मीनाक्षी पञ्चरत्नम् || Meenakshi Pancharatnam Stotram

 श्री मीनाक्षी पञ्चरत्नम् स्तोत्रम ( Meenakshi Pancharatnam Stotram ) के रचियता श्री शंकराचार्य जी हैं ! श्री मीनाक्षी देवी जी माँ लक्ष्मी ( Lakshmi Mata ) जी का ही स्वरुप माना जाता हैं और मीनाक्षी पञ्चरत्नम् का पाठ श्री मीनाक्षी देवी जी की पूजा अर्चना में किया जाता है !  उद्यद्भानुसहस्रकॊटिसदृशां कॆयूरहारॊज्ज्वलां बिम्बॊष्ठीं स्मितदन्तपङ्क्तिरुचिरां पीताम्बरालङ्कृताम् … Read more

व्यापार वृद्धि लक्ष्मी साधना || Vyapar Vridhi Lakshmi Sadhana

व्यापार वृद्धि लक्ष्मी साधना || Vyapar Vridhi Lakshmi Sadhana जय जय जय लक्ष्मी भंडारी माई । सात दीप नव खंड दुहाई ।। रिद्धि-सिद्धि के गुण लाई । त्युं कार्य करावे ओं ठ ओं ।। ला व्यापार करावे ज्यूं चहु।। त्युं कार्य करावे ओं ठ ओं ।।

श्री लक्ष्मी हयग्रीव पञ्चरत्नम् || Sri Lakshmi Hayagreeva Pancharatnam

श्री लक्ष्मी हयग्रीव पञ्चरत्नम् || Sri Lakshmi Hayagreeva Pancharatnam || Sri Lakshmi Hayagriva Pancharatnam ज्ञानानन्दामलात्मा कलिकलुषमहातूल वातूल नामा,  सीमातीतात्मभूमा मम हयवदना देवता दर्विदारिः। याता श्वेताब्जमध्यं प्रविमलकमलस्रग्धरा दुग्धराशिः, स्मेरा सा राजराजप्रभृतिनुतपदा संपदं संविधत्ताम् ॥१॥ तारा ताराधिनाथस्फटिकमणिसुधाहीरहाराभिरामा, रामा रत्नाब्धिधन्या कुशलिकुचपरीरंभसंरंभधन्या। माद्याऽनन्यार्हदास्यप्रणतततिपरित्राणसत्रात्तदीक्षा, दक्षा साक्षात्कृतैषा सपदि हयमुखी देवता साऽवतान्नः॥२॥ अन्तर्ध्वान्तस्य कल्पं निगमहृतासुरध्वंसनैकान्तकल्पं कल्याणानां गुणानांजलधिमभिनमद्बान्धवं सैन्धवास्यम्। शुभ्रांशु भ्राजमानं दधतमरिदरे पुस्तकंहस्तकञ्जैः, … Read more

ऋण मोचन श्री लक्ष्मी साधना मंत्र || Rin Mochan Shri Lakshmi Sadhana Mantra

ऋण मोचन श्री लक्ष्मी साधना || Rin Mochan Shri Lakshmi Sadhana || Karz Mochan Shri Lakshmi Sadhana ॥ ॐ नमो ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मम गृहे धनं देही चिन्तां दूरं करोति स्वाहा ॥

श्री लक्ष्मी लहरी || Shri Lakshmi Lahari

श्री लक्ष्मी लहरी || Shri Lakshmi Lahari || Shri Laxmi Lahari समुन्मीलन्नीलांबुजनिकरनीराजितरुचा- मपांगानां भृङ्गैरमृतलहरी श्रेणिमसृणैः। ह्रिया  हीनं दीनं भृशमुदरलीनं करुणया हरिश्यामा सा मामवतु जडसामाजिकमपि ॥१॥ समुन्मीलत्वन्तःकरणकरुणोद्गारचतुरः करिप्राणत्राणप्रणयिनि दृगन्तस्तव मयि। यमासाद्योन्माद्यद्विपनियुतगण्डस्थलगल- न्मदक्लिन्नद्वारो  भवति सुखसारो नरपतिः॥२॥ उरस्यस्य भृशन्कबरभरनिर्यत्सुमनसः पतन्ति स्वर्बाला स्मरशरपराधीनमनसः। सुरास्तं गायन्ति स्फुरितनुतिगंगाधरमुखा- स्तवायं दृक्पातो यदुपरि कृपातो विलसति॥३॥ समीपे संगीतस्वरमधुरभंगी मृगदृशां विदूरे दानान्धद्विरदकलभोद्दामनिनदः। बहिर्द्वारे तेषां भवति … Read more

