माँ कात्यायनी देवी स्तोत्र

!! ध्यान !!
 
वन्दे वांछित मनोरथार्थचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
 
सिंहारूढचतुर्भुजाकात्यायनी यशस्वनीम्॥
 
 
स्वर्णवर्णाआज्ञाचक्रस्थितांषष्ठम्दुर्गा त्रिनेत्राम।
 
वराभीतंकरांषगपदधरांकात्यायनसुतांभजामि॥
 
 
पटाम्बरपरिधानांस्मेरमुखींनानालंकारभूषिताम्।
 
मंजीर हार केयुरकिंकिणिरत्नकुण्डलमण्डिताम्।।
 
 
प्रसन्नवंदनापज्जवाधरांकातंकपोलातुगकुचाम्।
 
कमनीयांलावण्यांत्रिवलीविभूषितनिम्न नाभिम्॥
 
!! स्तोत्र !!
 
कंचनाभां कराभयंपदमधरामुकुटोज्वलां।
 
स्मेरमुखीशिवपत्नीकात्यायनसुतेनमोअस्तुते॥
 
 
पटाम्बरपरिधानांनानालंकारभूषितां।
 
सिंहास्थितांपदमहस्तांकात्यायनसुतेनमोअस्तुते॥
 
 
परमदंदमयीदेवि परब्रह्म परमात्मा।
 
परमशक्ति,परमभक्ति्कात्यायनसुतेनमोअस्तुते॥
 
 
विश्वकर्ती,विश्वभर्ती,विश्वहर्ती,विश्वप्रीता।
 
विश्वाचितां,विश्वातीताकात्यायनसुतेनमोअस्तुते॥
 
 
कां बीजा, कां जपानंदकां बीज जप तोषिते।
 
कां कां बीज जपदासक्ताकां कां सन्तुता॥
 
 
कांकारहíषणीकां धनदाधनमासना।
 
कां बीज जपकारिणीकां बीज तप मानसा॥
 
 
कां कारिणी कां मूत्रपूजिताकां बीज धारिणी।
 
कां कीं कूंकै क:ठ:छ:स्वाहारूपणी॥ 
 
Maa Katyayani Devi Stotra माँ कात्यायनी देवी स्तोत्र
 

माँ कात्यायनी देवी स्तोत्र के लाभ

  • माँ कात्यायनी दुर्गा माता का छठा रूप है
  • माँ कात्यायनी देवी स्तोत्र का पाठ करने से हर संकट दूर होता है
  • माँ कात्यायनी देवी स्तोत्र का पाठ करने से किसी भी प्रकार का भय हो दूर होता है
  • इस पाठ को करने से हर प्रकार का रोग ठीक होता है
  • यह पाठ बहुत चमत्कारी है
  • यह पाठ बहुत लाभदायक है
  • इस पाठ को करने से विवाह में कोई रुकावट आ रही हो तो वो भी दूर होती है

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FAQ’S

  1. माँ कात्यायनी दुर्गा माता का कौन सा रूप है?

    माँ कात्यायनी दुर्गा माता का छठा रूप है

  2. माँ कात्यायनी देवी की पूजा कब की जाती है?

    माँ कात्यायनी देवी की पूजा नवरात्रे के छठे दिन की जाती है


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