श्री सरस्वती अष्टकम || Saraswati Ashtak

श्री सरस्वती अष्टकम  || Saraswati Ashtak अम्ब, थ्वदेय पद पङ्कज पांसु लेस, संबन्द बन्दुरथरा रसना थ्वधीयम् । संभयुधधिपदमप्य अम्रुथथि रम्यं, निम्भयथे किमुथ भोउम पदानि थस्य ॥१॥ मथ, स्थ्वधेय करुनंरुथ पूर्ण दृष्टि, अथक्वचिद्विधि वसन मनुजे न चेतः स्यतः । का थस्य घोर अपि धभ्यवाःअरनिध्र, भीथ्यधिकेषु समा भवमुपेयिवल्सु ॥२॥ वनि रेम गिरि सुथेथि च रूप भेदि, क्षोणी … Read more