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🔱 मां अन्नपूर्णा (काशी)

अन्नपूर्णा स्तोत्रम

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी... भगवान शिव को भी भिक्षा देने वाली काशी की महारानी मां अन्नपूर्णा का यह स्तोत्र घर में कभी अन्न, धन और वैभव की कमी नहीं होने देता।

रचयिता आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ शंकराचार्य स्तोत्ररत्न
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, अन्नपूर्णा जयंती, पूर्णिमा
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी । निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ॥ प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी । भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१॥
हिंदी भावार्थ: सदा आनंद प्रदान करने वाली, वर और अभय देने वाली, सौंदर्य की सागर, समस्त घोर पापों को धोकर पावन करने वाली, साक्षात माहेश्वरी, हिमालय वंश को पवित्र करने वाली, काशी की स्वामिनी, कृपा की आधार माता अन्नपूर्णा! मुझे भिक्षा प्रदान कीजिए।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः । बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥२॥
हिंदी भावार्थ: माता पार्वती मेरी मां हैं, देवाधिदेव महेश्वर मेरे पिता हैं, समस्त शिवभक्त मेरे बंधु-बांधव हैं और यह तीनों लोक मेरा स्वदेश है।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ घर और रसोई में अन्नपूर्णा की कृपा से अन्न-भंडार सदा भरे रहना
  • ✓ दारिद्र्य और आर्थिक तंगी का स्थायी निवारण
  • ✓ परिवार के सदस्यों में उत्तम स्वास्थ्य, पोषण और आरोग्य
  • ✓ ज्ञान और वैराग्य रूपी मोक्षदायिनी आध्यात्मिक भिक्षा की प्राप्ति
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
पवित्रता व आचमन
प्रातः काल स्नानोपरांत लाल या पीले स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
3
देवी पूजन व अर्पण
माता को लाल पुष्प, कुंकुम, अक्षत, इत्र और नैवेद्य (खीर, बताशा या फल) अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में अक्षत-जल लेकर अपनी मनोकामना का संकल्प करें और निष्ठापूर्वक स्तोत्र का पाठ करें।
5
आरती व क्षमा प्रार्थना
पाठ के अंत में देवी की आरती करें और 'अपराध क्षमापन स्तोत्र' बोलकर क्षमा मांगें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नपूर्णा स्तोत्रम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।