सनातन धर्म के संपूर्ण 24 प्रसिद्ध अष्टक स्तोत्र — श्री महालक्ष्मी, कालभैरव, रुद्राष्टकम्, मधुराष्टकम्, सूर्य, शनि, जगन्नाथ, भवानी, सरस्वती, संकटमोचन हनुमानाष्टक व गंगाष्टकम्। शुद्ध संस्कृत श्लोक, सरल हिंदी भावार्थ, पाठ विधि व ग्रह शांति फलश्रुति सहित।
संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'अष्टकम्' शब्द की रचना 'अष्टन्' (जिसका अर्थ संख्या आठ होता है) से हुई है। वैदिक व पौराणिक स्तोत्र साहित्य में किसी आराध्य देव, पराशक्ति अथवा दार्शनिक भाव की वन्दना में रचे गए आठ विशिष्ट श्लोकों (छंदों) के समूह को अष्टकम् कहा जाता है।
अष्टक की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अधिकांश स्तोत्रों में आठ मूल पदों के उपरांत एक ९वाँ श्लोक 'फलश्रुति' के रूप में जोड़ा जाता है। यह फलश्रुति साधक को उस स्तुति के नित्य पाठ से प्राप्त होने वाले आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक फलों का शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत करती है।
पारंपरिक अष्टक सामान्यतः चतुष्पदी (Quatrains - चार-चार पंक्तियों के छंद) के रूप में निबद्ध होते हैं। इस प्रकार आठ श्लोकों में कुल ३२ पंक्तियां बनती हैं। यह संख्या मात्र काव्यात्मक नहीं, बल्कि वैदिक वाक्-शक्ति के ३२ अक्षरों के अनुष्टुप छंद और मानव शरीर की ३२ नाड़ियों की शुद्धि से भी संबंधित मानी जाती है।
अष्टकों में भुजङ्गप्रयात (सर्प की चाल जैसी लय), शिखरिणी (गंभीर व उदात्त भाव), तोटक (द्रुत व चंचल माधुर्य), स्रग्धरा व अनुष्टुप छंदों का सुंदर प्रयोग होता है, जो पाठ करते समय मन में विशेष सकारात्मक तरंगें (Vibrations) उत्पन्न करते हैं।
Shri Mahalakshmi Ashtakam
देवराज इन्द्र द्वारा रचित यह अष्टक धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और दरिद्रता निवारण हेतु सनातन परंपरा का सर्वाधिक सिद्ध और फलदायी स्तोत्र है।
Kalabhairava Ashtakam
आदि शंकराचार्य द्वारा काशी में रचित यह अष्टक काल, मृत्यु, भय, नकारात्मक शक्तियों और पापों का संहार करने वाला परम शक्तिशाली स्तोत्र है।
Shri Rudrashtakam
गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अद्वितीय स्तोत्र भगवान शिव की निर्गुण व सगुण महिमा का गायन करता है। इसके पाठ से शिवजी शीघ्र अति प्रसन्न होते हैं।
Madhurashtakam
महाप्रभु वल्लभाचार्य द्वारा रचित यह अद्वितीय भक्ति काव्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग, लीला और चेष्टा के संपूर्ण माधुर्य (मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्) का निरूपण करता है।
Surya Ashtakam
प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की स्तुति का यह अष्टक आरोग्य, तेज, आत्मबल, नेत्र ज्योति और कुंडली में सूर्य दोष व पितृ दोष की शांति हेतु सिद्ध है।
Suryamandala Ashtakam
सूर्य के दिव्य तेजोमय मण्डल की वन्दना करने वाला यह अष्टक आत्म-साक्षात्कार, कुण्डलिनी जागरण और असाध्य व्याधि मुक्ति हेतु अद्वितीय है।
Guru Ashtakam
आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र सांसारिक वैभव, रूप, धन व विद्या की नश्वरता बताते हुए गुरु चरणों में पूर्ण समर्पण ("ततः किं ततः किं") को ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य सिद्ध करता है।
Shri Jagannatha Ashtakam
आदि शंकराचार्य द्वारा श्रीक्षेत्र पुरी धाम में रचित यह अष्टक भगवान जगन्नाथ की प्रत्यक्ष कृपा, नेत्र दृष्टि में प्रभु दर्शन और मोक्ष प्राप्ति की परम प्रार्थना ("जगन्नाथः स्वामी नयनपथगामी भवतु मे") है।
Achyutashtakam
आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र "अच्युतं केशवं रामनारायणं" जैसे परम पावन नामों का संकीर्तन करते हुए साधक को समस्त भयों से मुक्त कर वैकुण्ठ पद प्रदान करता है।
