Gopal Kavacham Stotra | Gopal kavach in Hindi

Gopal Kavacham in Hindi

नारद पंचरात्रा में श्री गोपाल कवचम स्तोत्र का उल्लेख किया गया है। श्री गोपाल कवचम को भगवान महादेव ने देवी पार्वती को बताया है। जो भक्त प्रतिदिन श्री गोपाल कवचम् का पाठ करता है, वह अपने सभी संकटों से मुक्त हो जाता है जो उसके शत्रुओं द्वारा बनाए गए बाधाओं पर जीत हासिल होती है … Read more

Geeta Updesh in Hindi | श्रीमद्भगवद्गीता गीता ज्ञान और अनमोल वचन

geeta ke updesh hindi mein

Gita Updesh ( Geeta Gyan ) by Lord Krishna   हे अर्जुन !   क्रोध को जीतने में मौन ही सबसे अधिक सहायक होता है ! !! कृष्ण ज्ञान !!      | गीता सार |  जो मेरी शरण में आता है उसका कभी विनाश नहीं होता | हे अर्जुन | तुम निडर होकर यह … Read more

Radha Krishna Quotes in Hindi with Images || राधा कृष्ण की शायरी

  जब आत्मविश्वाश प्रवल हो तो किसी की नकारत्मक प्रतिक्रियाएं, तुम्हारे अंतर्मन को पीड़ित नहीं कर सकती ! जो अपने मन पर नियंत्रण नहीं रखता ,वह स्वयं का शनै शनै शत्रु बनता जाता है। प्रेम में कोई वियोग नहीं होता ,प्रेम ही अंतिम योग है ,अंतिम मिलन है।  सुनो कान्हा, जिस पल कोई आस न … Read more

मधुराष्टकम् || Madhurashtakam || Adharam Madhuram Lyrics with Meaning in Hindi

 मधुराष्टकम्   ( Adharam Madhuram )  Madhurashtakam मधुराष्टकं में श्रीकृष्ण के बालरूप को मधुरता से माधुरतम रूप का वर्णन किया गया है। श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग एवं क्रिया-कलाप मधुर है, और उनके संयोग से अन्य सजीव और निर्जीव वस्तुएं भी मधुरता को प्राप्त कर लेती हैं।  अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं, … Read more

Krishna and Sudama Story || कृष्ण और सुदामा की कहानी

Krishna Sudama श्रीमद्भागवत महापुराण  के अनुसार- “राजा परीक्षित ने ब्राह्मणो से कहा- “श्री कृष्ण ! प्रेम और मोक्ष के दाता परब्रह्म परमात्मा भगवान  की शक्ति का कोई अंत नहीं है। इसलिये उनकी माधुर्य और ऐश्वर्य से भरी लीलाएँ भी अंतहीन हैं।    अब हम श्री कृष्ण की दूसरी लीलाएँ, जिनका वर्णन आपने अब तक नहीं … Read more

Bhakti Yoga : Bhagwat Geeta adhyay 12 hindi mein

बारहवां अध्याय – भक्ति योग – श्रीमद् भगवद गीता (Twelevth chapter -Bhakti Yoga- Shrimad Bhagavad Gita) in Hindi श्रीमद भगवत गीता के श्लोक में मनुष्य जीवन यापन का सार है | यह ग्रन्थ अन्धकार से लौ की तरफ ले जाता है | हर मुश्किल समय में मार्गदर्शक बनकर मुश्किल परिस्तिथि से बाहर निकाल सकता है … Read more

दामोदर अष्टकम् || Shri Damodarashtakam || Damodar ashtakam

Damodar Ashtakam   नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपं  लसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानं यशोदाभियोलूखलाद्धावमानं परामृष्टमत्यं ततो द्रुत्य गोप्या ॥ १॥ जिनके कपोलों पर दोदुल्यमान मकराकृत कुंडल क्रीड़ा कर रहे है, जो गोकुल नामक अप्राकृत चिन्मय धाम में परम शोभायमान है, जो दधिभाण्ड (दूध और दही से भरी मटकी) फोड़ने के कारण माँ यशोदा के भय से भीत होकर ओखल से कूदकर … Read more

