श्रीसीतारामाष्टकम् || Sri Sita Rama Ashtakam

श्री सीतारामाष्टकम् || Sri Sita Rama Ashtakam ब्रह्ममहेन्द्रसुरेन्द्रमरुद्गणरुद्रमुनीन्द्रगणैरतिरम्यं,  क्षीरसरित्पतितीरमुपेत्य नुतं हि सतामवितारमुदारम् । भूमिभरप्रशमार्थमथ प्रथितप्रकटीकृतचिद्घनमूर्तिं, त्वां भजतो रघुनन्दन देहि दयाघन मे स्वपदाम्बुजदास्यम् ॥ १ ॥ पद्मदलायतलोचन हे रघुवंशविभूषण देव दयालो, निर्मलनीरदनीलतनोऽखिललोकहृदम्बुजभासक भानो । कोमलगात्र पवित्रपदाब्जरजःकणपावितगौतमकान्त, त्वां भजतो रघुनन्दन देहि दयाघन मे स्वपदाम्बुजदास्यम् ॥ २ ॥ पूर्ण परात्पर पालय मामतिदीनमनाथमनन्तसुखाब्धे, प्रावृडदभ्रतडित्सुमनोहरपीतवराम्बर राम नमस्ते । कामविभञ्जन कान्ततरानन … Read more