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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 श्री कृष्ण

अक्रूर कृता श्री कृष्णा स्तुति

श्री कृष्ण की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक अक्रूर कृता श्री कृष्णा स्तुति।

रचयिता अक्रूर जी
स्रोत / ग्रन्थ श्रीमद्भागवत महापुराण
॥ श्लोक 1 ॥
नतोऽस्म्यहं त्वाखिलहेतुहेतुं नारायणं पूरुषमाद्यमव्ययम्। यन्नाभिपद्माद्भवतोऽभवन्महाञ्ज्ञाता विधाता जगतो यतोऽन्वभूत्॥
हिंदी भावार्थ:

हे सर्वेश्वर! मैं आपको नमन करता हूँ, जो समस्त कारणों के मूल कारण, आदि पुरुष और अविनाशी नारायण हैं। जिनकी नाभि-कमल से समस्त ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्मा जी प्रकट हुए।

अंग्रेजी अनुवाद: I bow down to You, Lord Narayana, the ultimate cause of all causes, the primal and imperishable Supreme Being from whose navel-lotus Brahma arose to manifest the universe.
॥ श्लोक 2 ॥
भूस्तोयमग्निः पवनः खमादिर्महानजादिर्मन इन्द्रियाणि। सर्वेन्द्रियार्था विबुधाश्च सर्वे ये चेतवो ते भवतः स्वरूपाः॥
हिंदी भावार्थ:

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, महत्तत्व, अहंकार, मन, इन्द्रियां और उनके विषय तथा समस्त देवता—ये सभी केवल आपके ही दिव्य स्वरूप के विस्तार हैं।

अंग्रेजी अनुवाद: Earth, water, fire, air, ether, cosmic intellect, ego, mind, senses and all celestial deities are nothing other than manifestations of Your divine form.
॥ श्लोक 3 ॥
त्वां सर्ववेदाश्च मुनीन्द्रमुख्या ध्यायन्ति शुद्धं पुरुषं पुराणं। तं त्वां भजे लोकगुरो प्रसीद कृष्णाय तुभ्यं सततं नमोऽस्तु॥
हिंदी भावार्थ:

हे जगद्गुरु! समस्त वेद और ऋषिगण आपके विशुद्ध सनातन स्वरूप का ध्यान करते हैं। हे भगवान श्री कृष्ण! आप मुझ पर प्रसन्न हों, आपको कोटि-कोटि प्रणाम।

अंग्रेजी अनुवाद: All Vedas and exalted sages meditate upon Your purest primordial being. O Teacher of the universe, Lord Krishna, be pleased with me; salutations to You forever.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में श्री कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर अक्रूर कृता श्री कृष्णा स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम, भक्ति, सांसारिक भय से मुक्ति और अंतःकरण की परम शुद्धि प्राप्त होती है।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार