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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ सनातन वैदिक एवं पौराणिक अष्टक महाकोश

दिव्य अष्टकम् संग्रह

सनातन धर्म के संपूर्ण 24 प्रसिद्ध अष्टक स्तोत्र — श्री महालक्ष्मी, कालभैरव, रुद्राष्टकम्, मधुराष्टकम्, सूर्य, शनि, जगन्नाथ, भवानी, सरस्वती, संकटमोचन हनुमानाष्टक व गंगाष्टकम्। शुद्ध संस्कृत श्लोक, सरल हिंदी भावार्थ, पाठ विधि व ग्रह शांति फलश्रुति सहित।

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📖 अष्टकम् तत्त्व, रहस्य एवं साधना मार्गदर्शिका

अष्टक क्या है? उत्पत्ति, छंद संरचना, ग्रह शांति व प्रामाणिक साधना

🕉️ 'अष्टक' शब्द की व्युत्पत्ति एवं परिभाषा

संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'अष्टकम्' शब्द की रचना 'अष्टन्' (जिसका अर्थ संख्या आठ होता है) से हुई है। वैदिक व पौराणिक स्तोत्र साहित्य में किसी आराध्य देव, पराशक्ति अथवा दार्शनिक भाव की वन्दना में रचे गए आठ विशिष्ट श्लोकों (छंदों) के समूह को अष्टकम् कहा जाता है।

अष्टक की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अधिकांश स्तोत्रों में आठ मूल पदों के उपरांत एक ९वाँ श्लोक 'फलश्रुति' के रूप में जोड़ा जाता है। यह फलश्रुति साधक को उस स्तुति के नित्य पाठ से प्राप्त होने वाले आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक फलों का शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत करती है।

🎼 छंद-शास्त्र एवं ३२ पंक्तियों की काव्यात्मक संरचना

पारंपरिक अष्टक सामान्यतः चतुष्पदी (Quatrains - चार-चार पंक्तियों के छंद) के रूप में निबद्ध होते हैं। इस प्रकार आठ श्लोकों में कुल ३२ पंक्तियां बनती हैं। यह संख्या मात्र काव्यात्मक नहीं, बल्कि वैदिक वाक्-शक्ति के ३२ अक्षरों के अनुष्टुप छंद और मानव शरीर की ३२ नाड़ियों की शुद्धि से भी संबंधित मानी जाती है।

अष्टकों में भुजङ्गप्रयात (सर्प की चाल जैसी लय), शिखरिणी (गंभीर व उदात्त भाव), तोटक (द्रुत व चंचल माधुर्य), स्रग्धरा व अनुष्टुप छंदों का सुंदर प्रयोग होता है, जो पाठ करते समय मन में विशेष सकारात्मक तरंगें (Vibrations) उत्पन्न करते हैं।

🔱 देवता एवं परंपरा अनुसार फ़िल्टर:
प्रदर्शित अष्टक: 24 / 24
🔱 महालक्ष्मी 11 श्लोक
रचयिता: देवराज इन्द्र (पद्म पुराण)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

देवराज इन्द्र द्वारा रचित यह अष्टक धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और दरिद्रता निवारण हेतु सनातन परंपरा का सर्वाधिक सिद्ध और फलदायी स्तोत्र है।

शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली पाठ करें →
🔱 कालभैरव 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: स्रग्धरा / भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य द्वारा काशी में रचित यह अष्टक काल, मृत्यु, भय, नकारात्मक शक्तियों और पापों का संहार करने वाला परम शक्तिशाली स्तोत्र है।

रविवार, मंगलवार, कालाष्टमी पाठ करें →
🔱 भगवान शिव (रुद्र) 9 श्लोक
रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास (रामचरितमानस उत्तरकाण्ड)
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अद्वितीय स्तोत्र भगवान शिव की निर्गुण व सगुण महिमा का गायन करता है। इसके पाठ से शिवजी शीघ्र अति प्रसन्न होते हैं।

सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि, सावन पाठ करें →
🔱 श्रीकृष्ण 8 श्लोक
रचयिता: महाप्रभु वल्लभाचार्य
छन्द: तोडक छन्द

महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा रचित यह अद्वितीय भक्ति काव्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग, लीला और चेष्टा के संपूर्ण माधुर्य (मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्) का निरूपण करता है।

