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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां आद्याशक्ति जगदम्बा

वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं

वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण में वर्णित यह स्तुति मां आद्याशक्ति जगदम्बा के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता महर्षि मार्कण्डेय / तंत्र शास्त्र
स्रोत / ग्रन्थ श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि
जप माला कमलगट्टा अथवा स्फटिक माला - 1 या 7 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
अमृतोमाधवः कृष्णं श्रीहरिर्ज्ञानपञ्जर ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
श्री वत्सवक्षसर्वेशो गोपालः पुरुषोत्तमः । गोपीश्वरः परञ्ज्योतिर्वैकुण्ठ पतिरव्ययः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सुधातनर्यादवेन्द्रो नित्ययौवनरूपवान् । चतुर्वेदात्मको विष्णु रच्युतः पद्मिनीप्रियः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
धरापतिस्सुरपतिर्निर्मलो देवपूजितः । चतुर्भुज श्चक्रधर स्त्रिधामा त्रिगुणाश्रयः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
निर्विकल्पो निष्कळङ्को निरान्तको निरञ्जनः । निराभासो नित्यतृप्तो निर्गुणोनिरुपद्रवः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
गदाधर शार्ङ्गपाणिर्नन्दकी शङ्खधारकः । अनेकमूर्तिरव्यक्तः कटिहस्तो वरप्रदः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
अनेकात्मा दीनबन्धुरार्तलोकाभयप्रदः । आकाशराजवरदो योगिहृत्पद्म मन्दिरः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
दामोदरो जगत्पालः पापघ्नोभक्तवत्सलः । त्रिविक्रमशिंशुमारो जटामकुटशोभितः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
शङ्खमध्योल्लसन्मञ्जूकिङ्किण्याध्यकरन्दकः । नीलमेघश्यामतनुर्बिल्वपत्रार्चन प्रियः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
जगद्व्यापी जगत्कर्ता जगत्साक्षी जगत्पतिः । चिन्तितार्थप्रदो जिष्णुर्दाशरथे दशरूपवान् ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
देवकीनन्दन शौरि हयग्रीवो जनार्धनः । कन्याश्रवणतारेज्य पीताम्बरोनघः ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
वनमालीपद्मनाभ मृगयासक्त मानसः । अश्वारूढं खड्गधारीधनार्जन समुत्सुकः ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
घनसारसन्मध्यकस्तूरीतिलकोज्ज्वलः । सच्चिदानन्दरूपश्च जगन्मङ्गळदायकः ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
यज्ञरूपो यज्ञभोक्ता चिन्मयः परमेश्वरः । परमार्थप्रद श्शान्तश्श्रीमान् दोर्धण्ड विक्रमः ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
परात्परः परब्रह्मा श्रीविभुर्जगदीश्वरः । एवं श्री वेङ्कटेशस्यनाम्नां अष्टोत्तरं शतम् ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
पठ्यतां शृण्वतां भक्त्या सर्वाभीष्ट प्रदं शुभम् । ॥ इति श्री वेङ्कटेश्वर शतनामावली स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ मां आद्याशक्ति जगदम्बा की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
मां आद्याशक्ति जगदम्बा का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेंकश्वारा अशोत्‍तारा शातानमा स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।