चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्... भगवान शिव द्वारा ऋषि बुधकौशिक को स्वप्न में दिया गया यह राम रक्षा स्तोत्र साधक के सिर से लेकर पैरों तक समस्त अंगों पर प्रभु श्रीराम का अभेद्य रक्षा-कवच स्थापित करता है।
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प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके तुलसी माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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