी को मैं प्रणाम करता हूँ।
English Translation: O Daughter of the Sun! By whose divine grace unswerving devotion to the Supreme Lord Sri Krishna blossoms in human hearts, bestower of pure wisdom upon the residents of Vraja, I salute enchanting Yamuna.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
नमोऽस्तु यमुने सदा तव पदारविन्दद्वये मुकुन्दरससङ्गमे विमलबोधपीयूषदे । अगाधमहिमाङ्किते कलिमलौघविध्वंसिनि प्रसीद परमे पदे मयि कुरुष्व दृष्टिं शुभाम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: हे यमुने! आपके चरण-कमलों में मेरा नित्य प्रणाम हो, जो श्रीकृष्ण के प्रेम-रस से सराबोर हैं और विशुद्ध ज्ञान का अमृत देने वाले हैं। हे कलियुग के पापों को नष्ट करने वाली अगाध महिमा वाली देवी! मुझ पर अपनी कृपामयी शुभ दृष्टि डालिए।
English Translation: Salutations forever to Your lotus feet, infused with Mukunda's divine nectar and supreme spiritual wisdom. O dispeller of Kali-yuga's sins of unfathomable glory, cast Your benevolent glance upon me.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
नमामि यमुनामहं सकललोकसंरक्षणीं मुकुन्दपदसङ्गमां कलितभक्तिदानोद्यताम् । ममापि सकलार्तिहं कुरु कृपाकटाक्षं सदा नमामि कलिजात्मजां परमपावनीं कालिन्दीम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: संपूर्ण लोकों की रक्षा करने वाली, भगवान मुकुन्द के चरणों की संगिनी, सहज ही कृष्ण-भक्ति प्रदान करने वाली और समस्त कष्टों का निवारण करने वाली सूर्यपुत्री परम पावनी कालिन्दी यमुना जी को मैं सादर नमन करता हूँ।
English Translation: I adore Yamuna, guardian of all realms, forever joined with Mukunda's feet, readily bestowing selfless devotion, dispeller of all suffering, daughter of Surya, supreme purifier.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
इदं तु यमु्राष्टकं पठति यः शुचिः संश्रितः प्रयाति परमां गतिं भवति कृष्णभक्तो भुवि । समस्तममलं पदं व्रजपुरे लभेन्निश्चलं सुखं च महदश्नुते हरिपदाब्जलीलामृतम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो पवित्र मन से इस यमुनाष्टकम का पाठ करता है, वह इस पृथ्वी पर भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त बनता है, परम गति को प्राप्त होता है, और दिव्य व्रज-धाम में अविचल स्थान पाकर श्रीकृष्ण के चरण-कमलों के लीलामृत का निरंतर रसास्वादन करता है।
English Translation: Whoever recites this Yamunashtakam with a purified heart attains supreme destination, becomes a dedicated Krishna devotee, gains an eternal abode in Vraja, and relishes the nectar of divine lila.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमद्वल्लभाचार्यविरचितं श्री यमुना अष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें और यमुना जी अथवा श्रीनाथजी का ध्यान करें।
  • 2 दीपक प्रज्वलित करें और संभव हो तो यमुना जल का आचमन या छिड़काव करें।
  • 3 भावपूर्वक 'नमामि यमुनामहं सकलसिद्धिहेतुं मुदा' का सस्वर पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ भगवान श्रीकृष्ण के युगल चरणों में अनन्य प्रीति और प्रेम-भक्ति की प्राप्ति होती है।
  • ✔ यमराज का भय समाप्त होता है क्योंकि यमुना जी यमराज की सहोदरा बहन हैं।
  • ✔ मन के समस्त कलुष, विकार और पाप धुलकर अंतःकरण परम शुद्ध हो जाता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: रविवार, यम द्वितीया (भाई दूज), एकादशी, पूर्णिमा