Bhavani Ashtakam
आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र अनन्य शरणागति का शिखर है। इसमें साधक संसार के सभी संबंधों को त्यागकर केवल मां भवानी को ही अपनी एकमात्र गति स्वीकार करता है ("गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि")।
Lingashtakam
शिवलिंग के दिव्य, अनादि और सर्वपापहारी स्वरूप का गुणगान करने वाला यह अष्टक शिवभक्तों द्वारा जलाभिषेक व रुद्राभिषेक के समय सर्वाधिक गाया जाने वाला स्तोत्र है।
Bilvashtakam
शिवलिंग पर त्रिनेत्र स्वरूप तीन पत्तियों वाले एक अखण्ड बेलपत्र को अर्पित करने का महात्म्य बताने वाला यह अष्टक तीन जन्मों के पापों का शमन करता है ("एकबिल्वं शिवार्पणम्")।
Saraswati Ashtakam
विद्या, बुद्धि, स्मरण शक्ति और वाक-सिद्धि की अधिष्ठात्री भगवती शारदा की स्तुति का यह अष्टक विद्यार्थियों और ज्ञान साधकों के लिए वरदान स्वरूप है।
Shani Ashtakam (Dasharatha Krita)
अयोध्या नरेश महाराज दशरथ द्वारा रचित यह अष्टक शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा और मारक दृष्टि के निवारण का अचूक और शास्त्रीय स्तोत्र है।
Sankat Mochan Hanuman Ashtakam
गोस्वामी तुलसीदास कृत यह अष्टक जीवन के असाध्य संकटों, रोगों और बाधाओं को हरने वाला जन-जन का सर्वाधिक प्रिय और सिद्ध हनुमत् स्तोत्र है ("को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो")।
Shri Krishnashtakam
आदि शंकराचार्य कृत यह अष्टक "वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्... कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्" के जयघोष से भगवान श्रीकृष्ण को संपूर्ण जगत का गुरु मानकर वन्दना करता है।
Annapurna Ashtakam
काशी की स्वामिनी माता अन्नपूर्णा से अन्न, ज्ञान और वैराग्य की भिक्षा मांगने वाली आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होने देता ("भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी")।
Ganga Ashtakam
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह अष्टक पतितपावनी मां गंगा की निर्मल जलधारा की महिमा गाते हुए जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष प्रदान करता है।
Ganesha Ashtakam
विघ्नहर्ता भगवान गणेश के निर्गुण-सगुण, ब्रह्माण्ड-व्यापक स्वरूप की स्तुति करने वाला यह अष्टक समस्त नए कार्यों, व्यापार और मांगलिक अनुष्ठानों की निर्विघ्न सिद्धि प्रदान करता है।
Tara Ashtakam
दस महाविद्याओं में द्वितीय शक्ति मां तारा की स्तुति का यह अष्टक साधक को जीवन के भयानक संकटों, घोर दरिद्रता, वाक-जड़ता और भवसागर से तारने (उद्धार करने) वाला परम सिद्ध स्तोत्र है।
Shiva Ashtakam
सृष्टि के परम कारण, अनादि, सच्चिदानंद स्वरूप देवाधिदेव महादेव की स्तुति का यह अष्टक जीवन के समस्त क्लेशों और भवरोग का समूल निवारण करता है।
Dattatreya Ashtakam
ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार परम अवधूत भगवान दत्तात्रेय की स्तुति का यह अष्टक साधक को समस्त गुरु-दोषों, पितृ-दोषों और मानसिक विकारों से मुक्त कर आत्मज्ञान प्रदान करता है।
Radha Ashtakam
वृन्दावन की महारानी और भगवान श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति श्रीराधारानी की स्तुति का यह अष्टक साधक के हृदय में विशुद्ध प्रेमभक्ति और युगल-चरणों की सेवा प्रदान करता है।
Chandrashekhara Ashtakam
अल्पायु मार्कण्डेय ऋषि द्वारा मृत्यु के देवता यमराज से अपनी रक्षा हेतु रचा गया यह अष्टक मृत्यु, काल और असाध्य भय का संहार कर दीर्घायु और शिवलोक प्रदान करता है ("चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहि माम्")।
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