देवकृत श्री लक्ष्मी स्तव || Deva Kruta Sri Lakshmi Sthavam

देवकृत श्री लक्ष्मी स्तव || Deva Kruta Sri Lakshmi Sthavam || Deva Kruta Sri Laxmi Sthavam क्षमस्व भगवत्यंब क्षमाशीले परात्परे। शुद्धसत्त्वस्वरूपे च कोपादिपरिवर्जिते ॥१॥ उपमे सर्वसाध्वीनां देवीनां देवपूजिते। त्वया विना जगत्सर्वं मृततुल्यञ्च निष्फलम्॥२॥ सर्वसम्पत्स्वरूपा त्वं सर्वेषां सर्वरूपिणी। रासेश्वर्यधिदेवी त्वं त्वत्कला सर्वयोषितः ॥३॥ कैलासे पार्वती त्वञ्च क्षीरोदे सिन्धुकन्यका। स्वर्गे च देवलक्ष्मीस्त्वं मर्त्यलक्ष्मीश्च भूतले॥४॥ वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः … Read more