नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी... भगवान शिव को भी भिक्षा देने वाली काशी की महारानी मां अन्नपूर्णा का यह स्तोत्र घर में कभी अन्न, धन और वैभव की कमी नहीं होने देता।
इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:
प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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