Ahoi Ashtami Vrat
अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुखी जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की समस्त विपत्तियों से रक्षा के लिए रखती हैं। जो महिलाएं निःसंतान हैं, वे संतान प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष व्रत और मथुरा के राधा कुंड में पवित्र स्नान करती हैं। करवा चौथ की तरह यह भी निर्जला व्रत होता है, जिसमें चंद्रमा के स्थान पर सायंकाल आकाश में तारों को देखकर अर्घ्य दिया जाता है।
Auspicious Muhurat & Timings for 2026
Calculated as per Vedic Surya Siddhanta and Lahiri Ayanamsha
शाम 05:35 से शाम 06:53 तक (अवधि: 1 घंटा 18 मिनट)
Most Auspicious Windowतिथि विवरण: 02 नवंबर 2026, प्रातः 04:35 बजे से • समाप्ति: 03 नवंबर 2026, प्रातः 02:40 बजे तक
Step-by-Step Schedule & Ritual Timeline (Hour by Hour)
Detailed sequence from morning to night for rituals, puja, and lighting lamps
स्नान व निर्जला संकल्प
प्रातः 05:00 - 06:00 AMसूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर संतान की दीर्घायु का संकल्प लें और दिनभर निर्जला उपवास रखें।
अहोई माता का चित्रांकन
दोपहर 01:00 - 03:00 PMदीवार पर गेरू या पीले रंग से अहोई माता, सात पुत्र व साही का चित्र बनाएं अथवा कैलेंडर लगाएं। चांदी के स्याऊ की माला तैयार करें।
शुभ मुहूर्त में अहोई माता पूजन
शाम 05:35 - 06:53 PMमाता के सम्मुख जल से भरा करक (लोटा) रखें। रोली, अक्षत, दूध, सिंघाड़ा, बेर व हलवा-पूरी अर्पित करें। अहोई माता की कथा सुनें।
तारों का दर्शन व अर्घ्य
शाम 06:02 PM के बादआकाश में तारों के उदित होने पर तांबे के लोटे से तारों को अर्घ्य दें। संतान की रक्षा की प्रार्थना करें।
सास का आशीर्वाद व पारण
शाम 06:45 PMपूजा में रखा हुआ बायना (मिठाई, फल व दक्षिणा) सास या बुजुर्ग महिला को भेंट करें और उनके चरण छूकर व्रत का पारण करें।
Why is this Festival Celebrated?
अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुखी जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की समस्त विपत्तियों से रक्षा के लिए रखती हैं। जो महिलाएं निःसंतान हैं, वे संतान प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष व्रत और मथुरा के राधा कुंड में पवित्र स्नान करती हैं। करवा चौथ की तरह यह भी निर्जला व्रत होता है, जिसमें चंद्रमा के स्थान पर सायंकाल आकाश में तारों को देखकर अर्घ्य दिया जाता है।
Pauranik Beliefs & Cultural Traditions
दीवार पर गेरू से अहोई माता का चित्र और उनके सात पुत्रों व साही (सेई) की आकृति बनाई जाती है। माताएं चांदी की अहोई (स्याऊ) बनवाकर माला में पिरोती हैं और पूजा के समय धारण करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान पर आने वाले बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।
Complete Sacred Mythological Story (Vrat Katha)
Authentic narration from Sacred Puranas and Epics
कथा के अनुसार, एक नगर में साहूकार रहता था जिसके सात बेटे थे। दीवाली से पूर्व साहूकार की पत्नी घर लीपने के लिए जंगल में खुरपी से मिट्टी खोदने गई। दुर्भाग्यवश उसकी खुरपी से साही (सेई) के एक बच्चे की मृत्यु हो गई। साही ने क्रोधित होकर साहूकार की पत्नी को श्राप दिया कि जिस प्रकार तुमने मेरी कोख उजाड़ी है, उसी प्रकार तुम्हारी कोख भी सूनी होगी।
परिणामस्वरूप साहूकार के सातों पुत्र एक वर्ष के भीतर काल के गाल में समा गए। साहूकारनी विलाप करने लगी। एक वृद्ध संत ने उसे कार्तिक कृष्ण अष्टमी को माता अहोई और साही की विधिवत पूजा करने और पश्चाताप का व्रत रखने का उपाय बताया। साहूकारनी ने निष्ठापूर्वक निर्जला व्रत रखकर अहोई माता की आराधना की। माता अहोई ने प्रसन्न होकर उसके सातों पुत्रों को पुनर्जीवित कर दिया।
How and Where is it Celebrated? (India & Worldwide)
Regional customs across Indian states and global celebrations by Indian diaspora
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और बिहार में प्रमुखता से मनाया जाता है। मथुरा स्थित गोवर्धन के राधा कुंड में अहोई अष्टमी की अर्धरात्रि को लाखों निसंतान दंपती संतान प्राप्ति हेतु दिव्य स्नान करते हैं।
नेपाल, मॉरीशस, यूके और अमेरिका में रहने वाली प्रवासी भारतीय माताएं संतान कल्याण हेतु यह व्रत श्रद्धा से रखती हैं।
Puja Samagri Checklist
Tick off items as you prepare for the ritual
Sacred Mantras & Invocations
Rules: Dos and Don'ts
- ✓ तारों को देखकर ही अर्घ्य दें
- ✓ संतान को अपने हाथ से प्रसाद खिलाएं
- ✓ सात्विक विचार रखें
- ✗ इस दिन मिट्टी खोदने, सुई-धागा चलाने या धारदार वस्तु के उपयोग से बचें
- ✗ तांबे के पात्र से अर्घ्य देने के बजाय पीतल या स्टील का उपयोग प्राथमिकता से करें
Upcoming Dates for Ahoi Ashtami Vrat (2026–2030)
Accurate advance calendar for devotees, families and diaspora planning
| Year | Date | Day | Tithi | Action |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 02 November 2026 | Monday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी | Panchang |
| 2027 | 22 October 2027 | Friday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी | Panchang |
| 2028 | 10 October 2028 | Tuesday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी | Panchang |
| 2029 | 30 October 2029 | Tuesday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी | Panchang |
| 2030 | 19 October 2030 | Saturday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष अष्टमी | Panchang |
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