माँ लक्ष्मी मंत्र || Maa Lakshmi Mantra

माँ लक्ष्मी मंत्र || Maa Lakshmi Mantra ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ । ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ॐ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ॐ। ॐ ह्री श्रीं … Read more

माङ्गल्यस्तवम् || Mangalya Sthavam

माङ्गल्यस्तवम् || Mangalya Sthavam || Mangalya Stavah दाल्भ्य उवाच- कार्यारंभेषु सर्वेषु  दुस्स्वप्नेषु च सत्तम । अमङ्गल्येषु दृष्टेषु यज्जप्तव्यं तदुच्यताम् ॥१॥ येनारंभाश्च सिद्ध्यन्ति दुस्स्वप्नश्चोपशान्तये। अमङ्गलानां दृष्टानां परिहारश्च जायते ॥२॥ पुलस्त्य उवाच – जनार्दनं भूतपतिं जगद्गुरुं स्मरन् मनुष्यः सततं महामुने। दुष्टान्यशेषान्यपहन्ति साधय-त्यशेषकार्याणि च यान्यभीप्सति ॥३॥ शृणुष्व चान्यद्गदतो ममाखिलं वदामि यत्ते द्विजवर्य मङ्गलम्। सर्वार्थसिद्धिं प्रददाति यत्सदा निहन्त्यशेषाणि च … Read more

श्री लक्ष्मी ध्यानम् || Sri Lakshmi Dhyanam

श्री लक्ष्मी ध्यानम् || Sri Lakshmi Dhyanam || Sri Laxmi Dhyanam सिन्दूरारुणकान्तिमब्जवसतिं सौन्दर्यवारांनिधिं, कॊटीराङ्गदहारकुण्डलकटीसूत्रादिभिर्भूषिताम् । हस्ताब्जैर्वसुपत्रमब्जयुगलादर्शंवहन्तीं परां, आवीतां परिवारिकाभिरनिशं ध्यायॆ प्रियां शार्ङ्गिणः ॥ १ ॥ भूयात् भूयॊ द्विपद्माभयवरदकरा तप्तकार्तस्वराभा, रत्नौघाबद्धमौलिर्विमलतरदुकूलार्तवालॆपनाढ्या । नाना कल्पाभिरामा स्मितमधुरमुखी सर्वगीर्वाणवनद्या, पद्माक्षी पद्मनाभॊरसिकृतवसतिः पद्मगा श्री श्रियॆ वः ॥ २ ॥ वन्दॆ पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां, हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम् । भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहरब्रह्मादिभिस्सॆवितां, पार्श्वॆ … Read more

देवकृत श्री लक्ष्मी स्तव || Deva Kruta Sri Lakshmi Sthavam

देवकृत श्री लक्ष्मी स्तव || Deva Kruta Sri Lakshmi Sthavam || Deva Kruta Sri Laxmi Sthavam क्षमस्व भगवत्यंब क्षमाशीले परात्परे। शुद्धसत्त्वस्वरूपे च कोपादिपरिवर्जिते ॥१॥ उपमे सर्वसाध्वीनां देवीनां देवपूजिते। त्वया विना जगत्सर्वं मृततुल्यञ्च निष्फलम्॥२॥ सर्वसम्पत्स्वरूपा त्वं सर्वेषां सर्वरूपिणी। रासेश्वर्यधिदेवी त्वं त्वत्कला सर्वयोषितः ॥३॥ कैलासे पार्वती त्वञ्च क्षीरोदे सिन्धुकन्यका। स्वर्गे च देवलक्ष्मीस्त्वं मर्त्यलक्ष्मीश्च भूतले॥४॥ वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः … Read more

श्री लक्ष्मी सूक्त || Shri Lakshmi Suktam

श्री लक्ष्मी सूक्त || Shri Lakshmi Suktam || Shri Laxmi Suktam श्री गणेशाय नमः । ॐ पद्मानने पद्मिनि पद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि । विश्वप्रिये विश्वमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सन्निधत्स्व ॥ पद्मानने पद्मऊरु पद्माश्री पद्मसम्भवे । तन्मे भजसिं पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम् ॥ अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने । धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ पुत्रपौत्रं धनं … Read more