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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 कांची कामकोटि शंकराचार्य

श्री चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती स्तुति

कांची कामकोटि शंकराचार्य की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक श्री चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती स्तुति।

रचयिता संत शिष्य गण
स्रोत / ग्रन्थ कांची कामकोटि परंपरा
॥ श्लोक 1 ॥
अपारकरुणासिन्धुं ज्ञानदं शान्तरूपिणम् । श्रीचन्द्रशेखरगुरुं प्रणमामि मुदान्वहम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:

अपार करुणा के सागर, ज्ञान प्रदान करने वाले और परम शांत स्वरूप कांची कामकोटि पीठाधिपति जगद्गुरु श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती को मैं प्रतिदिन आनंदपूर्वक प्रणाम करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: An ocean of boundless compassion, bestower of supreme knowledge, embodiment of deep serenity, to Jagadguru Sri Chandrashekharendra Saraswati I bow joyfully every day.
॥ श्लोक 2 ॥
कामकोटिमहापीठालङ्कारं संयमीश्वरम् । धर्मसंरक्षणोद्युक्तं वन्दे लोकैकनायकम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:

कांची कामकोटि महापीठ के अलंकार, यतियों के स्वामी, सनातन धर्म के संरक्षण में तत्पर और संपूर्ण जगत के आध्यात्मिक मार्गदर्शक गुरुदेव की मैं वन्दना करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Adornment of the sacred Kamakoti Pitha, sovereign among ascetics, dedicated to preserving Sanatana Dharma, I revere that solitary guide of humanity.
॥ श्लोक 3 ॥
वेदान्तवाक्यकुशालं शङ्कराचार्यरूपिणम् । नमामि सततं शान्तं काञ्चीपुरनिवासिनम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:

उपनिषदों और वेदांत के मर्मज्ञ, साक्षात आदि शंकराचार्य के अवतार, परम शांत और कांचीपुरम में विराजने वाले महापेरियवा को मैं निरंतर नमन करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Master of Vedanta, living reincarnation of Adi Shankara, ever peaceful, dwelling in the holy city of Kanchipuram, I bow to Him incessantly.
॥ श्लोक 4 ॥
यत्पादरेणुसंस्पर्शात् पापानि प्रलयं ययुः । तं सर्वलोकमङ्गल्यं नौमि देशिकसत्तमम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:

जिनके चरणकमलों की रज के स्पर्श मात्र से घोर पापों का नाश हो जाता है, उन समस्त लोकों के कल्याणकारी सद्गुरु शिरोमणि को मैं प्रणाम करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: By the mere contact of the sacred dust of whose feet all sins are dissolved, to that supreme preceptor of universal auspiciousness I offer my homage.
॥ श्लोक 5 ॥
चन्द्रशेखरेन्द्रगुरुपादुकां शरणं भजे । इह लोके परे वापि शिवत्वं येन लभ्यते ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:

मैं जगद्गुरु चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती की दिव्य पादुकाओं की शरण लेता हूँ, जिसके प्रभाव से इस लोक में शांति और परलोक में परमकल्याण शिवत्व की प्राप्ति होती है।

अंग्रेजी अनुवाद: I take refuge in the divine sandals of Guru Chandrashekharendra, by which one attains peace in this life and the supreme bliss of Shiva in the hereafter.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में कांची कामकोटि शंकराचार्य की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर श्री चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

गुरु कृपा, सद्बुद्धि, सांसारिक भटकाव से मुक्ति और सनातन धर्म संस्कारों का जागरण।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार