श्री वैभव लक्ष्मी मंत्र | Shree Vaibhav Lakshmi Mantra

shree vaibhav lakshmi mantra hindi mein

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥ माता लक्ष्मी जी हिंदू धर्म में सुख,समृद्धि, धन, वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी है। माता लक्ष्मी जी की कई मंत्रों और स्तोत्रों से पूजा अर्चना की जाती है परन्तु सबसे प्रसिद्ध और … Read more

मीनाक्षी पञ्चरत्नम् || Meenakshi Pancharatnam Stotram

 श्री मीनाक्षी पञ्चरत्नम् स्तोत्रम ( Meenakshi Pancharatnam Stotram ) के रचियता श्री शंकराचार्य जी हैं ! श्री मीनाक्षी देवी जी माँ लक्ष्मी ( Lakshmi Mata ) जी का ही स्वरुप माना जाता हैं और मीनाक्षी पञ्चरत्नम् का पाठ श्री मीनाक्षी देवी जी की पूजा अर्चना में किया जाता है !  उद्यद्भानुसहस्रकॊटिसदृशां कॆयूरहारॊज्ज्वलां बिम्बॊष्ठीं स्मितदन्तपङ्क्तिरुचिरां पीताम्बरालङ्कृताम् … Read more

व्यापार वृद्धि लक्ष्मी साधना || Vyapar Vridhi Lakshmi Sadhana

व्यापार वृद्धि लक्ष्मी साधना || Vyapar Vridhi Lakshmi Sadhana जय जय जय लक्ष्मी भंडारी माई । सात दीप नव खंड दुहाई ।। रिद्धि-सिद्धि के गुण लाई । त्युं कार्य करावे ओं ठ ओं ।। ला व्यापार करावे ज्यूं चहु।। त्युं कार्य करावे ओं ठ ओं ।।

श्री लक्ष्मी हयग्रीव पञ्चरत्नम् || Sri Lakshmi Hayagreeva Pancharatnam

श्री लक्ष्मी हयग्रीव पञ्चरत्नम् || Sri Lakshmi Hayagreeva Pancharatnam || Sri Lakshmi Hayagriva Pancharatnam ज्ञानानन्दामलात्मा कलिकलुषमहातूल वातूल नामा,  सीमातीतात्मभूमा मम हयवदना देवता दर्विदारिः। याता श्वेताब्जमध्यं प्रविमलकमलस्रग्धरा दुग्धराशिः, स्मेरा सा राजराजप्रभृतिनुतपदा संपदं संविधत्ताम् ॥१॥ तारा ताराधिनाथस्फटिकमणिसुधाहीरहाराभिरामा, रामा रत्नाब्धिधन्या कुशलिकुचपरीरंभसंरंभधन्या। माद्याऽनन्यार्हदास्यप्रणतततिपरित्राणसत्रात्तदीक्षा, दक्षा साक्षात्कृतैषा सपदि हयमुखी देवता साऽवतान्नः॥२॥ अन्तर्ध्वान्तस्य कल्पं निगमहृतासुरध्वंसनैकान्तकल्पं कल्याणानां गुणानांजलधिमभिनमद्बान्धवं सैन्धवास्यम्। शुभ्रांशु भ्राजमानं दधतमरिदरे पुस्तकंहस्तकञ्जैः, … Read more

ऋण मोचन श्री लक्ष्मी साधना मंत्र || Rin Mochan Shri Lakshmi Sadhana Mantra

ऋण मोचन श्री लक्ष्मी साधना || Rin Mochan Shri Lakshmi Sadhana || Karz Mochan Shri Lakshmi Sadhana ॥ ॐ नमो ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मम गृहे धनं देही चिन्तां दूरं करोति स्वाहा ॥

