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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां आद्याशक्ति जगदम्बा

त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र

त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण में वर्णित यह स्तुति मां आद्याशक्ति जगदम्बा के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता महर्षि मार्कण्डेय / तंत्र शास्त्र
स्रोत / ग्रन्थ श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि
जप माला कमलगट्टा अथवा स्फटिक माला - 1 या 7 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
ब्रह्मादयस्स्तुति शतैरपि सूक्ष्मरूपं जानन्तिनैव जगदादिमनादिमूर्तिम् तस्मादमूं कुचनतां नवकुङ्कुमास्यां स्थूलां स्तुवे सकलवाङ्मयमातृभूताम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
सद्यस्समुद्यत सहस्र दिवाकराभां विद्याक्षसूत्रवरदाभयचिह्नहस्तां । नेत्रोत्पलैस्त्रिभिरलङ्कृतवक्त्रपद्मां त्वां तारहाररुचिरां त्रिपुरां भजामः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सिन्दूरपूररुचिरां कुचभारनम्रां जन्मान्तरेषु कृतपुण्य फलैकगम्यां । अन्योन्य भेदकलहाकुलमानभेदै र्जानन्तिकिञ्जडधिय स्तवरूपमन्ये ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
स्थूलां वदन्ति मुनयः श्रुतयो गृणन्ति सूक्ष्मां वदन्ति वचसामधिवासमन्ये । त्वांमूलमाहुरपरे जगताम्भवानि मन्यामहे वयमपारकृपाम्बुराशिम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
चन्द्रावतंस कलितां शरदिन्दुशुभ्रां पञ्चाशदक्षरमयीं हृदिभावयन्ती । त्वां पुस्तकञ्जपपटीममृताढ्य कुम्भां व्याख्याञ्च हस्तकमलैर्दधतीं त्रिनेत्राम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
शम्भुस्त्वमद्रितनया कलितार्धभागो विष्णुस्त्वमम्ब कमलापरिणद्धदेहः । पद्मोद्भवस्त्वमसि वागधिवासभूमि रेषां क्रियाश्च जगति त्रिपुरेत्वमेव ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
आश्रित्यवाग्भव भवाम्श्चतुरः परादीन् भावान्पदात्तु विहितान्समुदारयन्तीं । कालादिभिश्च करणैः परदेवतां त्वां संविन्मयींहृदिकदापि नविस्मरामि ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
आकुञ्च्य वायुमभिजित्यच वैरिषट्कं आलोक्यनिश्चलधिया निजनासिकाग्रां । ध्यायन्ति मूर्ध्नि कलितेन्दुकलावतंसं त्वद्रूपमम्ब कृतिनस्तरुणार्कमित्रम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
त्वं प्राप्यमन्मथरिपोर्वपुरर्धभागं सृष्टिङ्करोषि जगतामिति वेदवादः । सत्यन्तदद्रितनये जगदेकमातः नोचेद शेषजगतः स्थितिरेवनस्यात् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
पूजांविधायकुसुमैः सुरपादपानां पीठेतवाम्ब कनकाचल कन्दरेषु । गायन्तिसिद्धवनितास्सहकिन्नरीभि रास्वादितामृतरसारुणपद्मनेत्राः ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
विद्युद्विलास वपुषः श्रियमावहन्तीं यान्तीमुमांस्वभवनाच्छिवराजधानीं । सौन्दर्यमार्गकमलानिचका सयन्तीं देवीम्भजेत परमामृत सिक्तगात्राम् ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
आनन्दजन्मभवनं भवनं श्रुतीनां चैतन्यमात्र तनुमम्बतवाश्रयामि । ब्रह्मेशविष्णुभिरुपासितपादपद्मं सौभाग्यजन्मवसतिं त्रिपुरेयथावत् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
सर्वार्थभाविभुवनं सृजतीन्दुरूपा यातद्बिभर्ति पुनरर्क तनुस्स्वशक्त्या । ब्रह्मात्मिकाहरतितं सकलम्युगान्ते तां शारदां मनसि जातु न विस्मरामि ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
नारायणीति नरकार्णवतारिणीति गौरीति खेदशमनीति सरस्वतीति । ज्ञानप्रदेति नयनत्रयभूषितेति त्वामद्रिराजतनये विबुधा पदन्ति ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
येस्तुवन्तिजगन्मातः श्लोकैर्द्वादशभिःक्रमात् । त्वामनु पाप्र्यवाक्सिद्धिं प्राप्नुयुस्ते पराम्श्रियम् ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
इतिते कथितं देवि पञ्चाङ्गं भैरवीमयं । गुह्याद्गोप्यतमङ्गोप्यं गोपनीयं स्वयोनिवत् ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति त्रिपुर भैरवी स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ मां आद्याशक्ति जगदम्बा की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
मां आद्याशक्ति जगदम्बा का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुर सुंदरी स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।