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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 गुरुवायुरप्पन (श्री कृष्ण)

गुरु वायुपुर्सा मंगल स्तुति

गुरुवायुरप्पन (श्री कृष्ण) की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक गुरु वायुपुर्सा मंगल स्तुति।

रचयिता मेल्पत्तूर नारायण भट्टतिरि
स्रोत / ग्रन्थ नारायणीयम
॥ श्लोक 1 ॥
मङ्गलं मङ्गलाकारं मङ्गलायतनेक्षणम् । मङ्गलं वायुगेहेशं मङ्गलं करुणामयम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:

समस्त मंगलों के स्वरूप, जिनकी कृपादृष्टि मंगलों का निवास है, उन गुरुवायुर के स्वामी (वायुगेहेश) और करुणा के सागर भगवान श्रीकृष्ण का सर्वदा मंगल हो।

अंग्रेजी अनुवाद: May all auspiciousness attend the Lord of Guruvayur (Vayugehesha), who is the embodiment of auspiciousness, whose eyes are the sanctuary of blessings, and who is an ocean of mercy.
॥ श्लोक 2 ॥
यत्कृपालेशतो मर्त्यो मुच्यते भवरोगतः । तं वन्दे वायुपुर्नेशं बालरूपं जगत्पतिम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:

जिनकी कृपा के एक लेश मात्र से मनुष्य संसार रूपी जन्म-मरण के भयानक रोग से मुक्त हो जाता है, उन गुरुवायुर के बालरूप स्वामी जगदीश्वर की मैं वन्दना करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: By even a droplet of whose grace mortals are cured of the chronic disease of worldly transmigration, to that child-formed Sovereign of Guruvayur I offer my homage.
॥ श्लोक 3 ॥
शङ्खचक्रगदापद्मधारिणं पीतवाससम् । गोपीजनमनोहारं गुरुवायुपुरेशं भजे ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:

शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले, पीताम्बरधारी और गोपियों के मनों को हरने वाले गुरुवायुर के अधीश्वर का मैं भजन करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Holding the conch, discus, mace, and lotus, draped in radiant yellow silks, captivator of the hearts of Gopis, I revere the Lord of Guruvayur.
॥ श्लोक 4 ॥
नारायणीयस्तुतये नारदेन च संस्तुतम् । वातरोगादिहन्तारं वन्दे कृष्णं सनातनम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:

श्रीमन्नारायणीयम् स्तोत्र में भट्टपाद द्वारा और देवर्षि नारद द्वारा जिनकी स्तुति की गई है, जो वात आदि समस्त असाध्य रोगों के हर्ता हैं, उन सनातन श्रीकृष्ण की मैं वन्दना करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Celebrated in the sacred Narayaneeyam and praised by sage Narada, healer of arthritis, paralysis, and all illnesses, I bow to eternal Lord Krishna.
॥ श्लोक 5 ॥
गुरुवायुरमङ्गलं स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः । आरोग्यं परमायुष्यं लभते विष्णुतत्परः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:

जो विष्णुभक्त तीनों संध्याओं में इस गुरुवायुरेश मंगल स्तोत्र का पाठ करता है, वह पूर्ण आरोग्य, दीर्घायु और अंत में भगवान विष्णु का परम पद प्राप्त करता है।

अंग्रेजी अनुवाद: Whoever devoted to Vishnu recites this auspicious Guruvayur Mangala hymn at dawn, noon, and dusk attains robust health, long life, and supreme devotion.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में गुरुवायुरप्पन (श्री कृष्ण) की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर गुरु वायुपुर्सा मंगल स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

शारीरिक व मानसिक रोगों का शमन, आरोग्य लाभ और भगवान श्री कृष्ण की परम कृपा मिलती है।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार