Shri Hanumat Prokta Mantrarajatmak Ramstav Stotram

श्री हनुमत्प्रोक्त मन्त्रराजात्मक रामस्तव स्तोत्र || Shri Hanumat Prokta Mantrarajatmak Ramstav Stotram तिरश्चामपि चारातिसमवायं समेयुषाम् ।    यतः सुग्रीवमुख्यानां यस्तमुग्रं नमाम्यहम् ॥ १ ॥     सकुदेव प्रपन्नाय विशिष्टामैरयच्छ्रियम् ।   बिभीषणायाब्धितटे यस्तं वीरं नमाम्यहम् ॥ २ ॥     यो महान् पूजितो व्यापी महान् वै करुणामृतम् ।    श्रुतं येन जटायोश्च महाविष्णुं नमाम्यहम् ॥ … Read more