BHAKTI KI SHAKTI
🦚 कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी ⏳ In 6 Days Vedic Sanatan Guide

Ahoi Ashtami Vrat

अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुखी जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की समस्त विपत्तियों से रक्षा के लिए रखती हैं। जो महिलाएं निःसंतान हैं, वे संतान प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष व्रत और मथुरा के राधा कुंड में पवित्र स्नान करती हैं। करवा चौथ की तरह यह भी निर्जला व्रत होता है, जिसमें चंद्रमा के स्थान पर सायंकाल आकाश में तारों को देखकर अर्घ्य दिया जाता है।

🕉️ Principal Deity: माता अहोई (अहोई भगवती), सेई (साही) व उसके बच्चे, शिव-पार्वती
Festival Date (2026) 02 Nov 2026 • Monday View Day Panchang
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Auspicious Muhurat & Timings for 2026

Calculated as per Vedic Surya Siddhanta and Lahiri Ayanamsha

Main Puja Muhurat

शाम 05:35 से शाम 06:53 तक (अवधि: 1 घंटा 18 मिनट)

Most Auspicious Window
Moonrise Time (चंद्रोदय)

रात 11:42 बजे (अष्टमी तिथि का चंद्रोदय)

Check your city moonrise
Tithi Transition Timing

तिथि विवरण: 02 नवंबर 2026, प्रातः 04:35 बजे से • समाप्ति: 03 नवंबर 2026, प्रातः 02:40 बजे तक

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Step-by-Step Schedule & Ritual Timeline (Hour by Hour)

Detailed sequence from morning to night for rituals, puja, and lighting lamps

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स्नान व निर्जला संकल्प

प्रातः 05:00 - 06:00 AM

सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर संतान की दीर्घायु का संकल्प लें और दिनभर निर्जला उपवास रखें।

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अहोई माता का चित्रांकन

दोपहर 01:00 - 03:00 PM

दीवार पर गेरू या पीले रंग से अहोई माता, सात पुत्र व साही का चित्र बनाएं अथवा कैलेंडर लगाएं। चांदी के स्याऊ की माला तैयार करें।

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शुभ मुहूर्त में अहोई माता पूजन

शाम 05:35 - 06:53 PM

माता के सम्मुख जल से भरा करक (लोटा) रखें। रोली, अक्षत, दूध, सिंघाड़ा, बेर व हलवा-पूरी अर्पित करें। अहोई माता की कथा सुनें।

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तारों का दर्शन व अर्घ्य

शाम 06:02 PM के बाद

आकाश में तारों के उदित होने पर तांबे के लोटे से तारों को अर्घ्य दें। संतान की रक्षा की प्रार्थना करें।

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सास का आशीर्वाद व पारण

शाम 06:45 PM

पूजा में रखा हुआ बायना (मिठाई, फल व दक्षिणा) सास या बुजुर्ग महिला को भेंट करें और उनके चरण छूकर व्रत का पारण करें।

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Why is this Festival Celebrated?

अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुखी जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की समस्त विपत्तियों से रक्षा के लिए रखती हैं। जो महिलाएं निःसंतान हैं, वे संतान प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष व्रत और मथुरा के राधा कुंड में पवित्र स्नान करती हैं। करवा चौथ की तरह यह भी निर्जला व्रत होता है, जिसमें चंद्रमा के स्थान पर सायंकाल आकाश में तारों को देखकर अर्घ्य दिया जाता है।

Significance rooted in Sanatan Dharma
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Pauranik Beliefs & Cultural Traditions

दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र और उनके सात पुत्रों व साही (सेई) की आकृति बनाई जाती है। माताएं चांदी की अहोई (स्याऊ) बनवाकर माला में पिरोती हैं और पूजा के समय धारण करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान पर आने वाले बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।

Preserved through millennia of tradition
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Complete Sacred Mythological Story (Vrat Katha)

Authentic narration from Sacred Puranas and Epics

कथा के अनुसार, एक नगर में साहूकार रहता था जिसके सात बेटे थे। दीवाली से पूर्व साहूकार की पत्नी घर लीपने के लिए जंगल में खुरपी से मिट्टी खोदने गई। दुर्भाग्यवश उसकी खुरपी से साही (सेई) के एक बच्चे की मृत्यु हो गई। साही ने क्रोधित होकर साहूकार की पत्नी को श्राप दिया कि जिस प्रकार तुमने मेरी कोख उजाड़ी है, उसी प्रकार तुम्हारी कोख भी सूनी होगी।

परिणामस्वरूप साहूकार के सातों पुत्र एक वर्ष के भीतर काल के गाल में समा गए। साहूकारनी विलाप करने लगी। एक वृद्ध संत ने उसे कार्तिक कृष्ण अष्टमी को माता अहोई और साही की विधिवत पूजा करने और पश्चाताप का व्रत रखने का उपाय बताया। साहूकारनी ने निष्ठापूर्वक निर्जला व्रत रखकर अहोई माता की आराधना की। माता अहोई ने प्रसन्न होकर उसके सातों पुत्रों को पुनर्जीवित कर दिया।

📖 Reciting or listening to this Katha during puja yields multifold blessings.
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How and Where is it Celebrated? (India & Worldwide)

Regional customs across Indian states and global celebrations by Indian diaspora

🇮🇳 Across Indian States & Regions

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और बिहार में प्रमुखता से मनाया जाता है। मथुरा स्थित गोवर्धन के राधा कुंड में अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि को लाखों निसंतान दंपती संतान प्राप्ति हेतु दिव्य स्नान करते हैं।

🌐 Celebrations Across the Globe (NRI & Diaspora)

नेपाल, मॉरीशस, यूके और अमेरिका में रहने वाली प्रवासी भारतीय माताएं संतान कल्याण हेतु यह व्रत श्रद्धा से रखती हैं।

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Puja Samagri Checklist

Tick off items as you prepare for the ritual

7 Items
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Sacred Mantras & Invocations

अहोई माता ध्यान मंत्र: "ॐ अहोई देव्यै नमः॥"
संतान रक्षा मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥"
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Rules: Dos and Don'ts

What to Do (अवश्य करें)
  • ✓ तारों को देखकर ही अर्घ्य दें
  • ✓ संतान को अपने हाथ से प्रसाद खिलाएं
  • ✓ सात्विक विचार रखें
What to Avoid (कदापि न करें)
  • ✗ इस दिन मिट्टी खोदने, सुई-धागा चलाने या धारदार वस्तु के उपयोग से बचें
  • ✗ तांबे के पात्र से अर्घ्य देने के बजाय पीतल या स्टील का उपयोग प्राथमिकता से करें
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Upcoming Dates for Ahoi Ashtami Vrat (2026–2030)

Accurate advance calendar for devotees, families and diaspora planning

Year Date Day Tithi Action
2026 02 November 2026 Monday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी Panchang
2027 22 October 2027 Friday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी Panchang
2028 10 October 2028 Tuesday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी Panchang
2029 30 October 2029 Tuesday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी Panchang
2030 19 October 2030 Saturday कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी Panchang

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