माँ दुर्गा पूजन विधि (नवरात्रि व अष्टमी)
🗓️ शुभ दिन व मुहूर्त: नवरात्रि (शारदीय व चैत्र), दुर्गाष्टमी, महानवमी अथवा प्रत्येक मंगलवार व शुक्रवार
पूजन का महत्व एवं चमत्कारी फल
माँ भगवती दुर्गा साक्षात आदिशक्ति पराशक्ति हैं, जो महिषासुरमर्दिनी और दुर्गतिनाशिनी हैं। दुर्गा सप्तशती के अनुसार माँ दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करने से शत्रुओं का पराभव, भय से मुक्ति, रोगों का शमन और असीम साहस की प्राप्ति होती है। माँ अपने भक्तों की समस्त विपदाओं को हरकर उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करती हैं।
सम्पूर्ण पूजन सामग्री सूची (चेकलिस्ट)
💡 सुझाव: थाली में सामग्री सजाते समय प्रत्येक वस्तु के आगे टिक (✓) लगाएं ताकि कोई सामग्री छूटे नहीं।
आरंभिक शुद्धि, दीप प्रज्वलन एवं संकल्प
१. आसन शुद्धि:
लाल आसन पर पूर्व या उत्तर मुख कर बैठें।
२. आचमन (मुख शुद्धि):
तीन बार आचमन करें।
३. पवित्रीकरण (आत्म शुद्धि मंत्र):
पवित्रीकरण मंत्र से जल छिड़कें।
४. दीप प्रज्वलन व प्रणाम:
अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।
५. संकल्प (Sankalpa):
हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर नवरात्रि/दुर्गा पूजन का संकल्प लें।
मंत्र, विधि एवं भावार्थ सहित संपूर्ण पूजन विधान
प्रत्येक उपचार को श्रद्धापूर्वक संपन्न करें और साथ में दिए गए वैदिक/पौराणिक मंत्र का उच्चारण करें।
1 १. ध्यानम् (Dhyanam)
उपचार #1विद्युद्दामसमप्रभां मृगपतिस्कन्धस्थितां भीषणां कन्याभिः करवालखेटविलसद्धस्ताभिरासेविताम्। हस्तैश्चक्रगदासिखेटविशिखांश्चापं गुणं तर्जनीं विभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे॥
सिंह पर सवार, अष्टभुजाधारी त्रिनेत्री माँ दुर्गा के तेजस्वी स्वरूप का ध्यान करें।
2 २. आवाहनम् (Avahanam)
उपचार #2ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। आगच्छ वरदे देवि दैत्यदर्पनिषूदनि॥
हाथ जोड़कर जगदम्बा माँ दुर्गा का आवाहन करें।
3 ३. आसनम् (Asanam)
उपचार #3सिंहासनं मया दत्तं दिव्यास्तरणसंयुतम्। गृहाण देवि कल्याणि जगन्मातर्नमोऽस्तु ते॥
रक्त पुष्पों का आसन अर्पित करें।
4 ४. पाद्यम् (Padyam)
उपचार #4ॐ दुर्गायै नमः, पाद्यं समर्पयामि।
चरण प्रक्षालन हेतु जल चढ़ाएं।
5 ५. अर्घ्यम् (Arghyam)
उपचार #5रक्तचन्दनमिश्रेण जलेन परमेश्वरि। अर्घ्यं गृहाण कल्याणि चण्डिके वरदा भव॥
लाल चंदन व अक्षत युक्त अर्घ्य जल चढ़ाएं।
6 ६. आचमनीयम् (Achamaniyam)
उपचार #6गङ्गाजलसमानीतं सुगन्धि तोयमुत्तमम्। आचम्यतां मया दत्तं देवि दुर्गे नमोऽस्तु ते॥
आचमन हेतु जल चढ़ाएं।
7 ७. पंचामृत स्नानम् (Snanam)
उपचार #7पञ्चामृतं मयानीतं पयो दधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानाय प्रतिगृह्यताम्॥
