माँ वैष्णो देवी, हिन्दू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं। माता के भक्त दुनियाभर में हैं और अपनी माँ को बेहद प्रेम भी करते हैं। माँ के नाम के जागरण भी किये जाते हैं। वैष्णो माता की पूजा विधि में नीचे दिए गए मन्त्रों का जाप होता है।

Vaishno Devi jaap Mantra

Table of Contents

मां वैष्णो देवी का आवाहन इस मंत्र से करना चाहिए

ॐ सहस्त्र शीर्षाः पुरूषः सहस्त्राक्षः सहस्त्र-पातस-भूमिग्वं सव्वेत-स्तपुत्वा यतिष्ठ दर्शागुलाम् आगच्छ वैष्णो देवी स्थाने-चात्र स्थिरो भव ||

मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।

विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।

बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरि‍नीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु मे कमलालयाया:।।5।।

कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारेर्धाराधरे स्फुरति या तडिदंगनेव्।
मातु: समस्त जगतां महनीय मूर्तिभद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनाया:।।6।।

इस मंत्र का उच्चारण करते हुए माता वैष्णो देवी को जल समर्पण करना चाहिए

ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धादि-भिर्युतम् |
अनिष्ट-हर्ता गृहाणेदं भगवती भक्त-वत्सला ||
ॐ श्री वैष्णवी नमः |
पाद्योः पाद्यं समर्पयामि

इस मंत्र के द्वारा माता वैष्णो देवी को दक्षिणा अर्पण करना चाहिए

हिरण्यगर्भ-गर्भस्थं हेम बीजं विभावसोः |
अनन्तं पुण्यफ़ल दमतः शान्ति प्रयच्छ मे ||

माता वैष्णो देवी की पूजा के दौरान इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें चन्दन समर्पण करना चाहिए

ॐ श्रीखण्ड-चन्दनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम् |
विलेपन मातेश्वरी चन्दनं प्रति-गृहयन्ताम् ||

इस मंत्र के द्वारा माता वैष्णो देवी का दधि स्नान करना चाहिए

पयस्तु वैष्णो समुद-भूतं मधुराम्लं शशि-प्रभम् |
दध्या-नीतं मया स्नानार्थ प्रति-गृहयन्ताम् ||

माता वैष्णो देवी की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें वस्त्र समर्पण करना चाहिए

शीत-शीतोष्ण-संत्राणं लज्जाया रक्षणं परम् |
देहा-लंकारण वस्त्रमतः शान्ति प्रयच्छ मे ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए माता वैष्णो देवी को पुष्पमाला समर्पण करना चाहिए


माल्या दीनि सुगन्धीनि माल्यादीनि वै देवी |
मया-हृताणि-पुष्पाणि गृहायन्ता पूजनाय भो ||

माता वैष्णो देवी की पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें बिल्वपत्र एवं पुष्प समर्पण करना चाहिए

बन्दारूज-नाम्बदार मन्दार प्रिये धीमहि |
मन्दार जानि पुष्पाणि रक्त-पुष्पाणि-पेहि भो ||

माता वैष्णो देवी की पूजा के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करते हुए उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए

ॐ वैष्णो देवी नमस्ते-स्तु गृहाण करूणाकरी |
अर्घ्य च फ़लं संयुक्तं गंधमाल्या-क्षतैयुतम् ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए माता वैष्णो देवी की पूजा में उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए

ॐ विचित्र रत्न्-खचितं दिव्या-स्तरण-संयुक्तम् |
स्वर्ण-सिंहासन चारू गृहिष्व वैष्णो माँ पूजितः ||

माता वैष्णो देवी की पूजा में उनका आवाहन इस मंत्र के द्वारा करना चाहिए

ॐ सहस्त्र शीर्षाः पुरूषः सहस्त्राक्षः सहस्त्र-पातस-भूमिग्वं सव्वेत-स्तपुत्वा यतिष्ठ दर्शागुलाम् |
आगच्छ वैष्णो देवी स्थाने-चात्र स्थिरो भव ||

ॐ ह्रींग डुंग दुर्गायै नमः

माँ दुर्गा  के चमत्कारी महामंत्र यह मंत्र सभी प्रकार की सिद्धिः को पाने में मदद करता है, यह मंत्र सबसे प्रभावी और गुप्त मंत्र माना जाता है और सभी उपयुक्त इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति इस मंत्र में होती है। 

“ॐ अंग ह्रींग क्लींग चामुण्डायै विच्चे “

यह देवी माँ का बहुत लोकप्रिय मंत्र है। यह मंत्र देवी प्रदर्शन के समारोहों में आवश्यक है।

” हे गौरी शंकरधंगी ! यथा तवं शंकरप्रिया,
तथा मां कुरु कल्याणी ! कान्तकान्तम् सुदुर्लभं “

दुर्गासप्तशी प्रदर्शन से पहले इस मंत्र को सुनाना आवश्यक है।

इस मंत्र की शक्ति : यह मंत्र दोहराने से हमें सुंदरता ,बुद्धि और समृद्धि मिलती है। 
यह आत्म की प्राप्ति में मदद करता है।

गौरी मंत्र लायक पति मिलने के लिए

दुर्गासप्तशी के अदबुध मंत्र सब प्रकार के कल्याण के लिये

“सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। 
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते॥”

धन के लिए मंत्र

“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: 
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या 
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

आकर्षण के लिए मंत्र

“ॐ क्लींग ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती ही सा,
बलादाकृष्य मोहय महामाया प्रयच्छति “

विपत्ति नाश के लिए मंत्र


“शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। 
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोस्तुते॥”

शक्ति प्राप्ति के लिए मंत्र


सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्ति भूते सनातनि। 
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोस्तुते॥

रक्षा पाने के लिए मंत्र


शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। 
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥

आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मंत्र


देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। 
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

भय नाश के लिए मंत्र


“सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। 
भयेभ्याहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

महामारी नाश के लिए मंत्र


जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। 
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥

सुलक्षणा पत्‍‌नी की प्राप्ति के लिए मंत्र


पत्‍‌नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। 
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥

पाप नाश के लिए मंत्र


हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्। 
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽन: सुतानिव॥

भुक्ति-मुक्ति की प्राप्ति के लिए मंत्र


विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥


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