गुरुवायुरप्पन (श्री कृष्ण) की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक गुरु वायुपुर्सा मंगल स्तुति।
समस्त मंगलों के स्वरूप, जिनकी कृपादृष्टि मंगलों का निवास है, उन गुरुवायुर के स्वामी (वायुगेहेश) और करुणा के सागर भगवान श्रीकृष्ण का सर्वदा मंगल हो।
जिनकी कृपा के एक लेश मात्र से मनुष्य संसार रूपी जन्म-मरण के भयानक रोग से मुक्त हो जाता है, उन गुरुवायुर के बालरूप स्वामी जगदीश्वर की मैं वन्दना करता हूँ।
शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करने वाले, पीताम्बरधारी और गोपियों के मनों को हरने वाले गुरुवायुर के अधीश्वर का मैं भजन करता हूँ।
श्रीमन्नारायणीयम् स्तोत्र में भट्टपाद द्वारा और देवर्षि नारद द्वारा जिनकी स्तुति की गई है, जो वात आदि समस्त असाध्य रोगों के हर्ता हैं, उन सनातन श्रीकृष्ण की मैं वन्दना करता हूँ।
जो विष्णुभक्त तीनों संध्याओं में इस गुरुवायुरेश मंगल स्तोत्र का पाठ करता है, वह पूर्ण आरोग्य, दीर्घायु और अंत में भगवान विष्णु का परम पद प्राप्त करता है।
शारीरिक व मानसिक रोगों का शमन, आरोग्य लाभ और भगवान श्री कृष्ण की परम कृपा मिलती है।
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