पंचामृत व सुगंधित जल से स्नान कराएं।
8 ८. वस्त्रम् व शृंगार (Vastram & Shringar)
उपचार #8रक्तकौशेयवसनं नानालङ्कारभूषितम्। गृहाण वरदे देवि सर्वकामप्रदायिनि॥
लाल चुनरी ओढ़ाएं और सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, महावर सहित 16 शृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
9 ९. कुंकुम, अक्षत व सिंदूर (Kumkum & Sindoor)
उपचार #9सिन्दूरं रक्तवर्णं च शोभनं सुमनोहरम्। विलेपनं गृहाण त्वं दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
माँ के मस्तक पर कुंकुम व सिंदूर का तिलक करें और अक्षत चढ़ाएं।
10 १०. लाल पुष्प व माला (Red Flowers)
उपचार #10जवाकुसुमसंकाशं रक्तपुष्पं प्रियं तव। मया दत्तं गृहाण त्वं चण्डिके भक्तवत्सले॥
लाल गुड़हल के पुष्प, गुलाब और गेंदे की माला पहनाएं।
11 ११. धूपम् व गुग्गल (Dhupam)
उपचार #11गुग्गुल्वदिसमायुक्तो धूपोऽयं सुमनोहरः। गृहाण वरदे देवि जगन्मातर्नमोऽस्तु ते॥
गुग्गल व लोबान की सुगंधित धूप दिखाएं।
12 १२. दीपम् (Deepam)
उपचार #12साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया। दीपं गृहाण देवेशि त्रैलोक्यतिमिरापहे॥
गाय के घी का अखंड दीपक या आरती दीप दिखाएं।
13 १३. हलवा, पूरी व चना नैवेद्यम् (Naivedyam)
उपचार #13नैवेद्यं षड्रसोपेतं मिष्टान्नं घृतपाचितम्। गृहाण देवि कल्याणि मम संतुष्टये भव॥
हलवा, पूरी, काले चने, लौंग का जोड़ा और बताशे का महाभोग लगाएं।
14 १४. ताम्बूलम् व दक्षिणा (Tambulam)
उपचार #14ताम्बूलं च सताम्बूलं पूगीफलसमन्वितम्। लवङ्गैलादिसंयुक्तं गृहाण वरदायिनि॥
मीठा पान, लौंग, इलायची व दक्षिणा चढ़ाएं।
15 १५. महाआरती (Maha Aarti)
उपचार #15अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली। तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
कर्पूर व पंचदीप प्रज्वलित कर जय दुर्गे आरती करें और शंख-घड़ियाल बजाएं।
16 १६. क्षमा प्रार्थना व कन्या पूजन (Kshama & Kanya)
उपचार #16अपराधशतं कृत्वा जगदम्बेति चोच्चरेत्। यां गतिं लभते न तां ब्रह्मादयः सुराः॥
साष्टांग प्रणाम कर क्षमा मांगें और अष्टमी/नवमी पर 9 कन्याओं का पूजन कर आशीर्वाद लें।
महत्वपूर्ण पूजन नियम, सावधानियां व वर्जित कार्य
- ✦ माँ दुर्गा की पूजा में दूर्वा, तुलसी और मदार (आक) का फूल न चढ़ाएं (दूर्वा केवल गणेश जी को चढ़ती है)।
- ✦ माँ को लाल रंग के पुष्प (विशेषतः लाल गुड़हल) और लाल चुनरी अर्पित करना सर्वाधिक फलदायी है।
- ✦ अष्टमी या नवमी के दिन 2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोजन व दक्षिणा अवश्य कराएं।
- ✦ नवरात्रि में अखंड ज्योति की पवित्रता का विशेष ध्यान रखें और ज्योति को निर्जन न छोड़ें।
🔔 संबंधित चालीसा एवं महाआरती संग्रह
पूजन की पूर्णता हेतु स्तुति पाठ व कर्पूर आरती अवश्य करें।