श्री गंगा अष्टकम || Maa Ganga Ashtak

श्री गंगा अष्टकम || Maa Ganga Ashtakam नमस्तेऽस्तु गङ्गे त्वदंगप्रसंगा-द्भुजंगास्तुरंगाः कुरंगाः प्लवंगाः । अनंगारिरंगाः ससंगाः शिवांगा भुजंगाधिपांगीकृतांगा भवन्ति ॥१॥ नमो जह्नुकन्ये न मन्ये त्वदन्यै-र्निसर्गेन्दुचिह्नादिभिर्लोकभर्तुः। अतोऽहं नतोऽहं सदा गौरतोये वसिष्ठादिभिर्गीयमानाभिधेये ॥२॥ त्वदामज्जनात् सज्जनो दुर्ज्जनो वा विमानैस्समानः समानैर्हिमानैः । समायाति तस्मिन् पुरारातिलोके पुरद्वारसंरुद्धदिक्पाललोके ।३॥ स्वरावासदंभोलिदंभोपि रंभा-परीरंभसंभावनाधीरचेताः। समाकाङ्क्षते त्वत्तटे वृक्षवाटी-कुटीरे वसन्नेतुमायुर्द्दिनानि ॥४॥ त्रिलोकस्य भर्तुर्ज्जटाजूटबन्धात् स्वसीमन्तभागे मनाक् प्रस्खलन्तः। भवान्या … Read more

गंगा की धरती पर उत्पत्ति – History of Holy River Ganga

गंगा की धरती पर उत्पत्ति  –  Dharti Par Maa Ganga  गंगा नदी हमारे देश की सबसे पवित्र नदी है |  हमारे भारत वर्ष में गंगा के प्रति लोगों के मन में बहुत श्रद्धा है, लोग गंगा को भगवान की तरह पूजनीय मानते हैं|  लोग गंगा के जल को अपने घर में रखते हैं और हर … Read more