बुधवार, जन्माष्टमी, एकादशी पाठ करें →
🔱 भगवान सूर्य देव 9 श्लोक
रचयिता: संब पुराण / शिव प्रोक्त
छन्द: अनुष्टुप छन्द

प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की स्तुति का यह अष्टक आरोग्य, तेज, आत्मबल, नेत्र ज्योति और कुंडली में सूर्य दोष व पितृ दोष की शांति हेतु सिद्ध है।

रविवार, मकर संक्रांति, छठ पर्व पाठ करें →
🔱 सूर्य मण्डल 9 श्लोक
रचयिता: ऋषि परंपरा (भविष्य पुराण)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

सूर्य के दिव्य तेजोमय मण्डल की वन्दना करने वाला यह अष्टक आत्म-साक्षात्कार, कुण्डलिनी जागरण और असाध्य व्याधि मुक्ति हेतु अद्वितीय है।

रविवार, सप्तमी तिथि पाठ करें →
🔱 सद्गुरु देव 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र सांसारिक वैभव, रूप, धन व विद्या की नश्वरता बताते हुए गुरु चरणों में पूर्ण समर्पण ("ततः किं ततः किं") को ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य सिद्ध करता है।

गुरुवार, गुरु पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 भगवान जगन्नाथ (पुरी) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: शिखरिणी छन्द

आदि शंकराचार्य द्वारा श्रीक्षेत्र पुरी धाम में रचित यह अष्टक भगवान जगन्नाथ की प्रत्यक्ष कृपा, नेत्र दृष्टि में प्रभु दर्शन और मोक्ष प्राप्ति की परम प्रार्थना ("जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे") है।

रथयात्रा, पूर्णिमा, गुरुवार पाठ करें →
🔱 भगवान अच्युत (श्रीविष्णु / कृष्ण) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र "अच्युतं केशवं रामनारायणं" जैसे परम पावन नामों का संकीर्तन करते हुए साधक को समस्त भयों से मुक्त कर वैकुण्ठ पद प्रदान करता है।

गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 माता भवानी (दुर्गा) 8 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र अनन्य शरणागति का शिखर है। इसमें साधक संसार के सभी संबंधों को त्यागकर केवल मां भवानी को ही अपनी एकमात्र गति स्वीकार करता है ("गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि")।

शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, नवरात्रि पाठ करें →
🔱 शिवलिंग (भगवान शिव) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

शिवलिंग के दिव्य, अनादि और सर्वपापहारी स्वरूप का गुणगान करने वाला यह अष्टक शिवभक्तों द्वारा जलाभिषेक व रुद्राभिषेक के समय सर्वाधिक गाया जाने वाला स्तोत्र है।

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान शिव व बिल्व पत्र 9 श्लोक
रचयिता: शिव पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

शिवलिंग पर त्रिनेत्र स्वरूप तीन पत्तियों वाले एक अखण्ड बेलपत्र को अर्पित करने का महात्म्य बताने वाला यह अष्टक तीन जन्मों के पापों का शमन करता है ("एकबिल्वं शिवार्पणम्")।

सोमवार, महाशिवरात्रि, सावन मास पाठ करें →
🔱 माँ सरस्वती 9 श्लोक
रचयिता: पद्म पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

विद्या, बुद्धि, स्मरण शक्ति और वाक-सिद्धि की अधिष्ठात्री भगवती शारदा की स्तुति का यह अष्टक विद्यार्थियों और ज्ञान साधकों के लिए वरदान स्वरूप है।

बसंत पंचमी, गुरुवार, बुधवार पाठ करें →
🔱 भगवान शनि देव 9 श्लोक
रचयिता: महाराज दशरथ (पद्म पुराण)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

अयोध्या नरेश महाराज दशरथ द्वारा रचित यह अष्टक शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा और मारक दृष्टि के निवारण का अचूक और शास्त्रीय स्तोत्र है।

शनिवार, शनि जयंती, अमावस्या पाठ करें →
🔱 श्री हनुमान जी 9 श्लोक
रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास
छन्द: मत्तगयन्द सवैया छन्द

गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अष्टक जीवन के असाध्य संकटों, रोगों और बाधाओं को हरने वाला जन-जन का सर्वाधिक प्रिय और सिद्ध हनुमत् स्तोत्र है ("को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो")।

मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती पाठ करें →
🔱 भगवान श्रीकृष्ण 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: अनुष्टुप छन्द

आदि शंकराचार्य कृत यह अष्टक "वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्... कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्" के जयघोष से भगवान श्रीकृष्ण को संपूर्ण जगत का गुरु मानकर वन्दना करता है।

बुधवार, जन्माष्टमी, एकादशी पाठ करें →
🔱 माता अन्नपूर्णा (काशी) 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: स्रग्धरा छन्द

काशी की स्वामिनी माता अन्नपूर्णा से अन्न, ज्ञान और वैराग्य की भिक्षा मांगने वाली आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होने देता ("भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी")।

शुक्रवार, अन्नपूर्णा जयंती, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 माँ गङ्गा 9 श्लोक
रचयिता: जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
छन्द: शिखरिणी छन्द

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह अष्टक पतितपावनी मां गंगा की निर्मल जलधारा की महिमा गाते हुए जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करता है।

गंगा दशहरा, पूर्णिमा, मकर संक्रांति पाठ करें →
🔱 भगवान श्री गणेश 9 श्लोक
रचयिता: गणेश पुराण
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

विघ्नहर्ता भगवान गणेश के निर्गुण-सगुण, ब्रह्माण्ड-व्यापक स्वरूप की स्तुति करने वाला यह अष्टक समस्त नए कार्यों, व्यापार और मांगलिक अनुष्ठानों की निर्विघ्न सिद्धि प्रदान करता है।

बुधवार, गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी पाठ करें →
🔱 भगवती तारा (द्वितीय महाविद्या) 9 श्लोक
रचयिता: तन्त्र शास्त्र (बृहन्नील तन्त्र)
छन्द: अनुष्टुप छन्द

दस महाविद्याओं में द्वितीय शक्ति मां तारा की स्तुति का यह अष्टक साधक को जीवन के भयानक संकटों, घोर दरिद्रता, वाक-जड़ता और भवसागर से तारने (उद्धार करने) वाला परम सिद्ध स्तोत्र है।

नवमी, अष्टमी, शुक्रवार, तारा रात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान शिव 9 श्लोक
रचयिता: पद्म पुराण
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

सृष्टि के परम कारण, अनादि, सच्चिदानंद स्वरूप देवाधिदेव महादेव की स्तुति का यह अष्टक जीवन के समस्त क्लेशों और भवरोग का समूल निवारण करता है।

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि पाठ करें →
🔱 भगवान दत्तात्रेय (गुरुदेव) 9 श्लोक
रचयिता: महर्षि परंपरा / पद्म पुराण
छन्द: अनुष्टुप छन्द

ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार परम अवधूत भगवान दत्तात्रेय की स्तुति का यह अष्टक साधक को समस्त गुरु-दोषों, पितृ-दोषों और मानसिक विकारों से मुक्त कर आत्मज्ञान प्रदान करता है।

गुरुवार, दत्तात्रेय जयंती, पूर्णिमा पाठ करें →
🔱 श्री राधा रानी 9 श्लोक
रचयिता: रूप गोस्वामी / पद्म पुराण
छन्द: शिखरिणी छन्द

वृन्दावन की महारानी और भगवान श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति श्रीराधारानी की स्तुति का यह अष्टक साधक के हृदय में विशुद्ध प्रेमभक्ति और युगल-चरणों की सेवा प्रदान करता है।

राधाष्टमी, पूर्णिमा, शुक्रवार पाठ करें →
🔱 भगवान चन्द्रशेखर (शिव) 9 श्लोक
रचयिता: ऋषि मार्कण्डेय
छन्द: भुजङ्गप्रयात छन्द

अल्पायु मार्कण्डेय ऋषि द्वारा मृत्यु के देवता यमराज से अपनी रक्षा हेतु रचा गया यह अष्टक मृत्यु, काल और असाध्य भय का संहार कर दीर्घायु और शिवलोक प्रदान करता है ("चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहि माम्")।

सोमवार, त्रयोदशी (प्रदोष), महाशिवरात्रि पाठ करें →
FAQ

अष्टकम् से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी (FAQ)