श्री लक्ष्मी लहरी || Shri Lakshmi Lahari

श्री लक्ष्मी लहरी || Shri Lakshmi Lahari || Shri Laxmi Lahari समुन्मीलन्नीलांबुजनिकरनीराजितरुचा- मपांगानां भृङ्गैरमृतलहरी श्रेणिमसृणैः। ह्रिया  हीनं दीनं भृशमुदरलीनं करुणया हरिश्यामा सा मामवतु जडसामाजिकमपि ॥१॥ समुन्मीलत्वन्तःकरणकरुणोद्गारचतुरः करिप्राणत्राणप्रणयिनि दृगन्तस्तव मयि। यमासाद्योन्माद्यद्विपनियुतगण्डस्थलगल- न्मदक्लिन्नद्वारो  भवति सुखसारो नरपतिः॥२॥ उरस्यस्य भृशन्कबरभरनिर्यत्सुमनसः पतन्ति स्वर्बाला स्मरशरपराधीनमनसः। सुरास्तं गायन्ति स्फुरितनुतिगंगाधरमुखा- स्तवायं दृक्पातो यदुपरि कृपातो विलसति॥३॥ समीपे संगीतस्वरमधुरभंगी मृगदृशां विदूरे दानान्धद्विरदकलभोद्दामनिनदः। बहिर्द्वारे तेषां भवति … Read more

माँ लक्ष्मी मंत्र || Maa Lakshmi Mantra

माँ लक्ष्मी मंत्र || Maa Lakshmi Mantra ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ । ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ॐ। ॐ ह्री श्रीं … Read more

माङ्गल्यस्तवम् || Mangalya Sthavam

माङ्गल्यस्तवम् || Mangalya Sthavam || Mangalya Stavah दाल्भ्य उवाच- कार्यारंभेषु सर्वेषु  दुस्स्वप्नेषु च सत्तम । अमङ्गल्येषु दृष्टेषु यज्जप्तव्यं तदुच्यताम् ॥१॥ येनारंभाश्च सिद्ध्यन्ति दुस्स्वप्नश्चोपशान्तये। अमङ्गलानां दृष्टानां परिहारश्च जायते ॥२॥ पुलस्त्य उवाच – जनार्दनं भूतपतिं जगद्गुरुं स्मरन् मनुष्यः सततं महामुने। दुष्टान्यशेषान्यपहन्ति साधय-त्यशेषकार्याणि च यान्यभीप्सति ॥३॥ शृणुष्व चान्यद्गदतो ममाखिलं वदामि यत्ते द्विजवर्य मङ्गलम्। सर्वार्थसिद्धिं प्रददाति यत्सदा निहन्त्यशेषाणि च … Read more

श्री लक्ष्मी ध्यानम् || Sri Lakshmi Dhyanam

श्री लक्ष्मी ध्यानम् || Sri Lakshmi Dhyanam || Sri Laxmi Dhyanam सिन्दूरारुणकान्तिमब्जवसतिं सौन्दर्यवारांनिधिं, कॊटीराङ्गदहारकुण्डलकटीसूत्रादिभिर्भूषिताम् । हस्ताब्जैर्वसुपत्रमब्जयुगलादर्शंवहन्तीं परां, आवीतां परिवारिकाभिरनिशं ध्यायॆ प्रियां शार्ङ्गिणः ॥ १ ॥ भूयात् भूयॊ द्विपद्माभयवरदकरा तप्तकार्तस्वराभा, रत्नौघाबद्धमौलिर्विमलतरदुकूलार्तवालॆपनाढ्या । नाना कल्पाभिरामा स्मितमधुरमुखी सर्वगीर्वाणवनद्या, पद्माक्षी पद्मनाभॊरसिकृतवसतिः पद्मगा श्री श्रियॆ वः ॥ २ ॥ वन्दॆ पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां, हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम् । भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहरब्रह्मादिभिस्सॆवितां, पार्श्वॆ … Read more

देवकृत श्री लक्ष्मी स्तव || Deva Kruta Sri Lakshmi Sthavam

देवकृत श्री लक्ष्मी स्तव || Deva Kruta Sri Lakshmi Sthavam || Deva Kruta Sri Laxmi Sthavam क्षमस्व भगवत्यंब क्षमाशीले परात्परे। शुद्धसत्त्वस्वरूपे च कोपादिपरिवर्जिते ॥१॥ उपमे सर्वसाध्वीनां देवीनां देवपूजिते। त्वया विना जगत्सर्वं मृततुल्यञ्च निष्फलम्॥२॥ सर्वसम्पत्स्वरूपा त्वं सर्वेषां सर्वरूपिणी। रासेश्वर्यधिदेवी त्वं त्वत्कला सर्वयोषितः ॥३॥ कैलासे पार्वती त्वञ्च क्षीरोदे सिन्धुकन्यका। स्वर्गे च देवलक्ष्मीस्त्वं मर्त्यलक्ष्मीश्च भूतले॥४॥ वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः … Read more