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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम

श्री राम रक्षा स्तोत्रम

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्... भगवान शिव द्वारा ऋषि बुधकौशिक को स्वप्न में दिया गया यह राम रक्षा स्तोत्र साधक के सिर से लेकर पैरों तक समस्त अंगों पर प्रभु श्रीराम का अभेद्य रक्षा-कवच स्थापित करता है।

रचयिता ऋषि बुधकौशिक
स्रोत / ग्रन्थ पद्म पुराण / भगवान शिव स्वप्न
शुभ दिन / तिथि मंगलवार, रविवार, रामनवमी
जप माला तुलसी माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥१॥
हिंदी भावार्थ: श्री रघुनाथ जी का चरित्र सौ करोड़ विस्तार वाला है, जिसका एक-एक अक्षर भी मनुष्यों के बड़े से बड़े महापापों को नष्ट करने में समर्थ है।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् । जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम् ॥२॥ सासितूणीरधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् । स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥३॥
हिंदी भावार्थ: नीलकमल के समान श्याम वर्ण, कमल नयन, माता जानकी और लक्ष्मण जी सहित, जटामुकुट से सुशोभित, हाथ में खड्ग, तरकश, धनुष-बाण धारण किए, राक्षसों का संहार करने वाले, अपनी लीला से जगत की रक्षा हेतु प्रकट हुए अजन्मा सर्वव्यापी श्रीराम का ध्यान करके...
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः । कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुती ॥४॥
हिंदी भावार्थ: राघव मेरे सिर की रक्षा करें, दशरथपुत्र मेरे ललाट (माथे) की रक्षा करें, कौशल्यानंदन मेरे दोनों नेत्रों की और विश्वामित्र के प्रिय प्रभु मेरे कानों की रक्षा करें।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः । रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥५॥
हिंदी भावार्थ: राजाओं में मुकुटमणि श्रीराम सदा विजयी होते हैं, उन लक्ष्मीपति राम का मैं भजन करता हूँ। जिनके द्वारा राक्षसों की सेना नष्ट हुई उन राम को मेरा नमस्कार है। राम से बढ़कर कोई श्रेष्ठ आश्रय नहीं है, मैं उन राम का दास हूँ। मेरा चित्त सदा श्रीराम में लीन रहे—हे राम! आप मेरा उद्धार कीजिए!
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ अकाल मृत्यु, दुर्घटना, असाध्य व्याधि और ग्रह पीड़ा से पूर्ण सुरक्षा
  • ✓ शत्रुओं, भूत-प्रेत और नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश
  • ✓ सर्व कार्य सिद्धि, मनोबल और आत्मिक शांति की प्राप्ति
  • ✓ भगवान श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान जी की संयुक्त कृपा
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ पीले या श्वेत वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें। शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
3
तुलसी व चंदन अर्पण
भगवान विष्णु/श्रीराम/श्रीकृष्ण को गोपीचंदन का तिलक लगाएं और तुलसी दल व पीले पुष्प अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल व तुलसी लेकर शांति, रक्षा और अभीष्ट फल की कामना का संकल्प कर प्रेमपूर्वक पाठ करें।
5
आरती व भोग
पाठ उपरांत माखन-मिश्री अथवा पंजीरी का भोग लगाएं और कर्पूर आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री राम रक्षा स्तोत्रम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके तुलसी माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।