माँ तारा की कृपा और समस्त अभीष्ट सिद्धियों की प्राप्ति हेतु प्रामाणिक तारा स्तुति।
प्रणाम करने वाले साधकों को सौभाग्य और ज्ञान-संपत्ति देने वाली, नील सरस्वती, शव के हृदय पर प्रत्यालीढ़ मुद्रा में स्थित, कमल नयनी, त्रिनेत्री माँ तारा की मैं शरण लेता हूँ।
गले में मुंडमाला, हाथ में खड्ग, खप्पर और नीलकमल धारण करने वाली, संसार-सागर में डूबे जीवों का उद्धार करने वाली परम कारुणिक तारिणी माता को मेरा नमन है।
भक्तों के समस्त संकटों को हरने वाली, संसार से तारने वाली, उग्रतारा स्वरूपिणी और परम उदार सुखदायिनी माता को मेरा बारंबार नमन।
वाक्-सिद्धि व परम विद्या प्रदान करने वाली, एकजटा स्वरूपिणी, त्रिनेत्री महामाया तारा महेश्वरी की मैं स्तुति करता हूँ।
हे तारिणी महामाये! इस भवसागर से मेरी रक्षा कीजिए और समस्त शत्रुबाधाओं का शमन कीजिए। हे भगवती तारा! आपको नमन है।
घोर आर्थिक संकट, विपत्ति और अज्ञान का नाश होकर वाक्-सिद्धि व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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