इंद्रकृत श्रीराम स्तोत्र || Indra Kruta Sri Rama Stotram

इंद्रकृत श्रीराम स्तोत्र || Indra Kruta Sri Rama Stotram इन्द्र उवाच भजेऽहं सदा राममिन्दीवराभं भवारण्यदावानलाभाभिधानम् । भवानीहृदा भावितानन्दरूपं भवाभावहेतुं भवादिप्रपन्नम् ॥ १ ॥ सुरानीकदुःखौघनाशैकहेतुं नराकारदेहं निराकारमीड्यम् । परेशं परानन्दरूपं वरेण्यं हरिं राममीशं भजे भारनाशम् ॥ २ ॥ प्रपन्नाखिलानन्ददोहं प्रपन्नं प्रपन्नार्तिनिःशेषनाशाभिधानम् । तपोयोगयोगीशभावाभिभाव्यं कपीशादिमित्रं भजे राममित्रम् ॥ ३ ॥ सदा भोगभाजां सुदूरे विभान्तं सदा योगभाजामदूरे विभान्तम् … Read more