Rama Ekadashi Vrat
दीपावली से ठीक 3 दिन पूर्व आने वाली रमा एकादशी समस्त पापों का नाश करने और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा दिलाने वाली परम पावन एकादशी है। मां लक्ष्मी का एक नाम "रमा" है, इसलिए इस एकादशी के प्रभाव से साधक को कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता। ब्रह्म हत्या जैसे महापाप भी इस व्रत के प्रभाव से क्षीण हो जाते हैं और साधक को वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
Auspicious Muhurat & Timings for 2026
Calculated as per Vedic Surya Siddhanta and Lahiri Ayanamsha
प्रातः 06:40 से 08:05 तक | शाम 05:35 से 07:00 तक
Most Auspicious Windowतिथि विवरण: 05 नवंबर 2026, प्रातः 06:12 बजे से • समाप्ति: 06 नवंबर 2026, प्रातः 04:12 बजे तक
Step-by-Step Schedule & Ritual Timeline (Hour by Hour)
Detailed sequence from morning to night for rituals, puja, and lighting lamps
स्नान व एकादशी व्रत संकल्प
प्रातः 05:30 - 06:30 AMपीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी के सम्मुख व्रत का संकल्प लें।
पंचामृत अभिषेक व तुलसी अर्पण
प्रातः 07:00 - 08:30 AMशालिग्राम या श्री हरि की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं। पीले चंदन, तुलसी दल और पीले पुष्प अर्पित करें।
रमा एकादशी महात्म्य पाठ
दोपहर 12:00 PMपद्म पुराण की रमा एकादशी कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण करें।
तुलसी दीपदान व संध्या आरती
शाम 05:45 - 07:00 PMतुलसी चौरे पर घी का दीपक जलाएं और "विष्णु सहस्त्रनाम" का पाठ करें।
द्वादशी पारण
अगले दिन प्रातः 06:41 - 08:52 AMब्राह्मण को भोजन/दान देकर शुभ मुहूर्त में एकादशी व्रत का पारण करें।
Why is this Festival Celebrated?
दीपावली से ठीक 3 दिन पूर्व आने वाली रमा एकादशी समस्त पापों का नाश करने और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा दिलाने वाली परम पावन एकादशी है। मां लक्ष्मी का एक नाम "रमा" है, इसलिए इस एकादशी के प्रभाव से साधक को कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता। ब्रह्म हत्या जैसे महापाप भी इस व्रत के प्रभाव से क्षीण हो जाते हैं और साधक को वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
Pauranik Beliefs & Cultural Traditions
इस दिन भगवान विष्णु के केशव स्वरूप और माता रमा (लक्ष्मी) की संयुक्त पूजा की जाती है। एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है। रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करने से सहस्रों अश्वमेध यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है।
Complete Sacred Mythological Story (Vrat Katha)
Authentic narration from Sacred Puranas and Epics
पद्म पुराण अनुसार, प्राचीन काल में मुचुकुंद नाम का एक सत्यवादी राजा था। उसकी एक कन्या थी चंद्रभागा, जिसका विवाह राजा चंद्रसेन के पुत्र शोभन से हुआ था। शोभन शारीरिक रूप से दुर्बल था और भूख सहन नहीं कर पाता था। एक बार कार्तिक मास में शोभन ससुराल आया। वहां एकादशी का नियम था कि राज्य के सभी मनुष्य, पशु व पक्षी भी अन्न ग्रहण नहीं करते थे।
शोभन ने विवश होकर रमा एकादशी का निर्जला व्रत रखा, किंतु भूख-प्यास से आधी रात में उसके प्राण पखेरू उड़ गए। चंद्रभागा ने सती न होकर प्रभु चरणों में ध्यान लगाया। एकादशी व्रत के अमोघ प्रभाव से शोभन को देवलोक में मंदराचल पर्वत पर एक अलौकिक, स्वर्ण-निर्मित देवपुर प्राप्त हुआ। बाद में चंद्रभागा ने अपने जीवन भर के पुण्यों का फल देकर उस नगर को सदा के लिए स्थिर कर दिया और दोनों दिव्य रूप धारण कर आनंदपूर्वक रहने लगे।
How and Where is it Celebrated? (India & Worldwide)
Regional customs across Indian states and global celebrations by Indian diaspora
संपूर्ण भारत, विशेषकर वैष्णव संप्रदायों (वृंदावन, अयोध्या, तिरुपति, जगन्नाथ पुरी, पंढरपुर) में लाखों श्रद्धालु उपवास रखकर श्री हरि का अभिषेक करते हैं।
इस्कॉन (ISKCON) के विश्वभर के 800+ मंदिरों में रमा एकादशी पर विशेष हरिनाम संकीर्तन और फलहारी प्रसाद वितरण होता है।
Puja Samagri Checklist
Tick off items as you prepare for the ritual
Sacred Mantras & Invocations
Rules: Dos and Don'ts
- ✓ तुलसी दल पहले दिन ही तोड़ लें
- ✓ सात्विक फलाहार करें
- ✓ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें
- ✗ चावल, अन्न या तामसिक भोजन कदापि न करें
- ✗ एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें
- ✗ क्रोध व अपशब्दों से बचें
Upcoming Dates for Rama Ekadashi Vrat (2026–2030)
Accurate advance calendar for devotees, families and diaspora planning
| Year | Date | Day | Tithi | Action |
|---|---|---|---|---|
| 2026 | 05 November 2026 | Thursday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष एकादशी | Panchang |
| 2027 | 26 October 2027 | Tuesday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष एकादशी | Panchang |
| 2028 | 14 October 2028 | Saturday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष एकादशी | Panchang |
| 2029 | 02 November 2029 | Friday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष एकादशी | Panchang |
| 2030 | 23 October 2030 | Wednesday | कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष एकादशी | Panchang |
🪔 Explore Other Major Festivals & Vrats
Tap any festival to read full katha, muhurat and rituals