BHAKTI KI SHAKTI
☀️ कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष चतुर्थी से सप्तमी (4 दिवसीय) ⏳ In 19 Days Vedic Sanatan Guide

Chhath Puja Mahaparv (Surya Shashthi)

छठ महापर्व प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य और उनकी बहन षष्ठी माता (छठी मईया) की उपासना का सबसे कठिन और पवित्रतम अनुष्ठान है। यह चार दिनों तक चलने वाला लोक महापर्व है, जिसमें व्रती लगातार 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखते हैं। यह पर्व संतान की लंबी आयु, परिवार की समृद्धि, निरोगी काया और आत्मिक शुद्धि के लिए किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अस्त होते हुए सूर्य को भी प्रथम अर्घ्य और उदित होते सूर्य को द्वितीय अर्घ्य दिया जाता है।

🕉️ Principal Deity: भगवान सूर्य देव, षष्ठी माता (छठी मईया)
Festival Date (2026) 15 Nov 2026 • Sunday View Day Panchang
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Auspicious Muhurat & Timings for 2026

Calculated as per Vedic Surya Siddhanta and Lahiri Ayanamsha

Tithi Transition Timing

तिथि विवरण: 13 नवंबर (नहाय-खाय) से 16 नवंबर 2026 (उषा अर्घ्य)

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Step-by-Step Schedule & Ritual Timeline (Hour by Hour)

Detailed sequence from morning to night for rituals, puja, and lighting lamps

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आत्मिक शुद्धि व कद्दू-भात

दिन 1 (13 Nov): नहाय-खाय

पवित्र नदी या गंगाजल मिश्रित जल से स्नान। अरवा चावल, चने की दाल और लौकी (कद्दू) का सात्विक भोजन सेंधा नमक में पकाया जाता है।

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गुड़ की खीर व 36 घंटे निर्जला व्रत

दिन 2 (14 Nov): खरना

पूरे दिन उपवास। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़ की खीर व रोटी का प्रसाद बनता है। छठी मईया को भोग लगाकर व्रती ग्रहण करते हैं, जिसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत प्रारंभ होता है।

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डूबते सूर्य को प्रथम अर्घ्य

दिन 3 (15 Nov): संध्या अर्घ्य

बांस के सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना सजाकर घाट पर ले जाया जाता है। व्रती कमर तक पानी में उतरकर अस्ताचलगामी सूर्य को दूध व जल से अर्घ्य देते हैं।

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उगते सूर्य को अर्घ्य व व्रत संपन्न

दिन 4 (16 Nov): उषा अर्घ्य व पारण

सूर्योदय से पूर्व घाट पर पहुंचकर जल में खड़े होते हैं। भगवान भास्कर के उदित होते ही दूसरा अर्घ्य अर्पित कर संतान व कुल की मंगलकामना की जाती है। तत्पश्चात अदरक व पानी पीकर पारण किया जाता है।

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Why is this Festival Celebrated?

छठ महापर्व प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य और उनकी बहन षष्ठी माता (छठी मईया) की उपासना का सबसे कठिन और पवित्रतम अनुष्ठान है। यह चार दिनों तक चलने वाला लोक महापर्व है, जिसमें व्रती लगातार 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखते हैं। यह पर्व संतान की लंबी आयु, परिवार की समृद्धि, निरोगी काया और आत्मिक शुद्धि के लिए किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अस्त होते हुए सूर्य को भी प्रथम अर्घ्य और उदित होते सूर्य को द्वितीय अर्घ्य दिया जाता है।

Significance rooted in Sanatan Dharma
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Pauranik Beliefs & Cultural Traditions

छठ पूजा में किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि प्रत्यक्ष जीवनदाता सूर्य और प्रकृति की आराधना होती है। बांस के सूप और दौरा में घर का बना ठेकुआ, गन्ना, डाभ नींबू, हल्दी का पौधा और फल रखकर नदी या तालाब के घुटने भर जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। जाति-भेद से परे यह सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा प्रतीक है।

Preserved through millennia of tradition
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Complete Sacred Mythological Story (Vrat Katha)

Authentic narration from Sacred Puranas and Epics

प्रथम कथा: महाभारत काल में अंगराज कर्ण, जो सूर्य पुत्र थे, प्रतिदिन कमर तक जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। उसी तप से वे अजेय बने। द्रौपदी ने भी पांडवों के खोए हुए राज-पाट और विजय हेतु धौम्य ऋषि के परामर्श पर छठ का कठिन व्रत किया था।

द्वितीय कथा: राजा प्रियंवद और उनकी पत्नी मालिनी के कोई संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, किंतु रानी ने मृत पुत्र को जन्म दिया। राजा शोक में अपने प्राण त्यागने लगे, तभी आकाश से ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना (षष्ठी देवी) प्रकट हुईं। उन्होंने कहा, "मैं सृष्टि की मूल प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं, इसलिए मेरा नाम षष्ठी है। तुम मेरी पूजा करो और अन्य लोगों से भी कराओ।" राजा ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को व्रत कर पूजा की और उन्हें यशस्वी पुत्र रत्न प्राप्त हुआ।

📖 Reciting or listening to this Katha during puja yields multifold blessings.
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How and Where is it Celebrated? (India & Worldwide)

Regional customs across Indian states and global celebrations by Indian diaspora

🇮🇳 Across Indian States & Regions

बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल), दिल्ली, मुंबई, कोलकाता के गंगा घाटों, सरोवरों और तालाबों पर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।

🌐 Celebrations Across the Globe (NRI & Diaspora)

नेपाल (तराई क्षेत्र में राष्ट्रीय पर्व), मॉरीशस, त्रिनिदाद, फिजी, यूके, अमेरिका के कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी और कनाडा की झीलों व नदियों पर भारतीय प्रवासी भव्य छठ मनाते हैं।

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Puja Samagri Checklist

Tick off items as you prepare for the ritual

6 Items
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Sacred Mantras & Invocations

सूर्य अर्घ्य मंत्र: "ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकरः॥"
छठी मईया स्तुति: "ॐ षष्ठी देव्यै नमः॥"
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Rules: Dos and Don'ts

What to Do (अवश्य करें)
  • ✓ प्रसाद बनाते समय अत्यंत पवित्रता और स्वच्छता रखें
  • ✓ मिट्टी के नए चूल्हे पर ही प्रसाद पकाएं
  • ✓ व्रती फर्श पर चटाई बिछाकर सोएं
What to Avoid (कदापि न करें)
  • ✗ प्रसाद में लहसुन, प्याज या मांसाहार का लेशमात्र भी स्पर्श न हो
  • ✗ पूजा सामग्री को जूठे हाथों से न छुएं
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Upcoming Dates for Chhath Puja Mahaparv (Surya Shashthi) (2026–2030)

Accurate advance calendar for devotees, families and diaspora planning

Year Date Day Tithi Action
2026 15 November 2026 Sunday कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष चतुर्थी से सप्तमी (4 दिवसीय) Panchang
2027 04 November 2027 Thursday कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष चतुर्थी से सप्तमी (4 दिवसीय) Panchang
2028 23 October 2028 Monday कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष चतुर्थी से सप्तमी (4 दिवसीय) Panchang
2029 11 November 2029 Sunday कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष चतुर्थी से सप्तमी (4 दिवसीय) Panchang
2030 01 November 2030 Friday कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष चतुर्थी से सप्तमी (4 दिवसीय) Panchang

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