Govindashtakam || Govinda Ashtakam || गोविन्दाष्टकम् ||

   चिदानन्दाकारं श्रुतिसरससारं समरसं निराधाराधारं भवजलधिपारं परगुणम् । रमाग्रीवाहारं व्रजवनविहारं हरनुतं सदा तं गोविन्दं परमसुखकन्दं भजत रे ॥ १ ॥ महांभोधिस्थानं स्थिरचरनिदानं दिविजपं सुधाधारापानं विहगपतियानं यमरतम् । मनोज्ञं सुज्ञानं मुनिजननिधानं ध्रुवपदं सदा तं गोविन्दं परमसुखकन्दं भजत रे ॥ २ ॥ धिया धीरैर्ध्येयं श्रवणपुटपेयं यतिवरै-र्महावाक्यैर्ज्ञेयं त्रिभुवनविधेयं विधिपरम् । मनोमानामेयं सपदि हृदि नेयं नवतनुं सदा तं गोविन्दं … Read more

Govinda ( Shree Krishna ) Panchavimshati Stotram || गोविन्द पञ्चविंशति स्तोत्रम् ||

  ईश्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानन्दविग्रहः। अनादिरादिर्गोविन्दः सर्वकारणकारणम् ॥१॥ चिन्तामणिप्रकरसद्मसु  कल्पवृक्ष-लक्षावृतेषु  सुरभीरभिपालयन्तम् । लक्ष्मीसहस्रशतसंभ्रमसेव्यमानं गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ॥२॥ वेणुं क्वणन्तमरविन्ददलायताक्षं बर्हावतंसमसितांबुदसुन्दरांगम्। कन्दर्पकोटिकमनीयविशेषशोभं गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ॥३॥   आलोलचन्द्रकलसद्वनमाल्यवंशी-रत्नाङ्गदं प्रणयकेलिकलाविलासम्। श्यामं त्रिभङ्गललितं नियतप्रकाशं गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ॥४॥ अङ्गानि यस्य सकलेन्द्रियवृत्तिमन्ति पश्यन्ति पान्ति कलयन्ति चिरं जगन्ति । आनन्दचिन्मयसदुज्ज्वलविग्रहस्य गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ॥५॥ अद्वैतमच्युतमनादिमनन्तरूपं आद्यं पुराणपुरुषं नवयौवनं च। वेदेषु … Read more

मुकुन्द मुक्तावली || Shri Mukunda Muktavali

मुकुन्द मुक्तावली || Shri Mukunda Muktavali नवजलधरवर्णं चम्पकोद्भासिकर्णं विकसित नयनास्यं विस्फुरन्मन्दहासम् । कनकरुचिदुकूलं चारुबर्हावतंसं कमपि निखिलसारं नौमि गोपीकुमारम् ॥१॥ सजलजलदनीलं वल्लवीकेलिलोलं श्रितसुरतरुमूलं विद्युदुल्लासिचेलम्। नतसुरमुनिजालं सन्मनोबिम्बलीलम् सुररिपुकुलकालं नौमि गोपालबालम् ॥२॥ सजलजलदनीलं दर्शितोदारलीलं करतलधृतशैलं वेणुनादैः रसालम्। व्रजजनकुलपालं कामिनीकेलिलोलं कलितललितमालं नौमि गोपालबालम् ॥३॥ स्मितललितकपोलं स्निग्धसंगीतलोलम् ललितचिकुरजालं चौर्य-चातुर्य-लीलम्। शतमखरिपुकालं शातकुंभाभचेलं कुवलयदलनीलं नौमि गोपालबालम् ॥४॥ मुरलिनिनदलोलं मुग्धमायूरचूडं दलितदनुजजालम् धन्यसौजन्यशीलम्। परहितनवहेलं … Read more