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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां आद्याशक्ति जगदम्बा

कमला स्तोत्रम्

कमला स्तोत्रम् सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण में वर्णित यह स्तुति मां आद्याशक्ति जगदम्बा के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता महर्षि मार्कण्डेय / तंत्र शास्त्र
स्रोत / ग्रन्थ श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि
जप माला कमलगट्टा अथवा स्फटिक माला - 1 या 7 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
ॐ कमलााय नमः । नमामि देवं करुणासमूहं भक्ताभिलाषं परिपूरयन्तम् । समस्तदुःखापहमुग्रवीर्यं ध्यायेत्सदा मङ्गलमूर्तिमन्तम् ॥१॥
हिंदी भावार्थ: करुणा के सागर, भक्तों की अभीष्ट मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले, समस्त दुःखों को हरने वाले और अनंत पराक्रमी मंगलमूर्ति मां आद्याशक्ति जगदम्बा को मैं नमन करता हूँ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
यत्पादपद्मस्मरणेन नित्यं नश्यन्ति रोगाश्च भयानि सद्यः । तस्मै सुरेशाय पराय नित्यं नमो नमस्ते जगदीश्वराय ॥२॥
हिंदी भावार्थ: जिनके चरण-कमलों के नित्य स्मरण मात्र से समस्त रोग, व्याधियां और भय तत्काल नष्ट हो जाते हैं, उन देवाधिदेव, परमेश्वर और जगत के स्वामी को मेरा बारंबार नमस्कार है।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
इति श्री कमला स्तोत्रं सम्पूर्णम् । यः पठेत् प्रातरुत्थाय भक्त्या युक्तः समाहितः । सर्वान् कामानवाप्नोति परं निर्वाणमृच्छति ॥३॥
हिंदी भावार्थ: इस प्रकार यह श्री कमला स्तोत्रम् पूर्ण हुआ। जो मनुष्य प्रातः काल उठकर एकाग्र चित्त और अनन्य भक्ति से इसका पाठ करता है, वह समस्त मनोवांछित सुख प्राप्त कर परम गति को प्राप्त होता है।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ मां आद्याशक्ति जगदम्बा की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
मां आद्याशक्ति जगदम्बा का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमला स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।