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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 माँ षोडशी (श्री विद्या)

षोडशी त्रिपुरा सुंदरी स्तुति

माँ षोडशी (श्री विद्या) की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक षोडशी त्रिपुरा सुंदरी स्तुति।

रचयिता भगवान शिव
स्रोत / ग्रन्थ त्रिपुरा उपनिषद
॥ श्लोक 1 ॥
बालार्ककोटिप्रतिभां त्रिनेत्रां तारावलीरत्नकिरीटधारिणीम्। विद्यामभीष्टवरदां त्रिपुरसुन्दरीं भजे॥
हिंदी भावार्थ:

करोड़ों उदित सूर्यों के समान तेजस्वी, मस्तक पर रत्नों का मुकुट धारण करने वाली, तीनों लोकों की स्वामिनी माँ षोडशी त्रिपुर सुंदरी को मैं भजता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Radiant like millions of rising suns, jewel-crowned, three-eyed granter of boons; I worship Mother Shodashi Tripura Sundari.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में माँ षोडशी (श्री विद्या) की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर षोडशी त्रिपुरा सुंदरी स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

सौंदर्य, आकर्षण, पूर्ण ज्ञान और श्री विद्या की साधना में सर्वोच्च सिद्धि।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार