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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 महालक्ष्मी श्री

श्री स्तुति

महालक्ष्मी श्री की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक श्री स्तुति।

रचयिता स्वामी वेदांत देशिक
स्रोत / ग्रन्थ श्री वैष्णव संप्रदाय
॥ श्लोक 1 ॥
मान्या मङ्गलदेवता भगवती पद्मा पलाशस्थिता। त्वां वन्दे वरदां श्रियं त्रिभुवनक्षमापयित्रीं पराम्॥
हिंदी भावार्थ:

परम पूज्य, मंगलमयी, कमल पर विराजमान, तीनों लोकों पर कृपा करने वाली माँ श्री महालक्ष्मी को मैं वंदन करता हूँ।

अंग्रेजी अनुवाद: Venerated auspicious Goddess, seated on the sacred lotus, bestower of boons on all three worlds; I bow to Sri.
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पाठ विधि एवं नियम

  • ✦ प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।
  • ✦ पूजा स्थान में महालक्ष्मी श्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • ✦ रोली, अक्षत, सुगंधित पुष्प व नैवेद्य अर्पित कर आचमन करें।
  • ✦ एकाग्र चित्त होकर श्री स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें व अंत में आरती करें।
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चमत्कारी फलश्रुति व लाभ

अष्टलक्ष्मी का स्थायी वास, ऋण मुक्ति और घर में अक्षय धन-समृद्धि।

🗓️ शुभ मुहूर्त व वार: प्रातः काल, प्रदोष काल व संबंधित देवता का पावन वार